TB Free Haryana : हरियाणा ने AI की मदद से 104 दिनों में खोज निकाले 25,666 नए टीबी मरीज, जानिए कैसे बदल रही है बीमारी से लड़ाई
एक्टिव स्क्रीनिंग, AI एक्स-रे, खांसी की आवाज के विश्लेषण और निक्षय वाहनों के जरिए घर-घर पहुंच रहा स्वास्थ्य विभाग
TB Free Haryana : हरियाणा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्क्रीनिंग के जरिए तपेदिक (टीबी) के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता हासिल की है। 100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान (चरण-II) के पहले 104 दिनों में राज्य में 25,666 नए टीबी मरीजों की पहचान की गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, यह उपलब्धि सक्रिय स्क्रीनिंग, आधुनिक तकनीक और समय पर जांच की रणनीति का परिणाम है। स्वास्थ्य विभाग इस सफलता का श्रेय प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के नेतृत्व में चल रही रणनीतिक पहल और अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन को देता है। अभियान का उद्देश्य बीमारी की शुरुआती पहचान कर समय पर इलाज सुनिश्चित करना और संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना है।
आखिर AI ने टीबी की पहचान की प्रक्रिया को कैसे बदला, इस अभियान की क्या है खासियत और मरीजों को इससे क्या फायदा हो रहा है? जानिए दैनिक ट्रिब्यून वेब एक्सप्लेनर में।
क्या है 100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान?
विश्व टीबी दिवस 24 मार्च 2026 से शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य टीबी के मरीजों की जल्द पहचान कर उन्हें समय पर उपचार से जोड़ना है। सामान्य तौर पर मरीज स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने के बाद जांच कराते हैं, लेकिन इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद गांवों और शहरी बस्तियों में पहुंचकर संभावित मरीजों की स्क्रीनिंग कर रही हैं। इसे एक्टिव केस फाइंडिंग (Active Case Finding-ACF) कहा जाता है।
क्या 25,666 नए मरीज मिलना अच्छी खबर है या चिंता की ?
पहली नजर में इतनी बड़ी संख्या चिंता बढ़ाने वाली लग सकती है, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सकारात्मक संकेत मानते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि अचानक टीबी तेजी से फैल गई, बल्कि यह है कि पहले जांच से छूट रहे मरीज अब समय रहते सामने आ रहे हैं। शुरुआती पहचान होने से इलाज जल्दी शुरू होता है और संक्रमण फैलने की संभावना भी काफी कम हो जाती है।
AI ने कैसे बदली टीबी जांच की तस्वीर ?
हरियाणा ने इस अभियान में कई AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया है, जिससे कम समय में बड़ी आबादी की स्क्रीनिंग संभव हुई।
1. AI-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन
राज्य में पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीनें तैनात की गई हैं। इनमें मौजूद AI सॉफ्टवेयर कुछ ही सेकंड में एक्स-रे का विश्लेषण कर फेफड़ों में टीबी की आशंका वाले हिस्सों की पहचान करता है। अंतिम पुष्टि डॉक्टर और अन्य जांचों के आधार पर की जाती है।
इससे क्या फायदा हुआ?
- रिपोर्ट जल्दी मिलने लगी।
- दूरदराज क्षेत्रों में भी स्क्रीनिंग संभव हुई।
- विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट की कमी का असर कम हुआ।
2. CATB ऐप कैसे काम करता है?
'कफ अगेंस्ट टीबी' (CATB) मोबाइल एप्लिकेशन स्मार्टफोन के जरिए व्यक्ति की खांसी की आवाज का AI से विश्लेषण करता है। यदि ऐप टीबी की आशंका दर्शाता है तो संबंधित व्यक्ति को आगे की जांच के लिए भेजा जाता है। इससे शुरुआती स्तर पर संभावित मरीजों की पहचान आसान हो रही है।
3. Vulnerability Mapping (VM-TB) क्या है?
स्वास्थ्य विभाग ने उपलब्ध स्वास्थ्य आंकड़ों और AI की मदद से 2,111 उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों की पहचान की। इसके बाद इन्हीं क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए गए, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जांच पहुंच सकी।
NAAT टेस्ट क्या होता है?
