Air Defence Guns : दुश्मन के ड्रोन का काल बनेंगी सेना की नई 'बंदूकें': क्यों मिसाइलों के युग में भी तोपों पर बढ़ा भरोसा ?
मिसाइलों के दौर में नई चुनौती : 'ऑपरेशन सिंदूर' के कड़वे अनुभवों से सेना ने लिया बड़ा सबक, अब छोटे और घातक ड्रोन्स को पलक झपकते ही मिट्टी में मिला देंगी ये आधुनिक एयर डिफेंस गन
Air Defence Guns : आधुनिक युद्ध का मैदान अब पूरी तरह बदल चुका है। अब खतरा सिर्फ बड़े फाइटर जेट्स या मिसाइलों से नहीं, बल्कि खिलौने जैसे दिखने वाले उन छोटे ड्रोन्स से भी है, जो चुपके से सीमा पार कर तबाही मचा सकते हैं। इसी उभरते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने अब अपनी 'एयर डिफेंस गन' के बेड़े को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है। सेना ने इसी महीने एक सूचना अनुरोध (RFI) जारी कर नई पीढ़ी की एयर डिफेंस गन खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
क्यों पड़ी नई तोपों की जरूरत?![]()
सेना के अनुसार, अब दुश्मन फाइटर जेट्स के बजाय बिजली से चलने वाले छोटे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन ड्रोन्स का रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) बहुत कम होता है, जिससे ये रडार की नजर से बच निकलते हैं।
भारतीय सेना वर्तमान में 23 एमएम और 40 एमएम की पुरानी गन प्रणालियों का उपयोग कर रही है। हालांकि इन्हें अपग्रेड किया गया है, लेकिन भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए अब ऐसी तकनीक की जरूरत है जो स्वाम ड्रोन (ड्रोन का झुंड) और क्रूज मिसाइलों को भी पलक झपकते ही नष्ट कर सके।
सब हेड: 'ऑपरेशन सिंदूर' से मिला बड़ा सबक
मई 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारतीय सेना की रणनीतियों को एक नई दिशा दी। दरअसल, पहलगाम में आतंकी हमले के जवाब में की गई इस सैन्य कार्रवाई के दौरान दुश्मन ने न केवल निगरानी के लिए बल्कि हमलों के लिए भी ड्रोन्स का जमकर इस्तेमाल किया था। 5 दिनों तक चले उस संघर्ष ने यह साफ कर दिया कि भविष्य की जंग में वही जीतेगा, जिसका 'हवाई रक्षा कवच' अभेद्य होगा। इसी अनुभव के आधार पर सेना अब अपनी हवाई सुरक्षा को और अधिक आधुनिक बना रही है।
कैसी होगी ये नई पीढ़ी की गन ?
सेना को ऐसी गन सिस्टम चाहिए जो अगले 30 सालों तक देश की सुरक्षा कर सके। इसकी कुछ खास खूबियां इस प्रकार होंगी:
सटीक निशाना: यह दिन और रात, दोनों समय दुश्मन के ड्रोन, हेलीकॉप्टर और मिसाइलों को ट्रैक कर सके।
तेज रफ्तार: यह 500 मीटर प्रति सेकंड से भी तेज उड़ने वाले लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम हो।
हर मौसम में फिट: यह गन सियाचिन की -30 डिग्री सर्दी से लेकर जैसलमेर की 55 डिग्री गर्मी तक में काम कर सके।
स्मार्ट गोला-बारूद: इसमें प्रोग्रामेबल और प्रॉक्सिमिटी राउंड्स फायर करने की क्षमता होगी, जो लक्ष्य के पास जाते ही खुद फट जाते हैं।
सब हेड: मिसाइल से सस्ती और प्रभावी है 'गन'
अक्सर मन में सवाल आता है कि मिसाइल के दौर में बंदूक की क्या जरूरत? दरअसल, छोटे और सस्ते ड्रोन को मार गिराने के लिए करोड़ों की मिसाइल दागना काफी महंगा पड़ता है। इसके विपरीत, एंटी-एयरक्राफ्ट गन से फायर करना न केवल सस्ता है, बल्कि इसकी 'रेट ऑफ फायर' (गोलियां दागने की गति) इतनी अधिक होती है कि यह एक साथ आने वाले कई ड्रोन्स को आसानी से ढेर कर सकती है।
फिलहाल सेना अपने पुराने बेड़े को रडार गाइडेड सिस्टम से जोड़ रही है, लेकिन नई पीढ़ी की इन तोपों के आने के बाद भारत का आसमान घुसपैठियों के लिए पूरी तरह 'नो-गो जोन' बन जाएगा।

