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Ramzan Fasting Secrets 2026 : रमज़ान में थकान और प्यास से बचने का क्या है तरीका ? जानिये एक्सपर्ट की वो खास सलाह और सहरी के ये 5 'पावर फूड्स'

दोपहर होते ही क्यों सूखने लगता है गला ? प्यास पर काबू पाने के लिए एक्सपर्ट ऋतिका समद्दार ने बताया र्मूला',

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Ramzan Fasting Secrets 2026 :  पवित्र महीना रमज़ान इबादत, आत्म-चिंतन और आपसी भाईचारे का संदेश लेकर आता है। 30 दिनों तक सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा रखना न केवल आध्यात्मिक बल्कि शारीरिक परीक्षा भी होती है। विशेष रूप से कामकाजी महिलाओं, कॉलेज के विद्यार्थियों और दफ्तर जाने वाले लोगों के लिए, जिन्हें रोज़ों के साथ अपनी पेशेवर ज़िम्मेदारियां भी निभानी होती हैं, यह काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

बढ़ती गर्मी और लंबी अवधि के रोज़ों के कारण शरीर में पानी की कमी और ऊर्जा का स्तर गिरना सामान्य है, लेकिन सही पोषण से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। डाइट एक्सपर्ट ऋतिका समद्दार के अनुसार, पूरे दिन स्फूर्ति बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका एक संतुलित और सोच-समझकर तैयार की गई 'सहरी' है।

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सहरी का महत्व केवल पेट भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अगले 14-15 घंटों के लिए शरीर का 'फ्यूल टैंक' भरने जैसा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खान-पान में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो रोज़ा न केवल आसान होता है बल्कि डिटॉक्सिफिकेशन के जरिए सेहत के लिए भी लाभकारी सिद्ध होता है।

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सहरी में क्यों जरूरी है सही चुनाव ?

अक्सर भारतीय परिवारों में सहरी में परांठे, तली हुई चीजें और गाढ़ी चाय पीना पसंद किया जाता है। ऋतिका समद्दार के मुताबिक, "ऐसा भोजन (Simple Carbs) शरीर में इंसुलिन और ऊर्जा के स्तर को एक बार तो तेज़ी से बढ़ाता है, लेकिन वह उतनी ही जल्दी गिर भी जाता है।" इससे दिन चढ़ने के साथ ही प्यास और कमजोरी अधिक महसूस होने लगती है।

इसके विपरीत, 'कॉम्प्लेक्स कार्ब्स' (जटिल कार्बोहाइड्रेट) और 'प्रोटीन' युक्त भोजन ऊर्जा को धीरे-धीरे शरीर में संचारित करता है। यह प्रक्रिया रक्त शर्करा (Blood Sugar) को स्थिर रखती है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है और दोपहर के समय होने वाली सुस्ती या सिरदर्द से बचाव होता है।

दिन भर एक्टिव रहने के लिए 5 'पावर फूड्स'

विशेषज्ञों ने सहरी के लिए इन पांच खाद्य पदार्थों को सबसे उपयुक्त और ऊर्जा का भंडार बताया है:

  • कैलिफोर्निया बादाम: इनमें विटामिन-बी2, विटामिन-ई, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये शरीर को 'सस्टेनेबल एनर्जी' (टिकाऊ ऊर्जा) देते हैं। इन्हें रात भर भिगोकर खाने या स्मूदी में मिलाकर लेना अधिक फायदेमंद है।

  • अंडे: प्रोटीन का सबसे सुलभ स्रोत अंडे हैं। इनमें आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं जो मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं। इन्हें उबालकर या कम तेल में सब्जियों के साथ 'वेजी ऑमलेट' बनाकर लेने से भूख का अहसास देर से होता है।
  • ओट्स (जई): यह फाइबर का पावरहाउस है। दूध के साथ तैयार एक कटोरी ओट्स शरीर को धीमी गति से जलने वाली ऊर्जा प्रदान करता है। यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में भी सहायक है।
  • ग्रीक योगर्ट और सीड्स: साधारण दही की तुलना में इसमें प्रोटीन अधिक होता है। इसमें चिया सीड्स या अलसी के बीज मिलाने से 'हेल्दी फैट' बढ़ जाता है, जो पाचन तंत्र को ठंडा रखता है।
  • केले और खजूर: पोटैशियम और प्राकृतिक शुगर से भरपूर केले इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं। खजूर न केवल सुन्नत है, बल्कि यह आयरन का भी बेहतरीन स्रोत है जो कमजोरी से बचाता है।

