Gallantry Awards 2026 : आसमान में मिसाइलों को चकमा और जमीन पर आतंकियों का काल... पढ़ें 14 शूरवीरों की शौर्य गाथा
शौर्य गाथा-अंक 3 : राष्ट्रपति भवन में 7 जांबाजों को वीर चक्र और 7 को मिला शौर्य चक्र; खौफनाक मुठभेड़ों और अचूक हवाई हमलों की दास्तां
Gallantry Awards 2026 : जब आसमान में मौत बनकर बरसती दुश्मन की मिसाइलें हों या जमीन पर घात लगाए बैठे खूंखार आतंकी, भारत के जांबाज न तो कदम पीछे खींचते हैं और न ही उनका हौसला डगमगाता है। वे तो बस मौत की आंखों में आंखें डालकर विजय की नई इबारत लिखते हैं। राष्ट्रपति भवन का ऐतिहासिक दरबार हॉल सोमवार को एक बार फिर ऐसे ही अदम्य साहस और फौलादी जज्बे का गवाह बना, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के सर्वश्रेष्ठ रक्षकों को वीरता पुरस्कारों से अलंकृत किया गया।
दैनिक ट्रिब्यून की विशेष सीरीज 'शौर्य गाथा' के इस तीसरे अंक में आज हम आपको 7 वीर चक्र और 5 शौर्य चक्र अभियानों की उन 12 रोंगटे खड़े कर देने वाली विस्तृत गाथाओं से रूबरू करा रहे हैं, जहां हमारे 14 शूरवीरों ने न सिर्फ अभेद्य रक्षा प्रणालियों को भेदा, बल्कि अपनी जान पर खेलकर हर असंभव मिशन को फतह किया।
विंग कमांडर (अब ग्रुप कैप्टन) जॉय चंद्रा/पायलट
वीर चक्र
दुश्मन के सुरक्षा घेरे को भेदकर लक्ष्य किया ध्वस्त![]()
विंग कमांडर (अब ग्रुप कैप्टन) जॉय चंद्रा को अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली से सुरक्षित दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने के दौरान प्रदर्शित असाधारण साहस और वीरता के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया है।
एक महत्वपूर्ण अभियान के दौरान उन्हें पूर्व निर्धारित लक्ष्यों पर प्रिसिजन स्ट्राइक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दुश्मन के रडार नेटवर्क, लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस वायु रक्षा प्रणाली के बीच उन्होंने अपने फॉर्मेशन का नेतृत्व करते हुए बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरी ताकि रडार की नजर से बचा जा सके।
मिशन के दौरान दुश्मन के लड़ाकू विमान और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां सक्रिय हो गईं। इसके बावजूद उन्होंने अद्भुत धैर्य, सूझबूझ और त्वरित निर्णय क्षमता का परिचय देते हुए लक्ष्य पर सफलतापूर्वक हथियार दागे और उनके प्रभावी प्रहार को सुनिश्चित किया। घातक खतरों के बीच भी उन्होंने पूरी एकाग्रता बनाए रखी और निर्धारित लक्ष्यों को नष्ट करने में सफलता हासिल की। उनकी इसी असाधारण वीरता और साहस के लिए उन्हें वीर चक्र प्रदान किया गया।
लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट/1988 (स्वतंत्र) मीडियम बैटरी![]()
वीर च्रक्र
सटीक हमलों से आतंकी शिविरों को किया तबाह
लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट को सैन्य अभियान के दौरान प्रदर्शित असाधारण साहस, नेतृत्व और परिचालन कौशल के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया है। यूनिट कमांडर के रूप में उन्होंने आतंकी शिविरों को पूरी तरह नष्ट करने वाले अभियानों का सफल नेतृत्व किया।
ऑपरेशन से पहले उन्होंने नवीनतम सैटेलाइट चित्रों की मदद से लक्ष्यों के सटीक निर्देशांक निर्धारित किए और विस्तृत योजना तैयार की। उन्होंने अपनी टीम को कठोर अभ्यास कराया ताकि अभियान में सामरिक बढ़त और त्वरित वापसी सुनिश्चित की जा सके।
आदेश मिलते ही उन्होंने अंधेरे की आड़ में अपनी यूनिट को लक्ष्य क्षेत्र तक पहुंचाया और व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह किए बिना अभियान का नेतृत्व किया। उनकी सटीक कार्रवाई से आतंकी ठिकाने पूरी तरह नष्ट हो गए। दुश्मन की जवाबी गोलाबारी के खतरे के बीच भी उन्होंने अपने सभी जवानों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की।
