India-Pakistan Border Firepower : सीमा पर फिर तेज हुई 'तोपों की जंग', चीन के SH-15 हॉवित्जर से पाकिस्तान ने बढ़ाई ताकत; भारत कैसे दे रहा जवाब?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली पाकिस्तान की रणनीति, मोबाइल आर्टिलरी पर बढ़ा जोर; भारत ATAGS, K-9 वज्र और नई 155 मिमी तोपों से मजबूत कर रहा मोर्चा
India-Pakistan Border Firepower : ऑपरेशन सिंदूर के करीब एक साल बाद भारत-पाकिस्तान सीमा पर तोपखाने की प्रतिस्पर्धा एक बार फिर चर्चा में है। पाकिस्तान ने चीन निर्मित 155 मिमी SH-15 ट्रक-माउंटेड हॉवित्जर भारत से सटी सीमा के पास तैनात करने शुरू किए हैं। वहीं, भारत भी ATAGS, K-9 वज्र, धनुष और अन्य आधुनिक 155 मिमी तोप प्रणालियों के जरिए अपनी मारक क्षमता लगातार मजबूत कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि सीमित सैन्य संघर्ष की स्थिति बनती है तो लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने वाली और तेजी से स्थान बदलने वाली आर्टिलरी निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान ने अपने नए तोप सिस्टम गुजरांवाला, सियालकोट, जलालपुर और जटवाल जैसे सीमावर्ती इलाकों में तैनात किए हैं। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये ट्रक पर लगी होती हैं और फायरिंग के तुरंत बाद अपनी जगह बदल सकती हैं। इससे जवाबी कार्रवाई में इन्हें निशाना बनाना अपेक्षाकृत कठिन हो जाता है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों बदली पाकिस्तान की रणनीति ?
7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की थी। इस अभियान में भारतीय सेना ने कई लक्ष्यों पर आर्टिलरी फायर का इस्तेमाल किया। रिपोर्टों के अनुसार नौ आतंकी ठिकानों में से सात को सेना की तोपों ने निशाना बनाया। अमेरिकी M777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर से दागे गए एक्सकैलिबर प्रिसिजन एम्युनिशन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने महसूस किया कि पारंपरिक, स्थिर तोपों के बजाय अधिक मोबाइल और आधुनिक आर्टिलरी की जरूरत है। इसी वजह से उसने चीन के SH-15 हॉवित्जर की तैनाती और संख्या दोनों बढ़ाने पर जोर दिया।
क्या है SH-15 हॉवित्जर ?
SH-15 चीन की नोरिन्को (NORINCO) द्वारा विकसित 155 मिमी/52 कैलिबर ट्रक-माउंटेड हॉवित्जर है। पाकिस्तान ने चीन से करीब 300 SH-15 खरीदने का समझौता किया था, जिसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रावधान भी शामिल है। शुरुआती खेप 2022 में सेना में शामिल हुई और अब बड़ी संख्या में ये सिस्टम पाकिस्तान के आर्टिलरी बेड़े का हिस्सा बन चुके हैं।
SH-15 : एक नजर में
- 155 मिमी/52 कैलिबर हॉवित्जर
- 6×6 हाई मोबिलिटी ट्रक प्लेटफॉर्म
- लॉन्ग रेंज फायरिंग क्षमता
- शूट एंड स्कूट क्षमता
- डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम
- तेजी से तैनाती और स्थान परिवर्तन
'शूट एंड स्कूट' रणनीति क्यों अहम हो गई है ?
आज के युद्ध में ड्रोन, सैटेलाइट और रडार कुछ ही मिनटों में तोपों की लोकेशन का पता लगा सकते हैं। ऐसे में ट्रक-माउंटेड हॉवित्जर फायरिंग के तुरंत बाद दूसरी जगह चले जाते हैं। सैन्य भाषा में इसे 'शूट एंड स्कूट' कहा जाता है।
इस रणनीति से तोपों के बचने की संभावना बढ़ जाती है और वे कम समय में अलग-अलग स्थानों से बार-बार फायरिंग कर सकती हैं। हालांकि, आधुनिक निगरानी ड्रोन के दौर में यह रणनीति भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जाती।
भारत कैसे दे रहा है जवाब ?
पाकिस्तान की नई तैनाती के समानांतर भारत केवल संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि पूरे आर्टिलरी नेटवर्क के आधुनिकीकरण पर काम कर रहा है। भारतीय सेना का लक्ष्य लॉन्ग रेंज क्षमता, प्रिसिजन फायर, बेहतर गतिशीलता और स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देना है।
ATAGS
- 307 तोपों की खरीद प्रक्रिया जारी
- अनुमानित लागत करीब 7,000 करोड़ रुपये
- 15 आर्टिलरी रेजिमेंटों को मिलेगा नया सिस्टम
- निर्माण में भारत फोर्ज और टाटा की भागीदारी
K-9 वज्र-टी
- सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड हॉवित्जर
- दिसंबर 2024 में अतिरिक्त खरीद के लिए 7,629 करोड़ रुपये का अनुबंध
- लॉन्ग रेंज, तेज फायरिंग और उच्च प्रिसिजन
धनुष
- स्वदेशी 155 मिमी हॉवित्जर
- भारतीय सेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का अहम हिस्सा
नई लाइट आर्टिलरी गन
भारतीय सेना ने लगभग 400 हल्की 155 मिमी तोपों की खरीद की प्रक्रिया भी शुरू की है।
भारत और पाकिस्तान की रणनीति में क्या अंतर है ?
जहां पाकिस्तान मोबाइल ट्रक-माउंटेड हॉवित्जर के जरिए अग्रिम मोर्चे की मारक क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है, वहीं भारत व्यापक स्तर पर पूरे आर्टिलरी ढांचे का आधुनिकीकरण कर रहा है। इसमें स्वदेशी तोपों का विकास, सेल्फ-प्रोपेल्ड सिस्टम, बेहतर फायर कंट्रोल, प्रिसिजन एम्युनिशन और नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता शामिल है। यानी भारत की रणनीति केवल किसी एक पाकिस्तानी सिस्टम का जवाब देना नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पूरे तोपखाना तंत्र को मजबूत करना है।
क्यों बढ़ रही है आर्टिलरी की अहमियत ?
आधुनिक युद्ध में केवल टैंक और लड़ाकू विमान ही निर्णायक नहीं होते। आर्टिलरी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि—
- लॉन्ग रेंज से सटीक हमला संभव
- कम समय में अधिक फायरपावर
- ड्रोन के साथ बेहतर समन्वय
- दुश्मन के ठिकानों पर तेजी से प्रहार
- सीमित युद्ध में निर्णायक भूमिका
भारतीय सेना की फील्ड आर्टिलरी रेशनलाइजेशन प्लान (एफएआरपी) के तहत आने वाले वर्षों में लगभग 3,000 से 3,600 आधुनिक 155 मिमी आर्टिलरी सिस्टम शामिल करने की योजना है। इसमें टोइड, ट्रक-माउंटेड, व्हील्ड, सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड और अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर शामिल होंगे।
दूसरी ओर पाकिस्तान भी चीन के सहयोग से अपने तोपखाने का आधुनिकीकरण तेजी से कर रहा है। ऐसे में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आर्टिलरी की भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होने की संभावना है।

