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Iran-Israel War : वैज्ञानिकों की हत्याओं से सर्वोच्च नेता की मौत तक... जानिये दशकों पुराने गुप्त युद्ध की कहानी

15 साल का 'शेडो वॉर' अब खुला सैन्य संघर्ष : कभी सड़कों पर मैग्नेटिक बम चिपकाकर शुरू हुआ था यह गुप्त सिलसिला, अब खामेनेई की मौत की पुष्टि के साथ ही सीधे और भीषण सैन्य संघर्ष में बदला

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Iran-Israel War : पिछले 15 वर्षों से मध्य-पूर्व (Middle East) के अंधेरों में एक ऐसा युद्ध लड़ा जा रहा था, जिसकी न तो कोई आधिकारिक घोषणा हुई थी और न ही कोई मोर्चा सजा था। इसे 'शेडो वॉर' या छद्म युद्ध कहा गया। लेकिन, पिछले सप्ताहांत जब आसमान मिसाइलों की रोशनी से दहल उठा और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि हुई, तो इस गुप्त युद्ध का पर्दा पूरी तरह गिर गया। आइए समझते हैं कि यह संघर्ष कैसे शुरू हुआ और कैसे एक-एक करके ईरान के परमाणु स्तंभों को ढहाया गया।

परमाणु वैज्ञानिकों का 'शिकार'

मैग्नेटिक बम और रिमोट हमले इस गुप्त युद्ध की सबसे पहली और बड़ी गूंज जनवरी 2010 में सुनाई दी थी। रणनीति साफ थी कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के 'दिमाग' को खत्म करना।

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  • पहला हमला : तेहरान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और परमाणु सलाहकार मसूद अली-मोहम्मदी की उनके वाहन में रिमोट कंट्रोल बम से हत्या कर दी गई।

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  • हमले का पैटर्न : इसके बाद एक खौफनाक सिलसिला शुरू हुआ। बाइक सवार हमलावर ट्रैफिक में फंसी वैज्ञानिकों की कारों पर 'मैग्नेटिक बम' (चुंबकीय बम) चिपका देते और उनके दूर हटने से पहले ही धमाका हो जाता।

  • प्रमुख मौतें : 2010 में माजिद शहरियारी, 2011 में दारीउश रेज़ाईनेजाद और 2012 में मुस्तफा अहमदी रोशन इसी तरह के हमलों का शिकार हुए।

इजरायल ने कभी इन हत्याओं की आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन तत्कालीन रक्षा मंत्री एहुद बराक ने 2012 में कहा था, "मैं इन वैज्ञानिकों के लिए आंसू नहीं बहा रहा हूं।"

'स्टक्सनेट' और डिजिटल घुसपैठ

जब मशीनों ने खुद को तबाह किया यह जंग केवल इंसानों तक सीमित नहीं थी। 2010 में दुनिया ने पहली बार 'डिजिटल हथियार' की विनाशकारी ताकत देखी।

  • स्टक्सनेट (Stuxnet): यह एक जटिल कंप्यूटर वायरस था, जिसे अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से विकसित माना जाता है। इसने ईरान के नतान्ज परमाणु केंद्र के सेंट्रीफ्यूज (यूरेनियम शुद्ध करने वाली मशीनें) को संक्रमित किया और उनकी गति को अनियंत्रित कर उन्हें भीतर से नष्ट कर दिया।

  • नतीजा : इस साइबर हमले ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तकनीकी रूप से कई साल पीछे धकेल दिया।

 'द ग्रेट थेफ्ट'

तेहरान के दिल से परमाणु फाइलों की चोरी साल 2018 में इस गुप्त युद्ध का सबसे साहसी अध्याय लिखा गया। इजरायली खुफिया एजेंसी 'मोसाद' के एजेंटों ने तेहरान के एक सुरक्षित गोदाम में सेंध लगाई।

  • ऑपरेशन : एजेंटों ने रातों-रात ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी 50,000 फाइलें और 163 सीडी चुरा लीं और उन्हें सीमा पार ले गए।

  • खुलासा : प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने टीवी पर इन दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दावा किया कि ईरान दुनिया की नजरों से छिपकर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा था।

फखरीजादेह और सुलेमानी

नेतृत्व पर सीधा प्रहार जैसे-जैसे तनाव बढ़ा, हमले और अधिक सटीक और घातक होते गए ।

  • कासिम सुलेमानी (जनवरी 2020): बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले ने ईरान के सबसे शक्तिशाली सैन्य जनरल और कुद्स फोर्स के प्रमुख को मार गिराया।

  • मोहशिन फखरीजादेह (नवंबर 2020): ईरान के 'परमाणु बम के जनक' कहे जाने वाले फखरीजादेह की हत्या एक एआई-आधारित सैटेलाइट-नियंत्रित मशीन गन से की गई। यह हमला इतना सटीक था कि उनके साथ चल रहे अंगरक्षक भी कुछ नहीं कर पाए।

 अब क्या बदला ? छद्म युद्ध से सीधी जंग तक

छद्म युद्ध से सीधी जंग तक सालों तक इजरायल ने सीरिया में ईरानी ठिकानों पर हवाई हमले किए और ईरान ने अपने 'प्रॉक्सिस' (हिजबुल्लाह, हमास) के जरिए जवाब दिया। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

  • बड़ा मोड़: अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने इस संघर्ष को उस बिंदु पर पहुंचा दिया है, जहां से कूटनीतिक वापसी मुमकिन नहीं दिखती। जो युद्ध अब तक प्रयोगशालाओं और खुफिया गलियारों में लड़ा जा रहा था, वह अब खुले मैदान में आ गया है।

आज जो मिसाइलें हमें दिखाई दे रही हैं, वे किसी नए विवाद की शुरुआत नहीं हैं। यह उस 15 साल पुराने अभियान का 'क्लाइमेक्स' है, जिसने लंबे समय से ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को भीतर से चुनौती दी थी।

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