बाद में एक अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्य को नष्ट करने का दायित्व मिलने पर भी उन्होंने भारी गोलाबारी और लगातार हमलों के बीच अदम्य साहस दिखाते हुए अपनी यूनिट का नेतृत्व किया और मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। उनकी वीरता और नेतृत्व के लिए उन्हें वीर चक्र प्रदान किया गया।
स्क्वाड्रन लीडर (अब विंग कमांडर) सार्थक कुमार/फ्लाइंग पायलट
वीर चक्र
दो लंबी दूरी के हमलों में लक्ष्य किए ध्वस्त![]()
स्क्वाड्रन लीडर (अब विंग कमांडर) सार्थक कुमार को अत्यंत जोखिमपूर्ण सैन्य अभियानों के दौरान प्रदर्शित असाधारण साहस, समर्पण और पेशेवर दक्षता के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया है। मिशन प्लानिंग सेल के सदस्य के रूप में उन्होंने कई गहरे हवाई हमलों की योजना बनाने, समन्वय स्थापित करने और उन्हें सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूरी गोपनीयता के साथ लक्ष्यों की विस्तृत जानकारी तैयार की और सटीक खुफिया सूचनाओं को अभियान में शामिल कर मिशन की सफलता सुनिश्चित की।
ऑपरेशन के दौरान उन्हें दो महत्वपूर्ण लंबी दूरी के स्ट्राइक मिशनों का दायित्व सौंपा गया। पहले मिशन में उन्होंने निर्धारित लक्ष्य पर सर्जिकल सटीकता के साथ हमला कर उसे ध्वस्त कर दिया। अगले ही दिन उन्हें एक और महत्वपूर्ण लक्ष्य को नष्ट करने का कार्य मिला। दुश्मन की लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइलों के खतरे के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस और धैर्य का परिचय देते हुए मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उनकी इसी असाधारण वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें वीर चक्र प्रदान किया गया।
स्क्वाड्रन लीडर सिद्धांत सिंह/ फ्लाइंग पायलट
वीर चक्र
दुश्मन के सुरक्षा घेरे को भेदकर लक्ष्य साधा
स्क्वाड्रन लीडर सिद्धांत सिंह को अत्याधुनिक वायु रक्षा तंत्र से सुरक्षित दुश्मन के लक्ष्य पर सटीक हमला करने के दौरान प्रदर्शित असाधारण साहस और वीरता के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया है।
एक महत्वपूर्ण अभियान के दौरान तीन विमानों के फॉर्मेशन को पूर्व निर्धारित लक्ष्य पर स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक का दायित्व सौंपा गया था। मिशन के लिए सटीक योजना, उत्कृष्ट उड़ान कौशल और उच्च स्तर की सामरिक समझ की आवश्यकता थी, क्योंकि दुश्मन का क्षेत्र लंबी दूरी की मिसाइलों, वायु रक्षा प्रणालियों और लड़ाकू विमानों से सुरक्षित था।
ऑपरेशन के दौरान फॉर्मेशन ने रडार से बचने के लिए बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरी और निर्धारित समय पर हथियार दागने के लिए ऊंचाई हासिल की। मिशन के बीच दुश्मन के लड़ाकू विमान और मिसाइल प्रणालियां सक्रिय हो गईं, लेकिन सिद्धांत सिंह ने अद्भुत धैर्य, सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। घातक खतरे के बीच भी उन्होंने पूरी एकाग्रता बनाए रखी और निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी इसी वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें वीर चक्र प्रदान किया गया।
स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक/ फ्लाइंग पायलट
वीर च्रक
घातक खतरों के बीच दो लक्ष्यों को किया ध्वस्त![]()
स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक को अत्यंत जोखिमपूर्ण हवाई अभियान के दौरान प्रदर्शित असाधारण साहस, युद्ध कौशल और नेतृत्व के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया है।
मध्यरात्रि में एक महत्वपूर्ण मिशन के दौरान उन्होंने बिना सुरक्षा वाले स्ट्राइक पैकेज के उप मिशन लीडर के रूप में दुश्मन के अत्याधुनिक वायु रक्षा तंत्र से सुरक्षित ठिकानों पर हमले का नेतृत्व किया। दुश्मन का क्षेत्र रडार नेटवर्क, लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी की मिसाइलों से सुरक्षित था, जबकि लक्ष्य पर हमला करने के लिए उपलब्ध समय बेहद कम था।
