Bengal Election 2026 : ममता बनर्जी का इस्तीफे से इनकार, तो अब कैसे बनेगी नई सरकार? जानिए क्या कहता है संविधान
टीएमसी चीफ ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप; लॉ एक्सपर्ट प्रो. सुधीर कुमार ने स्पष्ट किया- बहुमत खोने के बाद मुख्यमंत्री की जिद का कोई कानूनी असर नहीं, राज्यपाल के पास हैं असीमित अधिकार।
Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने 15 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया है। मंगलवार (5 मई 2026) को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 207 सीटों के साथ प्रचंड जीत और अपनी करारी हार के बावजूद, निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। भवानीपुर सीट से स्वयं 15,000 से ज्यादा वोटों से चुनाव हारने वालीं ममता बनर्जी ने कोलकाता में एक प्रेस वार्ता कर चुनाव आयोग (EC) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने इस हार को 'साजिश' और 'लोकतंत्र की निर्मम हत्या' करार दिया है। राज्य में टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई है और सरकार के करीब 63 प्रतिशत मंत्री चुनाव हार चुके हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री की इस जिद ने राज्य में एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है कि आखिर बिना इस्तीफे के सत्ता का हस्तांतरण कैसे होगा और नई सरकार का गठन किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
चुनाव आयोग पर फोड़ा ठीकरा, कहा- वही हैं मुख्य 'खलनायक'
चुनाव परिणामों के बाद पहली बार मीडिया से मुखातिब हुईं ममता बनर्जी बेहद आक्रामक नजर आईं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वह अपना इस्तीफा सौंपने राजभवन नहीं जाएंगी। ममता ने पूरे चुनाव तंत्र पर सवाल खड़े करते हुए कहा, "मैं हारी नहीं हूं, चुनाव आयोग इस पूरे चुनाव का मुख्य खलनायक (विलेन) था।" उन्होंने दावा किया कि चुनाव से ठीक पहले भाजपा के इशारे पर राज्य के बड़े पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों (IPS और IAS) के मनमाने तबादले किए गए, ताकि चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह से प्रभावित किया जा सके। इसके अलावा उन्होंने मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर करीब 90 लाख वोट काटे जाने का भी गंभीर आरोप लगाया, जिसे उन्होंने अपनी हार का सबसे बड़ा कारण बताया।
ईवीएम की बैटरी और केंद्रीय बलों पर उठाए गंभीर सवाल
मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा करते हुए दावा किया कि वोटिंग खत्म होने के बाद भी कई ईवीएम (EVM) में 80-90 फीसदी बैटरी चार्ज थी, जो कि बिना छेड़छाड़ के संभव ही नहीं है। उनका यह भी आरोप है कि केंद्रीय बलों (CRPF) का भारी इस्तेमाल कर टीएमसी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को डराया-धमकाया गया। अपनी हार को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि आधिकारिक तौर पर मशीनरी का दुरुपयोग करके उन्हें हराया गया है, लेकिन 'नैतिक रूप से' आज भी जीत तृणमूल कांग्रेस की ही हुई है। उन्होंने कहा, "अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं एक आम नागरिक और आजाद पंछी हूं। मेरी लड़ाई खत्म नहीं हुई है, मैं विपक्ष के 'इंडिया' गठबंधन को और मजबूत करूंगी।" इस दौरान ममता ने चुनाव में कथित गड़बड़ियों और हिंसा की जांच के लिए पार्टी की ओर से 10 सदस्यीय 'फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी' बनाने की भी घोषणा की।
संविधान क्या कहता है: नियम और कानूनी प्रावधान
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम और मुख्यमंत्री के इस्तीफे से इनकार के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि संविधान क्या कहता है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विधि विभाग के सहायक प्रोफेसर सुधीर कुमार ने इस संवैधानिक स्थिति को एकदम स्पष्ट किया है। प्रो. सुधीर कुमार के अनुसार, "लोकतांत्रिक परंपराओं में हार के बाद मुख्यमंत्री का तुरंत इस्तीफा देना एक नैतिक जिम्मेदारी होती है। ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना महज एक राजनीतिक विरोध (Political Protest) हो सकता है, लेकिन कानूनी और संवैधानिक तौर पर इसका कोई भी असर नहीं पड़ेगा।" उन्होंने बताया कि लोकतंत्र में सरकारें बहुमत के आधार पर चलती हैं। जब किसी मुख्यमंत्री की पार्टी सदन में अपना बहुमत खो देती है, तो पुरानी सरकार का वैधानिक अस्तित्व स्वतः ही समाप्त माना जाता है।
आर्टिकल 172 और 164: बिना इस्तीफे कैसे बनेगी नई सरकार?
प्रो. सुधीर कुमार ने बताया कि मौजूदा स्थिति में नियम पूरी तरह स्पष्ट हैं और नई सरकार के गठन में कोई बाधा नहीं आएगी:
अनुच्छेद 172 (विधानसभा का कार्यकाल): भारतीय संविधान के इस अनुच्छेद के तहत पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 6 मई 2026 को खत्म हो रहा है। इसके बाद मौजूदा सरकार का संवैधानिक वजूद बिना किसी औपचारिक इस्तीफे के भी स्वतः खत्म हो जाएगा।
अनुच्छेद 164 और नई सरकार का गठन: मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री राज्यपाल के 'प्रसादपर्यंत' (Pleasure of the Governor) पद पर बने रहते हैं। चुनाव आयोग द्वारा नई विधानसभा के गठन की आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी करते ही पुरानी सरकार पूरी तरह अस्तित्वहीन हो जाएगी। राज्यपाल के पास यह विशेषाधिकार है कि वह निवर्तमान मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर दें। इसके तुरंत बाद राज्यपाल नए बहुमत वाले दल (भाजपा) के विधायक दल के नेता को सरकार बनाने और सदन में बहुमत साबित करने का आधिकारिक न्यौता देंगे।
शपथ ग्रहण की तैयारियां तेज, भाजपा में भारी उत्साह
कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बाद, राज्य में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाले भाजपा खेमे में भारी उत्साह का माहौल है। ममता बनर्जी के इस राजनीतिक रुख से नई सरकार के गठन या शपथ ग्रहण समारोह की प्रक्रिया पर कोई कानूनी या संवैधानिक अड़चन नहीं आएगी। पार्टी ने राज्य में अपने विधायक दल का नेता चुनने की तैयारियां तेज कर दी हैं। ममता बनर्जी को हराने वाले भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदारों में गिने जा रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने सरकार गठन की प्रक्रिया सुचारू करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया है। माना जा रहा है कि 9 मई को रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर नई सरकार का भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है।

