Drug Overdose Crisis : नशे का जानलेवा सच : पंजाब में सैकड़ों तो कनाडा में 10 साल में 18,000 मौतें, क्यों डरा रहे हैं ये आंकड़े ?
मौत का अंतरराष्ट्रीय ग्राफ : ब्रिटिश कोलंबिया में स्वास्थ्य आपातकाल के 10 साल पूरे, फेंटानिल बना सबसे बड़ा विलेन; पंजाब में सरकारी आंकड़ों और राजनीतिक दावों के बीच फंसी सच्चाई
Drug Overdose Crisis : नशीली दवाओं के ओवरडोज से होने वाली मौतें आज सरहदों को लांघकर एक ऐसी वैश्विक मानवीय त्रासदी बन चुकी हैं, जिसका हल किसी भी देश के पास स्पष्ट नहीं है। हालिया आंकड़े एक चौंकाने वाला अंतर पेश करते हैं। जहां पंजाब में पिछले एक दशक में ड्रग ओवरडोज से होने वाली आधिकारिक मौतें सैकड़ों में दर्ज की गई हैं, वहीं कनाडा के केवल एक प्रांत ब्रिटिश कोलंबिया में यह आंकड़ा 18,000 के पार पहुंच गया है। 14 अप्रैल को कनाडा में इस संकट के खिलाफ घोषित सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की 10वीं बरसी मनाई गई, जो इस समस्या की भयावहता को रेखांकित करती है।
कनाडा: एक दशक की आपात स्थिति और 18 हजार लाशें
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में नशे की स्थिति इतनी गंभीर है कि 14 अप्रैल 2016 को वहां 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' घोषित करनी पड़ी थी। उस समय 2015 में अवैध नशीली दवाओं से 474 मौतें हुई थीं, जिसे एक बड़ा संकट माना गया था। लेकिन आज आंकड़े बताते हैं कि आपातकाल के इन 10 वर्षों में स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ गई है। इस दौरान प्रांत में 18,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
कल इस बरसी के मौके पर विक्टोरिया, प्रिंस जॉर्ज, क्रैनब्रुक और पॉवेल रिवर जैसे शहरों में 'मॉम्स स्टॉप द हार्म' और 'डॉक्टर्स फॉर सेफर ड्रग पॉलिसी' जैसे संगठनों ने विरोध प्रदर्शन और स्मारक कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन आयोजनों में उन परिवारों का दर्द छलका जिन्होंने अपनों को खोया है। पिछले साल ब्रिटिश कोलंबिया में 1,833 मौतें हुईं। हालांकि यह पिछले साल के मुकाबले 21 प्रतिशत कम है, लेकिन एक दशक पहले की तुलना में यह आज भी करीब चार गुना ज्यादा है। वहां की सरकार अब इलाज और नुकसान कम करने वाली नीतियों को विस्तार देने का दावा कर रही है।
पंजाब की स्थिति: सरकारी आंकड़े बनाम राजनीतिक घमासान
कनाडा के मुकाबले पंजाब में दर्ज आधिकारिक आंकड़े काफी कम नजर आते हैं, लेकिन वे राज्य की रगों में फैलते जहर की पुष्टि जरूर करते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड कुछ इस तरह है:
वर्ष 2021: 78 मौतें
वर्ष 2022: 144 मौतें (देश में सर्वाधिक)
वर्ष 2023: 89 मौतें
भले ही पंजाब में मौतों का आधिकारिक आंकड़ा सालाना 80 से 150 के बीच रहता है, लेकिन यह राज्य का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। विपक्षी दल लगातार सरकार पर आरोप लगाते हैं कि नशे की तस्करी रोकने और पुनर्वास के ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे। विधानसभा सत्रों से लेकर चुनावी रैलियों तक, 'नशा' ही वह मुद्दा है जो सरकार की साख पर सवाल उठाता रहता है। हालांकि, कनाडा की तुलना में पंजाब के आंकड़ों का कम होना अक्सर विशेषज्ञों के बीच बहस का विषय रहता है कि क्या सभी मौतें रिपोर्ट की जा रही हैं या नहीं।
फेंटानिल और स्मगलिंग का अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट
कनाडा में होने वाली मौतों के पीछे 'फेंटानिल' जैसे अत्यंत घातक सिंथेटिक ओपिओइड्स का हाथ है। यह नशा इतना शक्तिशाली है कि इसकी बहुत कम मात्रा भी दिल की धड़कन रोक सकती है। चिंता की एक और बड़ी वजह यह है कि कनाडा में सक्रिय ड्रग तस्करी नेटवर्क में कुछ पंजाबी मूल के लोगों और अंतरराष्ट्रीय समूहों की संलिप्तता भी सामने आई है। ये सिंडिकेट न केवल कनाडा की जमीन पर मौत का सामान पहुंचा रहे हैं, बल्कि इनके तार भारत और अन्य देशों से भी जुड़े होने की आशंका रहती है।
कनाडा और पंजाब के बीच मौतों के आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर होने की दो मुख्य वजहें मानी जा सकती हैं। पहली कनाडा में फेंटानिल जैसे सिंथेटिक ड्रग्स का व्यापक प्रसार है, जो हेरोइन यानी चिट्टा से कई गुना ज्यादा जानलेवा है। दूसरी— कनाडा में मौत के कारणों की वैज्ञानिक जांच और रिपोर्टिंग सिस्टम बहुत पारदर्शी है। पंजाब में अभी भी पारंपरिक नशों और हेरोइन का प्रभाव ज्यादा है, लेकिन सिंथेटिक ड्रग्स की बढ़ती दस्तक भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब को केवल आंकड़ों के भरोसे रहने के बजाय कनाडा जैसे देशों से सबक लेना चाहिए।

