PGI Resident Doctors Wellbeing : तनाव से समाधान तक, रेजिडेंट डॉक्टरों से नियमित संवाद करेगा पीजीआई चंडीगढ़
निदेशक प्रो. विवेक लाल ने 200 डॉक्टरों से की खुली बातचीत, काम के दबाव, थकान और बर्नआउट पर हुई चर्चा
PGI Resident Doctors Wellbeing : रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के दबाव, तनाव और थकान से जुड़े मुद्दों को समय रहते समझने के लिए पीजीआईएमईआर में नियमित संवाद की व्यवस्था की जाएगी। निदेशक प्रो. विवेक लाल ने करीब 200 रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ खुली बातचीत के दौरान विभागाध्यक्षों और फैकल्टी गाइड्स से भी तय अंतराल पर डॉक्टरों से बातचीत करने को कहा।
ओरिएंटेशन एवं वेल-बीइंग कार्यक्रम में रेजिडेंट डॉक्टरों ने निदेशक, फैकल्टी और प्रशासन के सामने अपनी चिंताएं और सुझाव रखे। रेजिडेंसी शुरू करने के दौरान आने वाली चुनौतियों, तनाव, बर्नआउट, काम के दबाव, समय पर मदद लेने और साथियों के सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। लंबे सवाल-जवाब सत्र में डॉक्टरों ने संस्थान में सहायता व्यवस्था को बेहतर बनाने के सुझाव भी दिए।
प्रो. विवेक लाल ने अपने रेजिडेंसी के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि रेजिडेंसी डॉक्टर के करियर का महत्वपूर्ण दौर है। युवा डॉक्टरों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए, जहां वे बिना झिझक अपनी परेशानी बता सकें और जरूरत पड़ने पर मदद ले सकें। उन्होंने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टरों का कल्याण मरीजों की बेहतर देखभाल से भी जुड़ा है।
प्रो. लाल ने संवाद को आगे बढ़ाने में एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एआरडी) की भूमिका की सराहना की। उन्होंने रेजिडेंट डॉक्टरों के कल्याण से जुड़े सुझावों को सामने लाने के लिए एआरडी का आभार जताया और कहा कि प्रशासन उचित कदमों पर लगातार विचार करेगा।
नाइट ड्यूटी के बाद आराम पर जोर
एआरडी अध्यक्ष डॉ. विष्णु जिंजा ने रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए आपसी सहयोग और समय पर संस्थागत मदद की जरूरत बताई। उन्होंने लागू प्रावधानों के अनुसार साप्ताहिक अवकाश और रात की ड्यूटी के बाद 24 घंटे के आराम की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्याप्त आराम मिलने से थकान और बर्नआउट कम करने में मदद मिलती है। इसका संबंध मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से भी है।
तनाव के शुरुआती संकेत पहचानने पर जोर
मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. शुभ मोहन सिंह ने रेजिडेंसी में आने वाले बदलावों और तनाव के विभिन्न कारणों पर चर्चा की। उन्होंने तनाव से निपटने और स्वस्थ तरीके अपनाने के व्यावहारिक उपाय बताए।
डॉ. निधि चौहान ने तनाव के शुरुआती संकेतों को पहचानने और समय पर मदद लेने की जरूरत बताई। उन्होंने खास तौर पर परिवार से दूर रहने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए ऐसी जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया, जिसे लंबे समय तक जारी रखा जा सके।
प्रशिक्षण के साथ स्वस्थ माहौल भी जरूरी
डीन (एकेडमिक्स) प्रो. संजय जैन ने कहा कि संस्थान की जिम्मेदारी केवल अकादमिक और क्लिनिकल प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं है। रेजिडेंट डॉक्टरों के समग्र विकास के लिए स्वस्थ और सहयोगी माहौल उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
आगे क्या ?
नियमित संवाद की व्यवस्था लागू होने पर रेजिडेंट डॉक्टरों को अपनी समस्याएं विभागाध्यक्षों और फैकल्टी गाइड्स के सामने रखने का नियमित अवसर मिलेगा। इससे तनाव, काम के दबाव और अन्य परेशानियों को शुरुआती स्तर पर समझने और उचित मदद देने की कोशिश की जा सकेगी।
पीजीआईएमईआर की इस पहल में फिलहाल तीन बातें प्रमुख हैं-नियमित बातचीत, समय पर मदद और रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए बेहतर कार्य वातावरण।

