Stubble Management: पराली जलाने की टेंशन होगी खत्म! धान के अवशेष के बीच उगाएं आलू, पानी की भी होगी बचत
कृषि वैज्ञानिक के शोध में दावा- पराली हटाए बिना आलू की खेती से पैदावार में 25 से 50% तक बढ़ोतरी, पानी की खपत आधी
Stubble Management: जब भी धान की फसल लहलहाकर किसान व देश के लिए सुकून का सबब बनती है, उसके तुरंत बाद पराली निस्तारण का संकट सामने आ जाता है। किसान के सामने जल्दी होती है अगली फसल की तैयारी की। उसके सामने चुनौती होती है धान के अवशेष हटाकर नये सिरे से खेत तैयार करने की।
पंजाब- हरियाणा में जब किसान कोई ठोस विकल्प न मिलने पर पराली जलाता है तो उस पर दिल्ली की आबोहवा प्रदूषित करने का आरोप लगता है। अब पराली निस्तारण के अन्य तमाम व्यावहारिक व अव्यवहारिक उपायों के बीच कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिये नई उम्मीद जगायी है।
आईसीएआर के सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर वूमेन इन एग्रीकल्चर के कृषि वैज्ञानिक सुकांता षडंगी ने शोध के जरिये निष्कर्ष दिया है कि किसान पराली वाले खेत में आलू की फसल उगाकर न केवल पराली का निस्तारण कर सकता है, बल्कि इससे खेत में पर्याप्त नमी बने रहने से पानी की खपत को भी कम कर सकता है।
अब शायद पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश में पराली जलाने और दिल्ली में प्रदूषण बढ़ाने की शिकायत खत्म हो सकती है। अब तक जिस पराली के धुएं से दिल्ली की हवा जहरीली होने के आरोप लगते रहे हैं। अब वैज्ञानिकों के प्रयास से हुई खोज के बाद पराली को जलाए बिना उसी खेत में आलू उगाये जा सकेंगे। अब न केवल प्रदूषण संकट खत्म होगा, साथ ही पानी की बचत भी की जा सकेगी।
आईसीएआर के सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर वूमेन इन एग्रीकल्चर, भुवनेश्वर के कृषि वैज्ञानिक सुकांता षडंगी के शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि यदि इस खोज का हरियाणा, पंजाब व उत्तर प्रदेश आदि की सरकारें अनुपालन करने के लिये किसानों को प्रेरित करती हैं तो उन पर दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग की चादर तानने के आरोप लगने बंद हो जाएंगे। हालांकि, अभी बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पराली जलाने की कितनी भूमिका है, लेकिन हर बार जाड़ों की शुरुआत में जब मौसम के बदलाव व भौगोलिक कारणों से प्रदूषण विकराल रूप लेता है तो किसानों पर उंगली उठायी जाती हैं।
बहरहाल, अब नई खोज से न केवल पराली टेंशन खत्म होगी बल्कि अब बोनस के रूप में आलू की नकद फसल का इंतजाम भी हो सकेगा। दरअसल, इन नई खोज में किसान पराली को हटाए बिना खेत में आलू की फसल उगा सकते हैं। इससे जहां किसान की पैदावार में पच्चीस से पचास प्रतिशत की वृद्धि होगी, वहीं आलू खेती में पचास फीसदी की पानी की बचत हो सकेगी।
दरअसल, पराली के नीचे उगने वाले आलू को अधिक नमी मिलेगी। पराली की वजह से पानी का वाष्पन कम होगा। भुवनेश्वर स्थित केंद्रीय कृषिरत महिला संस्थान के विशेषज्ञ डॉक्टर सुकांता का दावा है कि पराली में उगाया गया आलू बिना स्प्रे से भी 4 से 6 महीने खराब नहीं होता।

