स्वच्छ वार्ड रैंकिंग 2026; चंडीगढ़ के वार्डों में अब स्वच्छता की परीक्षा, 55 मानकों पर होगी रैंकिंग
1,000 अंकों के आधार पर होगा मूल्यांकन; कचरा उठाने से लेकर रीसाइक्लिंग तक हर स्तर की व्यवस्था परखी जाएगी, 2 अक्टूबर को घोषित होंगे विजेता
Swachh Ward Ranking 2026 : चंडीगढ़ में अब यह तय करने के लिए वार्ड स्तर पर प्रतिस्पर्धा होगी कि कौन सा इलाका स्वच्छता और कचरा प्रबंधन में सबसे बेहतर है। पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने गुरुवार को नगर निगम की ‘स्वच्छ वार्ड रैंकिंग 2026’ की शुरुआत की। एक महीने चलने वाली इस प्रतियोगिता में शहर के सभी वार्डों का 1,000 अंकों और 55 मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। विजेताओं की घोषणा और पुरस्कार वितरण 2 अक्टूबर 2026 को होगा।
क्या है स्वच्छ वार्ड रैंकिंग?
यह केवल यह देखने की प्रतियोगिता नहीं है कि किसी वार्ड की सड़कें कितनी साफ हैं। इसमें वार्ड की पूरी कचरा प्रबंधन व्यवस्था को परखा जाएगा। यानी घर से कचरा निकलने के बाद उसके उठान, अलग-अलग करने, छंटाई, ढुलाई, रीसाइक्लिंग और अंतिम निपटान तक की पूरी प्रक्रिया मूल्यांकन में शामिल होगी।
नगर निगम का लक्ष्य स्वच्छता को केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी न रखकर पार्षदों, नागरिकों, आरडब्ल्यूए, बाजार संगठनों, स्कूलों और अन्य संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी बनाना है।
किन 55 मानकों पर होगी जांच?
रैंकिंग में स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़े कुल 55 मानक रखे गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
घर-घर कचरा उठाने की व्यवस्था
स्रोत पर गीले और सूखे कचरे का अलगाव
सार्वजनिक स्थानों की सफाई
पार्कों, गलियों और बाजारों की स्थिति
बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वालों का प्रबंधन
सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक
सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति
जीरो-वेस्ट पहल
वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन
जनभागीदारी
कचरे की छंटाई, ढुलाई और रीसाइक्लिंग
कचरे के अंतिम निपटान की व्यवस्था
सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, जमीन पर दिखना होगा असर
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने जोर दिया कि रैंकिंग केवल कागजों, दावों या तस्वीरों के आधार पर नहीं होनी चाहिए। जमीनी स्थिति और वास्तविक परिणाम इसके मूल्यांकन का आधार बनने चाहिए। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ की पहचान केवल इसकी योजनाबद्ध सड़कों, हरियाली और वास्तुकला से नहीं है। स्वच्छता, नागरिक अनुशासन और सार्वजनिक स्थानों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार भी ‘सिटी ब्यूटीफुल’ की पहचान का हिस्सा हैं।
सबसे अच्छा वार्ड कौन बनेगा?
रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले वार्डों को ‘प्लैटिनम वार्ड’ के रूप में प्रोत्साहित किया जाएगा। शीर्ष तीन वार्डों को विकास अनुदान देने का प्रस्ताव है—
पहला स्थान : ₹50 लाख
दूसरा स्थान : ₹30 लाख
तीसरा स्थान : ₹20 लाख
इसका उद्देश्य वार्डों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और सफल प्रयोगों को दूसरे वार्डों में लागू करना है।
स्कूल भी होंगे प्रतियोगिता का हिस्सा
स्वच्छता अभियान को स्कूलों तक ले जाने के लिए नगर निगम ने ‘स्कूल स्टार अवार्ड्स’ भी शुरू किए हैं। स्वच्छता, कचरा पृथक्करण, पर्यावरण संरक्षण और विद्यार्थियों की भागीदारी में बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को पुरस्कार दिए जाएंगे।
पहला पुरस्कार : ₹51,000
दूसरा पुरस्कार : ₹31,000
तीसरा पुरस्कार : ₹21,000
राज्यपाल ने छात्रों को ‘स्वच्छता एंबेसडर’ के रूप में जोड़ने पर जोर दिया, ताकि स्वच्छता का संदेश स्कूल से घर और फिर समाज तक पहुंचे।
नागरिकों की भूमिका सबसे अहम
इस रैंकिंग में नगर निगम की व्यवस्था के साथ नागरिकों की आदतें भी महत्वपूर्ण होंगी। घर पर गीला और सूखा कचरा अलग करना, कचरा निर्धारित स्थान पर डालना और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना अभियान की बुनियाद है।
राज्यपाल ने Reduce, Reuse और Recycle को अपनाने पर जोर दिया। साथ ही खाद बनाने, ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचने वाले कचरे की मात्रा कम हो।
सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा भी एजेंडे में
राज्यपाल ने सफाई कर्मचारियों के योगदान की सराहना करते हुए उनकी गरिमा, प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। जोखिम वाले सफाई कार्यों में मशीनों और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की जरूरत भी बताई। मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि हर वार्ड की अपनी चुनौतियां हैं। रैंकिंग से स्थानीय स्तर पर समस्याओं की पहचान और उनके व्यावहारिक समाधान के लिए पार्षदों तथा नागरिकों को साथ काम करने का अवसर मिलेगा। नगर निगम आयुक्त अमित कुमार (IAS) ने बताया कि रैंकिंग का ढांचा मापने योग्य, पारदर्शी और परिणाम आधारित रखा गया है। उन्होंने कहा कि इससे वार्डों की कमियों को पहचानने और बेहतर कार्यप्रणाली को दूसरे क्षेत्रों में अपनाने में मदद मिलेगी।
आखिर इस पहल से क्या बदलेगा?
इस पहल में स्वच्छता को केवल ‘कितनी सफाई हुई’ के बजाय ‘कचरे का पूरा प्रबंधन कितना बेहतर हुआ’ के नजरिये से देखा जा रहा है। घर से निकलने वाले कचरे से लेकर उसके अंतिम निपटान तक पूरी व्यवस्था को एक साथ परखने से वार्ड स्तर पर जवाबदेही तय करने में मदद मिल सकती है। प्रतियोगिता 3 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर 2026 को समाप्त होगी। इसी दिन विजेताओं की घोषणा और पुरस्कार वितरण किया जाएगा।

