Kasauli Overtourism : सैलानी बढ़े, होटल बढ़े, फिर क्यों घट रही कसौली के कारोबार की कमाई?
1,911.39 हेक्टेयर में फैले कसौली प्लानिंग एरिया में करीब 250 होटल और लगभग इतनी ही होमस्टे व बेड एंड ब्रेकफास्ट इकाइयां; सीमित पर्यटन सीजन, कम ऑक्यूपेंसी, पार्किंग और यातायात की समस्या ने बढ़ाई चुनौती
Kasauli Overtourism : कसौली कभी शांत पहाड़ी वातावरण, चीड़ के जंगलों और सुहाने मौसम के कारण पर्यटकों की पसंद रहा है। अब यही कसौली तेजी से बढ़ते पर्यटन कारोबार के दबाव से जूझ रहा है। होटल, होमस्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट इकाइयों की संख्या लगातार बढ़ी है, लेकिन पर्यटकों के ठहरने की अवधि सीमित रहने से कारोबार को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। दूसरी ओर, पार्किंग, यातायात और नागरिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में कसौली के सामने सवाल पर्यटन बढ़ाने का नहीं, बल्कि उसे व्यवस्थित और टिकाऊ बनाने का है।
कसौली प्लानिंग एरिया 1,911.39 हेक्टेयर में फैला है और इसमें 35 गांव शामिल हैं। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार इस क्षेत्र में करीब 250 होटल संचालित हो रहे हैं। लगभग इतनी ही संख्या में बेड एंड ब्रेकफास्ट और होमस्टे इकाइयां भी चल रही हैं। इनका विस्तार कसौली शहर तक सीमित नहीं है। किम्मूघाट-गढ़खल, सनावर-कसौली, धर्मपुर-कसौली, गढ़खल-छब्बल-जगजीतनगर और धर्मपुर-कंडा मार्गों के अलावा कसौली गांव, डोची, नंदोह और गारा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन इकाइयां बढ़ी हैं।
इससे पर्यटकों के लिए ठहरने के विकल्प बढ़े हैं, लेकिन पर्यटन कारोबारियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी तेज हुई है। एक ही क्षेत्र में अधिक होटल और आवास इकाइयां होने से हर संपत्ति को पर्याप्त ग्राहक मिलना चुनौती बन गया है।
कमरे का औसत राजस्व करीब 20 फीसदी घटा
कुछ वर्ष पहले तक कसौली में एक कमरे से मिलने वाला औसत राजस्व 7,000 से 8,000 रुपये प्रति रात बताया जाता था। अब इसमें करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है। अधिकांश होटल साल भर में औसतन करीब 35 फीसदी ऑक्यूपेंसी पर चल रहे हैं। बड़े होटल अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं और उनकी ऑक्यूपेंसी करीब 60 फीसदी तक पहुंचती है।
होटल कारोबार के लिए यह स्थिति इसलिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि मुख्य पर्यटन सीजन केवल करीब 120 दिन का है, जबकि कर्मचारियों का वेतन, बिजली-पानी, रखरखाव और ऋण की किस्त जैसे खर्च पूरे साल चलते हैं।
एक-दो दिन रुककर लौट जाते हैं पर्यटक
कसौली में पर्यटकों के लंबे समय तक नहीं रुकने की समस्या भी कारोबार को प्रभावित कर रही है। स्थानीय पर्यटन कारोबारियों के अनुसार यहां प्राकृतिक सौंदर्य और मौसम प्रमुख आकर्षण हैं, लेकिन पर्यटकों को लंबे समय तक रोकने के लिए साल भर पर्याप्त गतिविधियां और आयोजन नहीं हैं। नतीजतन, कई पर्यटक एक या दो दिन रुकने के बाद लौट जाते हैं। इसका असर होटल के साथ रेस्तरां, टैक्सी, दुकानों और दूसरे पर्यटन आधारित कारोबार पर भी पड़ता है।
नए होटल भी बिक्री के लिए
पर्यटन बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का असर संपत्तियों पर भी दिखाई देने लगा है। कुछ होटल और निर्माणाधीन परियोजनाएं बिक्री के लिए रखी गई हैं। इनमें कंडा-धर्मपुर और किम्मूघाट-चक्की मोड़ मार्ग पर निर्माणाधीन 80 कमरों का एक होटल भी शामिल बताया गया है। स्थानीय होटल कारोबारी का कहना है कि क्षेत्र में “हर जगह होटल” दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में बैंक ऋण और दूसरे खर्चों के बीच कम ऑक्यूपेंसी के साथ कारोबार को लाभ में चलाना मुश्किल हो रहा है।
नए पर्यटन प्रोजेक्ट पर रोक की मांग
कसौली रेजिडेंट्स एंड हॉटेलियर्स एसोसिएशन का कहना है कि क्षेत्र में पर्यटन विकास को अब व्यवस्थित करने की जरूरत है। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रॉकी चिमनी के अनुसार कसौली में ठंडा मौसम और मनोरम दृश्य हैं, लेकिन पर्यटकों को लंबे समय तक रोकने के लिए पर्याप्त आकर्षण नहीं हैं।
