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Explainer :  'केरल' अब हुआ 'केरलम' : एक ऐतिहासिक बदलाव के पीछे की पूरी कहानी, जो आपको जाननी चाहिए

God's Own Country : नारियल की भूमि को मिली अपनी मूल पहचान; औपनिवेशिक 'केरल' से भाषाई गौरव के 'केरलम' तक का सफर

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भारतीय मानचित्र पर 'ईश्वर के अपने देश' (God's Own Country) के नाम से मशहूर राज्य 'केरल' अब एक नई आधिकारिक पहचान के साथ दुनिया के सामने होगा। 24 फरवरी, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' (Keralam) करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला भाषाई गौरव, ऐतिहासिक जड़ों और क्षेत्रीय अस्मिता के संगम का प्रतीक है।

इस विशेष एक्सप्लेनर में पढ़िए कि आखिर 'केरलम्' शब्द में ऐसा क्या है, जिसके लिए पूरी विधानसभा एकजुट हो गई और भारत में राज्यों के नाम बदलने का सफर अब तक कैसा रहा है।

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केरल' और 'केरलम' का भाषाई द्वंद्व : आखिर क्या है फर्क ?

केरल के आम जनमानस में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सिर्फ एक अक्षर 'म' (m) जुड़ जाने से क्या बदल जाएगा?

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  • मलयालम अस्मिता : मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा से 'केरलम' ही कहा जाता रहा है। 'केरल' शब्द मुख्य रूप से अंग्रेजी और औपनिवेशिक शासकों की सुविधा के कारण प्रचलन में आया था।
  • व्युत्पत्ति (Etymology) : मलयालम में 'केरा' का अर्थ है नारियल और 'आलम' का अर्थ है भूमि। अतः 'केरलम' का शाब्दिक अर्थ है 'नारियल के पेड़ों की भूमि'। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का तर्क है कि जब 1 नवंबर, 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन हुआ था, तभी इसे 'केरलम' नाम दिया जाना चाहिए था।
  • आठवीं अनुसूची की मांग : राज्य सरकार चाहती है कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में राज्य की पहचान 'केरलम' के रूप में ही स्थापित हो।

ऐतिहासिक साक्ष्य : 2200 साल पुरानी जड़ों की तलाश

केरल का नाम बदलना केवल भावनाओं का मुद्दा नहीं है, इसके पीछे ठोस ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाण हैं :

  • अशोक के शिलालेख : ऐतिहासिक रूप से केरल का सबसे पुराना लिखित संदर्भ सम्राट अशोक के 257 ईसा पूर्व के 'शिलालेख II' (Rock Edict II) में मिलता है। इसमें इस क्षेत्र के शासक को 'केरलपुत्र' (Keralaputra) कहा गया है। यह तथ्य सिद्ध करता है कि 'केरलम' नाम की जड़ें दो हजार साल से भी अधिक पुरानी हैं।
  • चेरा साम्राज्य : मध्यकालीन इतिहास में चेरा राजवंश के शासनकाल के दौरान भी इस क्षेत्र को 'चेरा-आलम' या 'केरलम' के रूप में संदर्भित किया गया था।

विधानसभा से कैबिनेट तक का सफर (Timeline of Events)

यह बदलाव रातों-रात नहीं हुआ है, इसके पीछे एक लंबी विधायी प्रक्रिया रही है :

  • अगस्त 2023 : केरल विधानसभा ने पहली बार प्रस्ताव भेजा था, लेकिन केंद्र ने तकनीकी सुधारों के लिए इसे वापस भेज दिया।
  • 24 जून, 2024 : विधानसभा ने सर्वसम्मति से संशोधित प्रस्ताव पारित किया, जिसे गृह मंत्रालय (MHA) की समीक्षा के बाद आगे बढ़ाया गया।
  • 24 फरवरी, 2026 : मोदी सरकार ने ऐतिहासिक 'सेवा तीर्थ' परिसर में हुई कैबिनेट बैठक में इसे अंतिम मंजूरी दी।

संवैधानिक प्रक्रिया: अनुच्छेद 3 की जटिलताएं

भारत में किसी राज्य का नाम बदलना एक विस्तृत प्रक्रिया है, जिसका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 3 में मिलता है:

  • राष्ट्रपति की भूमिका : यह विधेयक अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा केरल विधानसभा को उनके अंतिम विचार हेतु भेजा जाएगा।
  • संसद में पारित होना : विधानसभा के विचारों के उपरांत, इसे संसद के दोनों सदनों में साधारण बहुमत से पारित किया जाएगा।
  • संविधान संशोधन : इसके बाद संविधान की 'पहली अनुसूची' में आधिकारिक संशोधन कर 'केरल' का नाम बदलकर 'केरलम' कर दिया जाएगा।

प्रशासनिक और वित्तीय प्रभाव : क्या-क्या बदलेगा ?

