Nepal Election: विदेश नीति के तौर पर भारत 'पड़ोसी प्रथम' की अवधारणा पर जोर देता है। लेकिन पड़ोस के देशों में सियासत की हवाबाजी के साथ ही संबंध बनते और बिगड़ते रहे हैं। बांग्लादेश से कुछ वर्ष पहले तक संबंध सामान्य थे, फिर कठिन दौर आया और अब एक बार फिर बेहतरी की कोशिश। आतंकवाद के कारण पाकिस्तान से संबंध मधुर कम ही रहे। चीन के साथ उठापटक चलती रहती है।
भूटान अभी करीबी बना हुआ है। श्रीलंका के साथ भी संबंधों की ऊंच-नीच चलती रही। म्यांमार में सत्ता के साथ ही हवा का रुख भी बदला। अब नेपाल की बारी है। असल में पिछले कुछ समय से नेपाल की ओर चीन ने भी पींगें बढ़ाई हैं। भारत हमेशा से नेपाल को अपना स्वाभाविक दोस्त बताता रहा है। बीच में कुछ तल्खी के समय भी भारत ने कभी नेपाल के लिए नकारात्मक बात नहीं कही। अब देखना होगा कि सियासी गर्मी के चरम पर पहुंचे इस पड़ोसी देश के साथ आने वाले समय में संबंधों की कैसी स्थिति बनेगी।
पांच मार्च को चुनाव और तीन दिग्गज
नेपाल में पांच मार्च यानी होली के अगले दिन आम चुनाव की तारीख तय की गयी है। वहां इस वक्त प्रधानमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे तीन प्रमुख उम्मीदवारों की लड़ाई है। ये हैं- काठमांडू के पूर्व मेयर बालेंद्र शाह, नेपाली कांग्रेस के युवा नेता गगन थापा और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली। यहां उल्लेखनीय है कि पिछले साल हुए 'जेन जेड' के विरोध प्रदर्शन के कारण केपी शर्मा ओली के प्रधानमंत्री पद से अपदस्थ होना पड़ा था। फिर अंतरिम सरकार बनी। अब उक्त तीनों हस्तियों में से जो भी जीतेगा वह नेपाल का 16वां प्रधानमंत्री बनेगा।
यह है पड़ोसी देश में चुनावी प्रक्रिया
आम मतदान के जरिये संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के सदस्यों को भी चुना जाना है। बाद में अन्य सदस्यों के मनोनयन की भी प्रक्रिया होती है, लेकिन मुख्य भूमिका प्रतिनिधि सदस्यों की ही होती है। नेपाल में 1.89 करोड़ मतदाता प्रतिनिधि सभा के 275 सदस्यों को चुनने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इन 165 प्रत्यक्ष रूप से चुनी गई सीटों के परिणाम बैलेट बॉक्स इकट्ठा होने के 24 घंटे के भीतर जारी कर दिए जाएंगे। 110 आनुपातिक प्रतिनिधित्व सीटों के परिणाम आने में दो से तीन दिन लग सकते हैं। वर्ष 2022 के चुनाव में अंतिम परिणाम आने में दो सप्ताह से अधिक समय लगा था।
भारतीय सीमाओं पर चौकसी
भारत में कई स्थानों पर नेपाल की सीमाएं लगती हैं। चाहे उत्तराखंड के पिथौरागढ़-चंपावत का इलाका हो या फिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर-देवरिया एवं रपईडीहा। नेपाल की सीमाएं भारत से बहुत मायने रखती हैं। इन सीमाओं पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और राज्य पुलिस जैसे सुरक्षा बलों के साथ ही खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। सीमा लगे होने के अलावा भारत के साथ नेपाल की सांस्कृतिक विरासतों की जड़ें भी हैं। यहां से उनके यहां शादी-व्याह भी होते हैं। नेपाल के लाखों लोग भारत में नौकरी करते हैं और अनेक तो भारतीय नागरिक हैं ही। ऐसे में नेपाल के चुनावों और वहां के सियासी बयानों का भारत पर बेहद असर पड़ना स्वाभाविक है।
ये हैं चुनाव के मुख्य मुद्दे
जेन जी के आंदोलन के समय सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार बनकर उभरा था। इसको लेकर तो वहां सियासी बयानबाजी हो ही रही है साथ ही, बेरोजगारी भी बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर भी वहां के युवा अक्सर बातें करते हैं। चुनाव के इसी माहौल के दौरान नेपाल में राजशाही को फिर से स्थापित करने की मांगें भी उठ रही हैं।
इनके बीच है बड़ा मुकाबला
बालेंद्र शाह : इनको 'बालेन' नाम से भी जाना जाता है। अभी प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। वह 2022 में राजधानी काठमांडू के महापौर चुने गए थे। बाद में, उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (एनआईपी) की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के लिए महापौर का पद छोड़ दिया था। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और बाद में गीत-संगीत की दुनिया में उतरे और छा गये।
बालेन ने काठमांडू के मेयर का चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीता, जिसमें उन्होंने पारंपरिक राजनीतिक दलों के प्रति जनता के बढ़ते आक्रोश का फायदा उठाया। अवैध रेहड़ी-पटरी वालों को हटाने, शहर की गंभीर कचरा समस्या से निपटने और सड़कों के चौड़ीकरण को बढ़ावा देने के लिए उनकी प्रशंसा हुई, लेकिन साथ ही कोई ठोस योजना या पूर्व सूचना के बिना मकानों को ध्वस्त करने का आदेश देने के लिए उनकी आलोचना भी हुई।
गगन थापा : नेपाली कांग्रेस के युवा नेता गगन थापा को अपनी पार्टी की प्रतिष्ठा पर गर्व है। नेपाली कांग्रेस में लंबे समय से लोकप्रिय चेहरा रहे 49 वर्षीय थापा को इस साल की शुरुआत तक पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा आगे नहीं बढ़ाया गया था। लेकिन पार्टी में बगावत करने और इसके प्रमुख चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के लिए उनकी राह तैयार हो गई। नेपाली कांग्रेस पिछली गठबंधन सरकार का हिस्सा थी जिसे सितंबर में 'जेन जेड' के विद्रोह के कारण सत्ता से बाहर होना पड़ा था।
केपी शर्मा ओली : प्रधानमंत्री पद के लिए तीसरे प्रमुख दावेदार केपी शर्मा ओली हैं। उनका नाता विवादों से बहुत रहा है। वह प्रमुख कम्युनिस्ट नेता हैं। पिछले साल हुए 'जेन जेड' के विद्रोह के कारण उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

