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Smart Border : सीमा सुरक्षा का नया ब्लूप्रिंट: क्या है 'स्मार्ट बॉर्डर' मॉडल, जिससे घुसपैठ से ड्रोन तक हर खतरे से निपटने की तैयारी?

तकनीक, एजेंसियों के समन्वय और सीमांत क्षेत्रों की भागीदारी पर आधारित है सरकार का नया सीमा सुरक्षा मॉडल।

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Smart Border : भारत की सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। पारंपरिक घुसपैठ के साथ अब ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध, संगठित अपराध और जनसांख्यिकीय बदलाव जैसे मुद्दे भी सुरक्षा एजेंसियों के सामने हैं। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा के नए मॉडल पर काम कर रही है। सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन-2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'स्मार्ट बॉर्डर' और चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड की रूपरेखा पेश करते हुए बताया कि सीमा सुरक्षा को तकनीक आधारित और अधिक समन्वित बनाया जाएगा।

क्यों बदल रही है सीमा सुरक्षा की रणनीति?

भारत की सीमाएं पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल और भूटान सहित कई देशों से लगती हैं। पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन के जरिए तस्करी, अवैध घुसपैठ, फर्जी मुद्रा, साइबर अपराध और संगठित अपराध के मामले बढ़े हैं। ऐसे में केवल गश्त, चौकियों और बाड़ के भरोसे सीमा सुरक्षा को प्रभावी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। इसी कारण सरकार रिएक्टिव (घटना के बाद कार्रवाई) के बजाय प्रोएक्टिव (पहले से रोकथाम) मॉडल अपनाने पर जोर दे रही है।

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क्या है 'स्मार्ट बॉर्डर'?

स्मार्ट बॉर्डर का मतलब केवल मजबूत बाड़ लगाना नहीं है। इसका उद्देश्य तकनीक के जरिए पूरे सीमा क्षेत्र पर रियल-टाइम निगरानी रखना है। इसके तहत ड्रोन, रडार, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों तक पहुंचेगी, जिससे प्रतिक्रिया का समय कम होगा और कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकेगी।

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क्या है चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड?

सरकार की योजना के अनुसार सीमा सुरक्षा केवल सीमा सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं रहेगी। चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड में चार प्रमुख हिस्सेदार होंगे—सीमा सुरक्षा बल और अन्य केंद्रीय एजेंसियां, राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन, केंद्र सरकार की संबंधित एजेंसियां और सीमांत क्षेत्रों के स्थानीय नागरिक। सरकार का मानना है कि इन चारों के बीच बेहतर तालमेल से घुसपैठ, तस्करी और अन्य सुरक्षा चुनौतियों पर अधिक प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

डेमोग्राफी मिशन और म्यांमार सीमा पर फोकस

गृह मंत्री ने सीमांत क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का भी उल्लेख किया। सरकार का कहना है कि जहां असामान्य बदलाव दिखाई दें, वहां समय रहते उनका अध्ययन कर आवश्यक कदम उठाए जाएं। इसी उद्देश्य से डेमोग्राफी मिशन शुरू किया गया है।

इसके साथ ही सरकार 31 हजार करोड़ रुपये की लागत से 1610 किलोमीटर लंबी म्यांमार सीमा पर बाड़बंदी करा रही है। इसका उद्देश्य अवैध घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाना और सीमा क्षेत्रों की निगरानी को मजबूत करना है।

सुरक्षा के साथ सीमांत विकास भी प्राथमिकता

सरकार सीमा सुरक्षा को केवल सैन्य नजरिए से नहीं देख रही। वायब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती गांवों में सड़क, बिजली, संचार, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि यदि सीमांत गांव आबाद और आर्थिक रूप से मजबूत रहेंगे तो पलायन कम होगा और स्थानीय लोग भी सीमा सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण सहयोगी बनेंगे।

क्या बदल सकता है आगे?

सरकार का लक्ष्य सीमा सुरक्षा को पारंपरिक व्यवस्था से निकालकर तकनीक आधारित, एकीकृत और बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र में बदलना है। यदि स्मार्ट बॉर्डर, चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड और सीमांत विकास की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि इन पहलों की वास्तविक सफलता उनके क्रियान्वयन और जमीनी परिणामों पर निर्भर करेगी।

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