एसोसिएशन ने सरकार से शिमला की तर्ज पर वार्षिक पर्यटन उत्सव आयोजित करने की मांग की है। इसके अलावा अन्य नियमित गतिविधियां शुरू करने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि पर्यटन सीजन लंबा हो और पर्यटक अधिक समय तक रुकें।
एसोसिएशन की सलाहकार विन्नी चड्ढा ने पर्यटन इकाइयों की तेजी से बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। उनका दावा है कि होटलों की संख्या में हर महीने करीब 20 फीसदी तक वृद्धि हो रही है। उनके अनुसार इससे मौजूदा पर्यटन इकाइयों की आय प्रभावित हो रही है और नागरिक सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है।
पहले क्षमता का आकलन, फिर नए निर्माण
एसोसिएशन ने कुछ समय के लिए नए पर्यटन प्रोजेक्ट की मंजूरी पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही क्षेत्र की वहन क्षमता का अध्ययन कराने की मांग की गई है। ऐसे अध्ययन से यह पता लगाया जा सकता है कि सड़क, पार्किंग, जलापूर्ति, कचरा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं को देखते हुए कसौली कितने पर्यटकों और कितनी पर्यटन इकाइयों का दबाव संभाल सकता है।
पार्किंग की कमी ने बढ़ाई परेशानी
होटल और होमस्टे बढ़ने के साथ पर्यटकों के वाहनों की संख्या भी बढ़ी है। लेकिन कई पर्यटन इकाइयों में पर्याप्त पार्किंग उपलब्ध नहीं है। इससे सड़क किनारे वाहन खड़े होने और यातायात बाधित होने की समस्या बढ़ती है। गढ़खल जंक्शन इस चुनौती का प्रमुख उदाहरण है, जहां पांच सड़कें आकर मिलती हैं। पर्यटन सीजन में वाहनों का दबाव बढ़ने पर यहां यातायात प्रबंधन मुश्किल हो जाता है।
होटल एसोसिएशन ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के भवन नियमों में बदलाव, पर्यटन इकाइयों में पर्याप्त पार्किंग अनिवार्य करने और यातायात व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
होमस्टे और बीएंडबी ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा
स्थापित होटल संचालकों के सामने नए होटल के अलावा होमस्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट इकाइयों की बढ़ती संख्या भी चुनौती है। बड़े होटल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए स्पा, स्विमिंग पूल, गेमिंग जोन और अन्य सुविधाओं पर निवेश करते हैं। दूसरी ओर, छोटे होमस्टे कम खर्च में संचालित हो सकते हैं। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है।
ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म ने भी इस प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया है। अलग-अलग दरों पर उपलब्ध आवास विकल्पों के कारण पर्यटकों के पास अधिक विकल्प हैं। स्थापित होटल संचालकों का कहना है कि इससे उनके ग्राहक आधार पर असर पड़ा है।
करीब 100 अपंजीकृत इकाइयों की पहचान
पर्यटन विभाग ने बिना पंजीकरण संचालित पर्यटन इकाइयों की पहचान के लिए अभियान चलाया है। विभाग के अनुसार सोलन और सिरमौर जिलों में करीब 100 अपंजीकृत इकाइयों का पता लगाया गया है। हालांकि, ऐसी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गति विभाग में कर्मचारियों की कमी से प्रभावित हो रही है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी पदमा छोडन के अनुसार विभाग के पास निगरानी और कार्रवाई के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं।
कसौली के लिए आगे की राह क्या?
कसौली की चुनौती केवल पर्यटकों की संख्या से जुड़ी नहीं है। असली सवाल यह है कि पर्यटन का विस्तार क्षेत्र की पर्यावरणीय और ढांचागत क्षमता के अनुरूप हो रहा है या नहीं। नए होटल और होमस्टे रोजगार तथा स्थानीय आय के अवसर बढ़ा सकते हैं, लेकिन यदि उनके साथ सड़क, पार्किंग, कचरा प्रबंधन और दूसरी नागरिक सुविधाओं का विस्तार नहीं होता तो दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।
इसलिए नए पर्यटन प्रोजेक्ट की मंजूरी से पहले क्षेत्र की वहन क्षमता का आकलन, पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और पर्यटकों के लंबे ठहराव के लिए नई गतिविधियों पर ध्यान देना जरूरी होगा। कसौली के सामने पर्यटन रोकने का सवाल नहीं है। चुनौती यह है कि पर्यटन कारोबार बढ़े, स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिले और साथ ही पहाड़ी शहर की प्राकृतिक पहचान तथा नागरिक सुविधाओं पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

