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Indian Army : ड्रोन हमलों का 'किलर' तैयार: ऑपरेशन सिंधूर की सफलता के बाद सेना क्यों ला रही है अभेद्य 'कैडेट' कवच?

ऑपरेशन सिंदूर में 100% सटीक वार करने वाली स्वदेशी तकनीक अब बख्तरबंद कवच के साथ सीमा पर तैनात होगी। रक्षा मंत्रालय ने 83 'कैडेट' प्रणालियों की खरीद के साथ युद्ध के मैदान में रीयल-टाइम एयर डिफेंस का नया अध्याय लिख दिया है।

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ट्रक पर तैनात 'आकाशतीर' एयर डिफेंस सिस्टम। (फोटो साभार: रक्षा मंत्रालय)
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Indian Army : आधुनिक युद्ध अब केवल जमीन पर लड़ी जाने वाली लड़ाई नहीं रह गई है। यूक्रेन-रूस युद्ध से लेकर मिडिल-ईस्ट के संघर्षों तक, 'ड्रोन' और 'लोइटरिंग म्यूनिशन' सबसे घातक हथियार बनकर उभरे हैं। ऐसे में भारतीय सेना ने अपनी हवाई सुरक्षा दीवार को और अधिक अभेद्य बनाने के लिए एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। सेना अब अपने सबसे भरोसेमंद 'आकाशतीर' (Akashteer) एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम को ट्रकों से हटाकर टैंकों के ट्रैक वाले प्लेटफार्म पर शिफ्ट कर रही है। इसे नाम दिया गया है कैडेट (CADET यानी Carrier Air Defence Tracked)।

ऑपरेशन सिंधूर की वह सफलता, जिसने बदली सोच

करीब एक साल पहले भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंंदूर' के दौरान आकाशतीर प्रणाली का वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में परीक्षण किया था। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा विकसित यह सिस्टम एक ऐसा स्वचालित नेटवर्क है जो रडार और सेंसरों को एक साथ जोड़ता है।

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रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस ऑपरेशन के दौरान आकाशतीर ने दुश्मन के ड्रोनों और मिसाइलों को ट्रैक करने में 100 प्रतिशत सफलता हासिल की। यह सफलता जितनी बड़ी थी, उतनी ही बड़ी एक चुनौती भी सामने आई। वर्तमान में यह सिस्टम 'कैनिस्टराइज्ड ट्रकों' पर लगा है। सड़क पर तो ट्रक तेज चलते हैं, लेकिन जब सेना के टैंक और मैकेनाइज्ड फॉर्मेशन रेगिस्तान के टीलों या कीचड़ भरे मैदानों में 'क्रॉस-कंट्री' मूव करते हैं, तो ये ट्रक उनके साथ रफ्तार नहीं मिला पाते। इसी कमी को दूर करने के लिए 'प्रोजेक्ट कैडेट' का जन्म हुआ।

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कैडेट (CADET): ट्रक से टैंक तक का सफर

रक्षा मंत्रालय ने पिछले सप्ताह ही 83 स्वदेशी कैडेट प्रणालियों की खरीद के लिए 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' (RFP) जारी किया है। यह कदम 'मेक इन इंडिया' के तहत सेना की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

क्यों खास है यह नया प्लेटफार्म ?

  1. सर्वत्र गतिशीलता (Any Terrain Mobility): कैडेट को एक हाई-पावर ट्रैक वाले चेसिस पर तैयार किया गया है। यह मैदानी इलाकों से लेकर 16,000 फीट की ऊंचाई वाले लद्दाख जैसे बर्फीले क्षेत्रों में भी टैंकों के कंधे से कंधा मिलाकर चल सकेगा।

  2. बख्तरबंद सुरक्षा: ट्रकों के विपरीत, कैडेट एक बख्तरबंद वाहन (Armoured Vehicle) होगा। युद्ध के दौरान दुश्मन की गोलाबारी और छर्रों से इसके भीतर बैठे सैनिक और संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित रहेंगे।

