साइलेंट किलर की गिरफ्त में देश के युवा, हर पांचवां व्यक्ति हाई बीपी का शिकार, जानिये क्या कहती है PGI की रिपोर्ट
पीजीआई में आज सम्मानित होगा यह शोध पत्र; मेडिसिन श्रेणी में मिला 'सेकंड बेस्ट प्राइज'
Silent Killer : जिसे हम अकसर 'बुढ़ापे की बीमारी' समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, वह हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) अब देश के युवाओं को खामोशी से अपना शिकार बना रहा है। एक ताज़ा विश्लेषण के अनुसार, भारत का हर पांचवां युवा इस 'साइलेंट किलर' की चपेट में है। चौंकाने वाली बात यह है कि बीमार होने के बावजूद अधिकांश युवाओं को इसका अहसास तक नहीं है। पीजीआई चंडीगढ़ और अन्य प्रमुख संस्थानों के इस महत्वपूर्ण शोध को आज पीजीआई के 'इंस्टीट्यूट डे' पर प्रोफेसरों की 'मेडिसिन श्रेणी' में द्वितीय सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार (Second Best Prize) से नवाजा जा रहा है।
पीजीआई के स्थापना दिवस पर सम्मान इस शोध की महत्ता को देखते हुए इसे पीजीआईएमईआर (PGI), चंडीगढ़ के 'इंस्टीट्यूट डे' (स्थापना दिवस) समारोह में प्रोफेसर श्रेणी के तहत 'मेडिसिन कैटेगरी' में द्वितीय सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार (Second Best Prize) के लिए चुना गया है। यह सम्मान आज संस्थान के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन भारत में स्वास्थ्य नीति निर्धारण में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
इलाज के मामले में फिसड्डी साबित हुआ सिस्टम
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट ने स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोल दी है। अध्ययन के अनुसार, 15 से 54 वर्ष की आबादी में उच्च रक्तचाप का प्रसार 18.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। आंकड़ों की मानें तो करीब 70 प्रतिशत लोगों ने कभी न कभी बीपी की जांच तो कराई, लेकिन उनमें से केवल 34 प्रतिशत को ही अपनी बीमारी का पता चला। सबसे गंभीर स्थिति इलाज की है; नियमित दवा लेने के बावजूद केवल 7.8 प्रतिशत मरीजों का ही ब्लड प्रेशर काबू में पाया गया। यह दर्शाता है कि हमारी स्वास्थ्य प्रणाली केवल जांच तक सिमट गई है और सही 'फॉलो-अप' के मामले में हम काफी पीछे हैं।
पुरुषों और ग्रामीण युवाओं पर अधिक खतरा
'लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथईस्ट एशिया' में प्रकाशित यह शोध बताता है कि यह बीमारी महिलाओं की तुलना में पुरुषों पर अधिक बेरहम है। जहां महिलाओं में इसका असर 14.8 प्रतिशत है, वहीं पुरुषों में यह 21.6 प्रतिशत की खतरनाक सीमा को पार कर गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण इलाकों के कम आय वाले और कम शिक्षित युवा इसके प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। विशेष रूप से अविवाहित पुरुषों और शारीरिक श्रम से दूर रहने वाली आबादी में यह समस्या तेजी से पैर पसार रही है। जागरूकता की कमी इस संकट को और गहरा कर रही है।
इन विशेषज्ञों की टीम ने किया खुलासा
इस व्यापक अध्ययन को देश-दुनिया के नामचीन विशेषज्ञों ने तैयार किया है। इस टीम में पीजीआई चंडीगढ़ से डॉ. सोनू गोयल और डॉ. सोनिका राज ने मुख्य भूमिका निभाई है। उनके साथ एम्स भोपाल के डॉ. संजीव कुमार, श्री पद्मावती मेडिकल कॉलेज (तिरुपति) के विशेषज्ञ और मुंबई स्थित IIPS के शोधकर्ता शामिल रहे। विशेषज्ञों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में भारी उछाल आ सकता है।
नशा और बदलती जीवनशैली बड़ी वजह
अध्ययन में स्पष्ट हुआ है कि बदलती जीवनशैली के साथ-साथ धूम्रपान, तंबाकू और शराब की लत इस बीमारी के सबसे बड़े कारण हैं। नशा करने वाले युवा न केवल हाई बीपी के शिकार हो रहे हैं, बल्कि वे इलाज को लेकर भी सबसे अधिक लापरवाह पाए गए हैं। भारत ने वर्ष 2025 तक उच्च रक्तचाप के मामलों में 25 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि केवल जांच शिविर लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं की निर्बाध आपूर्ति और मरीजों को लंबे समय तक इलाज से जोड़ने की ठोस रणनीति बनानी होगी।