अंधेरे में कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए उन्होंने दुश्मन के सुरक्षा घेरे को भेदा और पहले लक्ष्य पर सटीक प्रहार किया। इस दौरान वे दुश्मन की मिसाइलों और हवाई खतरों की जद में थे, फिर भी उन्होंने धैर्य और सूझबूझ बनाए रखी। इसके बाद उन्होंने उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में दूसरा हमला भी किया और एक अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्य को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया।
अभियान के दौरान उन्होंने दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक प्रतिरोध उपायों को भी विफल किया तथा कई मिशनों का नेतृत्व करते हुए दुश्मन के ठिकानों को निष्क्रिय बनाया। उनकी असाधारण वीरता और साहस के लिए उन्हें वीर चक्र प्रदान किया गया।
फ्लाइट लेफ्टिनेंट (अब स्क्वाड्रन लीडर) आरशवीर सिंह ठाकुर/ फ्लाइंग पायलट
वीर चक्र
दुश्मन के सुरक्षा घेरे को भेदकर किया सटीक हमला![]()
फ्लाइट लेफ्टिनेंट (अब स्क्वाड्रन लीडर) आरशवीर सिंह ठाकुर को अत्यंत जोखिमपूर्ण हवाई अभियान के दौरान प्रदर्शित असाधारण साहस, नेतृत्व और युद्ध कौशल के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया है।
मध्यरात्रि में शुरू हुए एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन के दौरान उन्होंने बिना सुरक्षा वाले स्ट्राइक पैकेज के हिस्से के रूप में दुश्मन के अत्यधिक संरक्षित लक्ष्य पर सटीक हमला किया। इसके अलावा उसी रात उन्होंने दो विमानों के एक अन्य महत्वपूर्ण स्ट्राइक मिशन का भी नेतृत्व किया। दुश्मन का क्षेत्र अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों और मिसाइलों से सुरक्षित था, जबकि हमला करने के लिए उपलब्ध समय बेहद सीमित था।
अंधेरे में कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए और खराब मौसम से बचते हुए उन्होंने अपने फॉर्मेशन का नेतृत्व किया। हथियार दागने के दौरान उनका दल दुश्मन की घातक मिसाइलों और हवाई खतरों की जद में था, लेकिन उन्होंने अद्भुत धैर्य और साहस का परिचय देते हुए लक्ष्य को सफलतापूर्वक नष्ट किया।
उनकी आक्रामक रणनीति और साहसिक संचालन ने दुश्मन को रणनीतिक रूप से असहाय बना दिया। मिशन योजना, लक्ष्य विश्लेषण और अभियान के सफल संचालन में उनके महत्वपूर्ण योगदान तथा असाधारण वीरता के लिए उन्हें वीर चक्र प्रदान किया गया।
नायब सूबेदार सतीश कुमार/4 डोगरा
वीर चक्र
दुश्मन की गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया![]()
नायब सूबेदार सतीश कुमार को नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर एक सैन्य अभियान के दौरान प्रदर्शित असाधारण साहस, नेतृत्व और युद्ध कौशल के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया है।
ऑपरेशन के दौरान भारतीय चौकियां दुश्मन की भारी तोपखाने और मोर्टार गोलाबारी की चपेट में आ गईं। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मोर्टार पोजीशन कंट्रोलर के रूप में तैनात नायब सूबेदार सतीश कुमार ने तुरंत मोर्चा संभाला और अपनी मोर्टार पलटन का नेतृत्व किया।
उन्होंने अद्भुत सामरिक दक्षता और युद्धक्षेत्र की समझ का परिचय देते हुए सटीक जवाबी कार्रवाई का निर्देश दिया। उनके नेतृत्व में मोर्टार दल ने दुश्मन की कई महत्वपूर्ण चौकियों और ठिकानों को निशाना बनाया, दो निगरानी कैमरे नष्ट किए तथा विरोधी पक्ष को भारी नुकसान पहुंचाया। उनकी प्रभावी जवाबी और काउंटर-मोर्टार कार्रवाई ने दुश्मन की गोलाबारी को दबा दिया और भारतीय पक्ष को सामरिक बढ़त दिलाई।
पूरे अभियान के दौरान उन्होंने शांतचित्त रहते हुए अपने जवानों का मनोबल बनाए रखा और बिना किसी नुकसान के मिशन को सफल बनाया। उनकी वीरता, उत्कृष्ट पेशेवर क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें वीर चक्र प्रदान किया गया।
इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट और इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख/छत्तीसगढ़ पुलिस
शौय चक्र
187 जवानों की टीम को सुरक्षित निकाल दिलाई बड़ी जीत![]()
छत्तीसगढ़ में 16 अप्रैल 2024 को हुए अब तक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान में असाधारण साहस और नेतृत्व का परिचय देने के लिए इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट और इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है।
एसएसपी कांकेर को मिली खुफिया सूचना के आधार पर दोनों अधिकारियों के नेतृत्व में 187 जवानों की टीम ने अभियान शुरू किया। ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने घात लगाकर सुरक्षा बलों पर भीषण हमला कर दिया। उनका उद्देश्य जवानों को नुकसान पहुंचाना और हथियार लूटना था। नक्सलियों की लगातार फायरिंग के बीच दोनों अधिकारियों ने अद्भुत धैर्य और सूझबूझ का परिचय दिया।
इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट ने मौके पर ही प्रभावी जवाबी रणनीति तैयार की और उसका सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया। तीन घंटे से अधिक चली मुठभेड़ में चार जवान घायल हो गए, लेकिन लगातार गोलीबारी के बीच उन्होंने तत्काल बचाव योजना बनाकर घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला।
अभियान के बाद तलाशी में कई नक्सलियों के शव और बड़ी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार बरामद हुए। इस बड़ी सफलता में दोनों अधिकारियों के साहसिक नेतृत्व की निर्णायक भूमिका रही, जिसके लिए उन्हें शौर्य चक्र प्रदान किया गया।
लेफ्टिनेंट कर्नल नीतेश भारती शुक्ला/19वीं बटालियन दि सिख रेजिमेंट![]()
शौर्य चक्र
घुसपैठ की कोशिश नाकाम, तीन विदेशी आतंकी ढेर
लेफ्टिनेंट कर्नल नीतेश भारती शुक्ला को नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर घुसपैठ की कोशिश को विफल करते हुए प्रदर्शित असाधारण साहस, नेतृत्व और युद्ध कौशल के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है।
13 जुलाई 2024 को आतंकियों की घुसपैठ संबंधी खुफिया सूचना मिलने पर उनके नेतृत्व में एक घात अभियान चलाया गया। अगले दिन निगरानी दल ने तीन आतंकियों की गतिविधि का पता लगाया। स्थिति को भांपते हुए उन्होंने तुरंत अपनी टीम की तैनाती में बदलाव कर आतंकियों को जाल में फंसा लिया।
जैसे ही आतंकी मारक क्षेत्र में पहुंचे, उन्होंने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान एक आतंकी ने अंधाधुंध फायरिंग करते हुए उनकी टीम पर ग्रेनेड फेंके। अपने जवानों पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल शुक्ला ने अपनी जान की परवाह किए बिना भारी गोलीबारी के बीच आगे बढ़कर उसे बेहद नजदीक से मार गिराया। इसके बाद आमने-सामने की मुठभेड़ में दूसरे आतंकी को भी ढेर कर दिया और तीसरे आतंकी के सफाए में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके नेतृत्व में बिना किसी नुकसान के अभियान सफल रहा और तीन विदेशी आतंकवादी मारे गए। इसी वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें शौर्य चक्र प्रदान किया गया।
मेजर आदित्य प्रताप सिंह (एसएम) /दि राजपूताना राइफल्स-44 असम राइफल्स
शौर्य चक्र
72 घंटे निगरानी के बाद बड़े आतंकी हमले को किया नाकाम![]()
मेजर आदित्य प्रताप सिंह को अरुणाचल प्रदेश में सुरक्षा बलों पर बड़े हमले की साजिश को विफल करते हुए प्रदर्शित असाधारण साहस और वीरता के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है।
भारत-म्यांमार सीमा के निकट एक प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन के भारी हथियारों से लैस सदस्यों के घुसपैठ कर आईईडी विस्फोटों के जरिए सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की सूचना मिलने पर उन्होंने अभियान शुरू किया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और प्रतिकूल मौसम के बीच 72 घंटे से अधिक समय तक निगरानी के बाद 25 अक्टूबर 2024 को उन्होंने उग्रवादियों का पता लगा लिया।