  3. भीषण तापमान में कार्यक्षमता: यह सिस्टम माइनस 30 डिग्री सेल्सियस की जमा देने वाली ठंड से लेकर प्लस 50 डिग्री सेल्सियस की झुलसाने वाली गर्मी में भी रीयल-टाइम डेटा देने में सक्षम है।

सेंसर-टू-शूटर लूप: सेकंडों में होगा दुश्मन का काम तमाम

युद्ध में जीत उस पक्ष की होती है जिसकी 'सेंसर-टू-शूटर' प्रतिक्रिया सबसे तेज हो। कैडेट के जरिए आकाशतीर सिस्टम सेना की मिसाइल यूनिट्स और गन यूनिट्स को रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध कराएगा।

इसका कार्य तंत्र समझिए:

  • सेंसर (Sensor): आकाशतीर के रडार दुश्मन के ड्रोन या मिसाइल को देखते हैं।

  • प्रोसेसिंग: डेटा तुरंत कैडेट प्लेटफार्म पर लगे कंप्यूटरों में प्रोसेस होता है।

  • शूटर (Shooter): यह सूचना बिना किसी देरी के पास ही मौजूद एयर डिफेंस गन या मिसाइल लॉन्चर को भेज दी जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में इंसानी देरी की गुंजाइश खत्म हो जाती है, जिससे प्रतिक्रिया का समय (Reaction Time) घटकर कुछ सेकंड्स रह जाता है।

ड्रोन स्वार्म और आधुनिक खतरों का इलाज

कैडेट प्लेटफार्म केवल 'आकाशतीर' तक सीमित नहीं है। सेना इसे एक 'मल्टी-परपज' वार मशीन बना रही है। इस पर निम्नलिखित अत्याधुनिक सिस्टम भी लगाए जाएंगे:

  • इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन: जो छोटे से छोटे ड्रोन को भी पहचान लेगा।

  • ड्रोन किल सिस्टम: जो इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या लेजर तकनीक से ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर देगा।

  • काउंटर-स्वार्म ड्रोन सिस्टम: जब दुश्मन एक साथ दर्जनों ड्रोनों (Swarm) से हमला करेगा, तो कैडेट पर लगा यह सिस्टम उन्हें सामूहिक रूप से बेअसर कर देगा।

तीनों सेनाओं का एक 'कॉमन ऑपरेटिंग पिक्चर'

भारतीय सेना का यह सिस्टम अकेला काम नहीं करेगा। यह वायुसेना के IACCS (Integrated Air Command and Control System) और नौसेना के 'त्रिगुण' एयर डिफेंस नेटवर्क के साथ पूरी तरह एकीकृत होगा। इसके अलावा, इसे नई पीढ़ी के इंटीग्रेटेड बैटलफील्ड मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से जोड़ा जाएगा। इससे सेना के कमांडर को अपने टैबलेट या स्क्रीन पर ठीक वैसी ही तस्वीर दिखेगी जैसी वायुसेना के पायलट को दिख रही होगी। इसमें 'फ्रेंड ओर फो' (IFF) तकनीक भी होगी, ताकि युद्ध के शोर में गलती से अपने ही विमान पर हमला न हो जाए।

 'आत्मनिर्भर भारत' का सुरक्षा कवच

भारतीय सेना की 'आर्मी एयर डिफेंस' (AAD) कोर के लिए कैडेट का आना एक क्रांतिकारी बदलाव है। यह न केवल हमारी सामरिक लचीलापन (Operational Flexibility) बढ़ाएगा, बल्कि अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों को मानसिक शांति भी देगा कि उनके ऊपर एक अभेद्य हवाई छतरी मौजूद है।

ट्रक से टैंक (Tracked Chassis) की ओर यह ट्रांजिशन बताता है कि भारतीय सेना अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि प्रो-एक्टिव और भविष्य के 'नेटवर्क-सेंट्रिक' युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। 83 कैडेट सिस्टम का बेड़े में शामिल होना सीमा पार बैठे दुश्मनों के लिए एक साफ संदेश है कि अब भारतीय आसमान में घुसपैठ नामुमकिन होगी।

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