नाम परिवर्तन की इस प्रक्रिया के साथ व्यापक प्रशासनिक कार्य और वित्तीय बोझ भी जुड़ा होता है :

  • लागत का अनुमान : विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य के सभी रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, साइनबोर्डों और डिजिटल रिकॉर्ड्स को अपडेट करने में 300 से 500 करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है।
  • पासपोर्ट और दस्तावेज : विदेश मंत्रालय को भारतीय पासपोर्ट के डेटाबेस में बदलाव करना होगा। अब नए जारी होने वाले पासपोर्ट पर 'Place of Issue/Address' कॉलम में 'Keralam' दर्ज होगा।

राज्यों के नाम बदलने का इतिहास : पहचान की पुनर्स्थापना

केरल से पहले भी भारत में कई राज्यों ने अपनी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों को वापस पाने के लिए नाम बदले हैं:

  • उत्तर प्रदेश : आजादी के तुरंत बाद 1950 में 'संयुक्त प्रांत' (United Provinces) का नाम बदलकर यह किया गया, जो पहचान बदलने की दिशा में पहला बड़ा कदम था।
  • केरल : भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के दौरान 1956 में 'त्रावणकोर-कोचीन' का नाम बदलकर 'केरल' रखा गया था।
  • तमिलनाडु : वर्ष 1969 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरई के नेतृत्व में 'मद्रास राज्य' का नाम बदलकर यह किया गया, ताकि तमिल अस्मिता को प्रमुखता मिले।
  • कर्नाटक : वर्ष 1973 में कन्नड़ भाषियों की पहचान और एकता के आधार पर 'मैसूर राज्य' को यह नया नाम दिया गया।
  • उत्तराखंड : जन-आंदोलन और स्थानीय भावनाओं का सम्मान करते हुए 2007 में 'उत्तरांचल' का नाम बदलकर 'उत्तराखंड' किया गया।
  • ओडिशा : भाषाई शुद्धता और सही व्याकरण को प्राथमिकता देते हुए 2011 में 'उड़ीसा' का नाम बदलकर 'ओडिशा' आधिकारिक किया गया।
  • केरलम : अब 2026 में केरल इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने मूल भाषाई उच्चारण पर संवैधानिक मुहर लगवा रहा है।

सरकार और विपक्ष साथ-साथ

नाम परिवर्तन की मंजूरी मिलने के बाद मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे राज्य के इतिहास का एक गौरवशाली क्षण बताया।

  • मुख्यमंत्री का रुख : केरल के पिनराई विजयन ने कहा कि मलयालम में हमारा राज्य हमेशा से केरलम' रहा है। 1956 में भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के समय ही यह नाम आधिकारिक हो जाना चाहिए था। हमने उस ऐतिहासिक चूक को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।"
  • विपक्ष का समर्थन: कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन (UDF) ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने कहा कि यह राज्य की भाषाई जड़ों को सम्मान देने का सही तरीका है।
  • बंगाल की मांग: इस सफलता ने पश्चिम बंगाल की 'बांग्ला' (Bangla) नाम की मांग को फिर से हवा दे दी है, ताकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अनुसार वर्णमाला क्रम (Alphabetical Order) में राज्य का नंबर ऊपर आ सके।

'केरलम' का उदय केवल एक नाम का परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत की विविधता और संघीय ढांचे की मजबूती का प्रमाण है। यह बदलाव केरल के 3.5 करोड़ लोगों की उन भावनाओं का प्रतिबिंब है, जो अपनी मिट्टी की सुगंध को संवैधानिक दस्तावेजों में देखना चाहते थे।

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