India missile upgrade : अग्नि से आकाश तक भारत की नई तैयारी, जानिए कौन-सी मिसाइल और बम बना रहे हैं ज्यादा ताकतवर
अग्नि प्राइम की 2,000 किमी मारक क्षमता से लेकर ‘गौरव’ के 100 किमी तक सटीक वार तक, कई हथियार प्रणालियां हो रहीं अपग्रेड
India missile upgrade : भारत अपनी मिसाइल और हथियार प्रणालियों को अधिक दूरी तक मार करने और ज्यादा प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। रक्षा मंत्रालय की वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, अग्नि मिसाइल के नए संस्करण, आकाश-एनजी वायु रक्षा प्रणाली और लंबी दूरी के ग्लाइड बम समेत कई हथियार प्रणालियां विकास और परीक्षण के अलग-अलग चरणों में हैं। आखिर इन हथियारों में क्या बदलाव किए जा रहे हैं और इनसे भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता कितनी बढ़ेगी?
आकाश मिसाइल प्रणाली को आकाश-न्यू जेनरेशन (आकाश-एनजी) के रूप में उन्नत किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इसे एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने और 360 डिग्री कवरेज की क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है।
आकाश-एनजी का परीक्षण पिछले साल सफलतापूर्वक किया गया था। अब भारतीय वायुसेना इसके अपने परीक्षण कर रही है। यह प्रणाली लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी), एंटी-रेडिएशन मिसाइलों और सबसोनिक क्रूज मिसाइलों जैसे हवाई खतरों से निपटने के लिए तैयार की जा रही है।
अग्नि प्राइम : 2,000 किमी तक मार
अग्नि मिसाइल परिवार परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और इसके कई संस्करण पहले ही सशस्त्र बलों में शामिल किए जा चुके हैं। इनमें अग्नि-वी एक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) है, जिसकी मारक क्षमता 5,500 किलोमीटर है।
इसके आगे भारत अग्नि प्राइम को विकसित कर रहा है। डीआरडीओ और रणनीतिक बल कमान (एसएफसी) मिलकर करीब 2,000 किलोमीटर मारक क्षमता वाली इस मिसाइल पर काम कर रहे हैं। इसे रेल आधारित मोबाइल लॉन्चर से प्रक्षेपित करने की क्षमता दी जा रही है।
पिछले साल विशेष रूप से डिजाइन किए गए लॉन्चर से इसका पहला रेल आधारित प्रक्षेपण किया गया था। यह प्रणाली मौजूदा रेल नेटवर्क पर आवाजाही कर सकती है। इससे कम समय में मिसाइल को तैनात और प्रक्षेपित करने की क्षमता बढ़ेगी। इसमें स्वतंत्र संचार प्रणाली और सुरक्षा तंत्र भी हैं।
‘गौरव’ : 100 किमी दूर से सटीक वार
भारत 1,000 किलोग्राम श्रेणी के लॉन्ग-रेंज ग्लाइड बम (एलआरजीबी) ‘गौरव’ का भी विकास कर रहा है। सुखोई-30एमकेआई लड़ाकू विमान से इसके परीक्षण पूरे हो चुके हैं। परीक्षणों में ‘गौरव’ ने करीब 100 किलोमीटर की दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता प्रदर्शित की है। इसे इस तरह विकसित किया जा रहा है कि लड़ाकू विमान दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली की पहुंच से बाहर रहते हुए महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमला कर सके।
किन लक्ष्यों को निशाना बनाएगा ?
‘गौरव’ को बंकर और हवाई पट्टियों जैसे उच्च-मूल्य वाले लक्ष्यों पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे दो संस्करणों में विकसित किया जा रहा है, जिनमें अलग-अलग लक्ष्यों के लिए अलग प्रकार के वारहेड होंगे। इसके प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए सरकारी कंपनी म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड के साथ लाइसेंस समझौता किया गया है।
समुद्री और जमीन आधारित खतरों के लिए भी नई मिसाइलें
मंत्रालय की रिपोर्ट में कई अन्य स्वदेशी हथियार प्रणालियों का भी उल्लेख है। नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-SR) में स्वदेशी गाइडेंस प्रणाली है और यह उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है।
रुद्रम-III को एंटी-रेडिएशन और जमीन पर हमला करने, दोनों क्षमताओं के साथ विकसित किया जा रहा है। वहीं, वीएलएसआरएसएएम कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इसे कम ऊंचाई पर उड़ने वाली दुश्मन की मिसाइलों समेत अन्य हवाई खतरों को निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
यूसीएवी के लिए कावेरी इंजन
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, स्वदेशी कावेरी इंजन को भारत के मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहनों (यूसीएवी) के पावर प्लांट के रूप में निर्धारित किया गया है। इसके निर्माण का काम भारतीय उद्योग साझेदारों के माध्यम से चल रहा है।
इस तरह भारत की मौजूदा मिसाइल और हथियार प्रणालियों को अधिक दूरी, बेहतर सटीकता, व्यापक कवरेज और अलग-अलग प्रकार के लक्ष्यों से निपटने की क्षमता देने पर जोर है।