NAAT (Nucleic Acid Amplification Test) आधुनिक आणविक जांच तकनीक है। यह टीबी पैदा करने वाले बैक्टीरिया की आनुवंशिक सामग्री (DNA) की पहचान करती है।
इसकी खासियत
- कुछ घंटों में परिणाम।
- शुरुआती संक्रमण की सटीक पहचान।
- दवा-प्रतिरोधी टीबी की पहचान में भी उपयोगी।
एक नजर में अभियान की बड़ी उपलब्धियां
| उपलब्धि | संख्या |
|---|---|
| नए टीबी मरीज | 25,666 |
| कुल स्वास्थ्य शिविर | 3,914 |
| उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में शिविर | 2,854 |
| स्क्रीनिंग | 4,73,197 लोग |
| चेस्ट एक्स-रे | 2,25,321 |
| NAAT जांच | करीब 1.25 लाख |
| पोषण किट वितरित | 23,962 |
| नए निक्षय मित्र | 2,635 |
| निक्षय वाहन | 65 |
निक्षय वाहन क्यों हैं खास?
राज्य में 65 निक्षय वाहन मोबाइल मेडिकल यूनिट के रूप में काम कर रहे हैं। ये वाहन गांवों और दूरदराज क्षेत्रों में जाकर टीबी स्क्रीनिंग, डिजिटल एक्स-रे, सैंपल संग्रह, प्राथमिक जांच और मरीजों को इलाज से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
निक्षय मित्रों की भूमिका क्या है?
टीबी का इलाज कई महीनों तक चलता है। इस दौरान मरीजों को बेहतर पोषण और सामाजिक सहयोग की जरूरत होती है। निक्षय मित्र ऐसे स्वयंसेवक, संस्थाएं या व्यक्ति हैं जो मरीजों को पोषण किट, मानसिक सहयोग और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराते हैं। अभियान के दौरान राज्य में 2,635 नए निक्षय मित्र जुड़े हैं।
आयुष्मान आरोग्य शिविरों से क्या बदला ?
टीबी स्क्रीनिंग को आयुष्मान आरोग्य शिविरों के साथ जोड़ा गया है। अब लोगों को एक ही स्थान पर टीबी के अलावा मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एनीमिया और अन्य बीमारियों की जांच भी उपलब्ध हो रही है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है और अधिक लोग जांच के लिए आगे आए हैं।
टीबी के सामान्य लक्षण क्या हैं ?
यदि इनमें से कोई लक्षण दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक बना रहे तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए—
- लगातार खांसी
- बलगम या खून आना
- लगातार बुखार
- रात में अधिक पसीना आना
- तेजी से वजन घटना
- भूख कम लगना
- लगातार कमजोरी महसूस होना
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत क्या है ?
हरियाणा का यह अभियान बताता है कि तकनीक और जमीनी स्वास्थ्य तंत्र का बेहतर तालमेल टीबी जैसी बीमारी से लड़ाई को अधिक प्रभावी बना सकता है। AI आधारित स्क्रीनिंग, घर-घर पहुंचकर जांच, मोबाइल मेडिकल यूनिट, पोषण सहायता और सामुदायिक भागीदारी ने मिलकर मरीजों की शुरुआती पहचान को आसान बनाया है। इससे ऐसे हजारों मरीज समय रहते सामने आए, जिनका इलाज शुरू कर संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
एक नजर में
- 1. 104 दिनों में कितने नए टीबी मरीज मिले?
25,666। - 2. अभियान कब शुरू हुआ?
24 मार्च 2026 (विश्व टीबी दिवस)। - 3. कितने लोगों की स्क्रीनिंग हुई?
4.73 लाख से अधिक। - 4. AI का सबसे बड़ा उपयोग किसमें हुआ?
एक्स-रे विश्लेषण और खांसी की आवाज के विश्लेषण में। - 5. CATB ऐप क्या करता है?
AI की मदद से खांसी की आवाज का विश्लेषण कर संभावित टीबी मरीजों की पहचान करता है। - 6. कितने चेस्ट एक्स-रे किए गए?
2.25 लाख से अधिक। - 7. NAAT टेस्ट क्यों महत्वपूर्ण है?
यह टीबी की तेज और अधिक सटीक जांच करता है। - 8. निक्षय वाहन क्या हैं?
मोबाइल मेडिकल यूनिट, जो गांवों और दूरदराज क्षेत्रों में टीबी स्क्रीनिंग और जांच करती हैं। - 9. निक्षय मित्र क्या करते हैं?
टीबी मरीजों को पोषण और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराते हैं। - 10. इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही?
AI आधारित सक्रिय स्क्रीनिंग के जरिए बड़ी संख्या में ऐसे टीबी मरीजों की समय रहते पहचान, जो सामान्य व्यवस्था में जांच से छूट सकते थे।