प्यास से बचने के लिए 'सिपिंग' फॉर्मूला

रोज़े के दौरान सबसे बड़ी शारीरिक चुनौती 'डिहाइड्रेशन' यानी पानी की कमी है। इसे दूर करने के लिए विशेषज्ञ 'सिपिंग' (Sipping) तकनीक की सलाह देते हैं। अक्सर लोग इफ्तार या सहरी के समय एक साथ 3-4 गिलास पानी पी लेते हैं। यह गलत तरीका है। एक साथ पानी पीने से किडनी उसे शरीर में रोकने के बजाय जल्दी बाहर निकाल देती है। सही तरीका यह है कि इफ्तार से सहरी के बीच हर एक घंटे में एक-एक गिलास पानी पिएं।

इसके अलावा सहरी में तेज़ चाय, कॉफी या अधिक नमक वाले अचार-मसालों से सख्त परहेज करें। नमक कोशिकाओं से पानी सोखता है, जबकि कैफीन शरीर से तरल पदार्थों को जल्दी बाहर निकालता है, जिससे गला सूखने लगता है।

इफ्तार : उपवास तोड़ने का वैज्ञानिक क्रम

दिन भर खाली पेट रहने के बाद अचानक भारी भोजन पाचन तंत्र पर बुरा असर डालता है। इसे सही क्रम में करें :

  1. शुरुआत : 2-3 खजूर और सादे पानी से रोज़ा खोलें। यह शरीर को तत्काल ग्लूकोज (Instant Glucose) प्रदान करता है।
  2. हाइड्रेशन : मुख्य भोजन से पहले सब्जियों का सूप या नारियल पानी लें। यह आंतों को ठोस भोजन पचाने के लिए तैयार करता है।
  3. संतुलित भोजन : मुख्य भोजन में ग्रिल्ड चिकन, दालें और ताजी सब्जियां शामिल करें। ज्यादा तेल और मसालों से बचें क्योंकि ये नींद में खलल डालते हैं और सुबह एसिडिटी पैदा करते हैं।

बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानी

स्वास्थ्य मानकों का ध्यान रखना अनिवार्य है। जो लोग टाइप-2 डायबिटीज के मरीज हैं या इंसुलिन लेते हैं, उन्हें रोज़ा रखने से पहले अपने डॉक्टर से मिलकर दवा की खुराक (Dose adjustment) जरूर बदलवानी चाहिए।

इसी तरह, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को यदि चक्कर आना या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखें, तो उन्हें तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। इफ्तार में मीठे शरबत के बजाय पुदीने का पानी या नींबू पानी बेहतर विकल्प है।

लाइफस्टाइल टिप: 'पावर नैप' और व्यायाम

रोज़े के दौरान अपनी दिनचर्या में छोटे बदलाव ऊर्जा बचा सकते हैं। भारी कसरत के बजाय इफ्तार के 2 घंटे बाद 15-20 मिनट की मध्यम गति की सैर पाचन के लिए रामबाण है। दोपहर के समय 15 से 20 मिनट की छोटी झपकी (Power Nap) मस्तिष्क की नसों को आराम देती है। सहरी के अंत में पानी में भीगे हुए 'सब्जा' (Basil Seeds) का सेवन एक प्राकृतिक कूलेंट के रूप में कार्य करता है। डाइट एक्सपर्ट ऋतिका समद्दार के अनुसार एक संतुलित सहरी ही रोज़े के अनुभव को सुखद और सेहतमंद बना सकती है। याद रखें, संयम और सही पोषण ही सफल इबादत की कुंजी है।

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