मेजर आदित्य प्रताप सिंह ने अग्रिम मोर्चे पर रहते हुए स्थिति का आकलन किया और अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना उग्रवादियों के बेहद करीब पहुंच गए। करीब 30 मीटर की दूरी से उग्रवादियों ने उन पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी, लेकिन उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए जवाबी कार्रवाई की और अकेले ही संगठन के एक कुख्यात एवं मोस्ट वांटेड उग्रवादी को मार गिराया। अभियान के दौरान हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक, डेटोनेटर और आईईडी बनाने की बड़ी सामग्री बरामद हुई। बड़े आतंकी हमले को विफल करने में दिखाई गई वीरता के लिए उन्हें शौर्य चक्र प्रदान किया गया।
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मेजर आशीष कुमार/7 पैरा स्पेशल फोर्सिस
शौर्य चक्र
96 घंटे घात लगाकर बैठे, दो खूंखार आतंकी ढेर किए![]()
मेजर आशीष कुमार को अनंतनाग में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान प्रदर्शित असाधारण साहस, नेतृत्व और युद्ध कौशल के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है।
1-2 नवंबर 2024 को चलाए गए इस अभियान में उन्होंने आतंकियों के संभावित आवाजाही मार्गों का सटीक आकलन करते हुए घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्र में 96 घंटे तक निगरानी और घात लगाकर अभियान चलाया। आतंकियों की गतिविधि का पता चलने पर उन्होंने धैर्य बनाए रखते हुए उनकी हर हरकत पर नजर रखी।
जब आतंकियों की पहचान हथियारों के साथ हो गई और वे मात्र 50 मीटर की दूरी पर रह गए, तब मेजर आशीष कुमार ने स्वयं उन्हें ललकारा। जवाब में आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना उन्होंने आतंकियों का पीछा किया और उन पर प्रभावी जवाबी कार्रवाई की।
उन्होंने पूरी टीम, सपोर्ट हथियारों और स्नाइपर दस्तों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया, जिससे दोनों आतंकवादी मार गिराए गए। मारे गए आतंकियों में एक ए++ श्रेणी का आतंकवादी भी शामिल था, जो जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर कई हमलों के लिए जिम्मेदार था। उनकी वीरता और नेतृत्व के लिए उन्हें शौर्य चक्र प्रदान किया गया।
कांस्टेबल संजय तिवारी और कांस्टेबल फिदा हुसैन डार/ सीआरपीएफ
शौर्य चक्र
गोलियां लगने के बावजूद आतंकी को एक मिनट में मार गिराया![]()
सीआरपीएफ के कांस्टेबल संजय तिवारी और कांस्टेबल फिदा हुसैन डार को श्रीनगर के खनयार क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान प्रदर्शित अद्वितीय साहस और वीरता के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है।
2 नवंबर 2024 को विदेशी आतंकवादी की मौजूदगी की सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी की। तलाशी अभियान के दौरान आतंकवादी ने घर के भीतर से भारी गोलीबारी शुरू कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आतंकवादी को मार गिराने के लिए विशेष हमला दल बनाया गया, जिसमें दोनों जवान शामिल थे।
अंधेरे का फायदा उठाते हुए हमला दल धीरे-धीरे लक्ष्य की ओर बढ़ा, लेकिन घर के नजदीक पहुंचते ही उन पर भारी गोलीबारी और ग्रेनेड हमले शुरू हो गए। इसके बावजूद दोनों जवान आगे बढ़ते रहे और मुख्य दरवाजे तक पहुंच गए। इसी दौरान दो ग्रेनेड उनके बेहद करीब फटे और दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। संजय तिवारी के पैर, गर्दन और कमर के पास चोटें आईं, जबकि फिदा हुसैन डार के पैर में गंभीर चोट लगी।
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद दोनों ने अदम्य साहस दिखाते हुए जवाबी फायर जारी रखा और एक मिनट से भी कम समय में आतंकवादी को मार गिराया। उनकी असाधारण वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें शौर्य चक्र प्रदान किया गया।
