भारत ने जिस लश्कर आतंकी मूसा को ढेर किया, पाकिस्तान ने उसे जिंदा बताया; क्या है विवाद?
भारतीय सेना ने मुठभेड़ के बाद शव बरामद कर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में की पहचान, गृह मंत्रालय ने भी की मौत की पुष्टि; पाकिस्तान ने पूर्व एसएसजी जवान को सामने लाकर उठाए सवाल
Moosa Identity Row :
जम्मू-कश्मीर के बडगाम में भारतीय सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए अभियान में लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को मार गिराया था। भारतीय सेना ने मुठभेड़ के बाद उसका शव बरामद किया और उसकी पहचान मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में की। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी उसकी मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि वह लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर था। इसके अगले दिन पाकिस्तान ने एक व्यक्ति को मोहम्मद आसिफ बताते हुए मीडिया के सामने पेश कर दिया और दावा किया कि वह जिंदा है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने भारत की कार्रवाई पर सवाल खड़े करने की कोशिश की। लेकिन भारत के पास मूसा को मार गिराने के पक्के सबूत हैं।
Op BUGAM, Kulgam
Based on specific intelligence input, a joint search operation was launched by #IndianArmy, @JmuKmrPolice and @crpf_srinagar in the Gen Area Bugam, Kulgam.
During the search, five suspected individuals have been apprehended and war like stores, including four… pic.twitter.com/cIZhLTrNsj
— Chinar Corps🍁 - Indian Army (@ChinarcorpsIA) August 26, 2026
बडगाम में क्या हुआ ?
29 सितंबर की रात यूसमर्ग के कोराग इलाके में भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने विशेष खुफिया सूचना के आधार पर संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया। सुरक्षा बलों को संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं। आतंकियों को चुनौती दिए जाने पर उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें एक आतंकी मारा गया।
अगली सुबह पालमैदान इलाके में तलाशी के दौरान एक शव बरामद हुआ। सेना के अनुसार शव के साथ युद्ध संबंधी सामान भी मिला। सेना ने मारे गए आतंकी की पहचान पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में की।
मूसा कौन था ?
Update: OP KORAG
Further to the ongoing operation, during the search early morning in General Area Palmaidan, body of Pak based Lashkar-e-Taiba ( LeT) terrorist, identified as Mohammad Asif alias Hashim Moosa recovered along with war like stores.
Operation under progress.…
— Chinar Corps🍁 - Indian Army (@ChinarcorpsIA) September 30, 2026
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार मूसा लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ और वांछित कमांडर था। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थीं। उसके बारे में तकनीकी और मानवीय खुफिया सूचनाएं जुटाई गई थीं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर उसके खिलाफ विशेष अभियान तैयार किया गया।
मूसा 2022 से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर के चार वरिष्ठ कमांडरों वाले समूह का आखिरी सदस्य था। इस समूह के अन्य तीन सदस्य जुनैद भट, सुलेमान और यासिर अलग-अलग अभियानों में मारे जा चुके थे। मूसा के मारे जाने के साथ इस चार सदस्यीय समूह का सफाया हो गया। गृह मंत्रालय ने इस समूह को जम्मू-कश्मीर में कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ा है।
पाकिस्तान ने अचानक किसे सामने ला दिया ?
भारत की ओर से मूसा के मारे जाने की पुष्टि के बाद पाकिस्तान ने अगले दिन एक व्यक्ति को मीडिया के सामने पेश किया। पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता ने उसकी पहचान मोहम्मद आसिफ के रूप में की। बताया गया कि वह पाकिस्तान की विशेष सेवा समूह यानी एसएसजी का पूर्व हवलदार है और वर्ष 2023 में सेना से सेवानिवृत्त हुआ था।
उस व्यक्ति ने भी कैमरे के सामने खुद को मोहम्मद आसिफ बताया और कहा कि वह जीवित है। पाकिस्तान ने इसी को आधार बनाकर भारत के दावे को गलत बताने की कोशिश की। पाकिस्तान ऐसा करके अपने लोगों के बीच साख बचाने की कोशिश में लगा है।
क्या पाकिस्तान भारत की कार्रवाई पर पर्दा डालना चाहता है ?
घटनाक्रम पर नजर डालें तो भारत की ओर से मूसा के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि के तुरंत बाद पाकिस्तान का एक व्यक्ति को मोहम्मद आसिफ बताकर सामने लाना महत्वपूर्ण है। भारतीय सेना पहले ही मुठभेड़ के बाद शव बरामद करने और उसकी पहचान की जानकारी दे चुकी थी। गृह मंत्रालय ने भी अलग से मूसा की मौत की पुष्टि की थी।
ऐसे में पाकिस्तान का यह कदम भारत की कार्रवाई का असर कम करने और अपनी स्थिति बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। खासकर इसलिए क्योंकि भारत की कार्रवाई से लश्कर के उस चार सदस्यीय समूह के खत्म होने की बात सामने आई, जिसे सुरक्षा एजेंसियां कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ती रही हैं। पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता ने भारत पर आरोप तो लगाए, लेकिन अपने दावे को साबित करने के लिए कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
क्या पाकिस्तान ने फर्जी व्यक्ति पेश किया ?
पाकिस्तान की ओर से पेश किए गए व्यक्ति की तस्वीरों की सोशल मीडिया और कुछ भारतीय मीडिया रिपोर्टों में मूसा की पुरानी तस्वीरों से तुलना की गई है। इनमें चेहरे की बनावट समेत कई अंतर बताए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मारा गया आतंकवादी ही मूसा है। लेकिन पाकिस्तान इसे नकार रहा है और फजीहत से बचने के लिए हथकंडे अपना रहा है।
भारत के पक्ष में क्या ठोस तथ्य हैं ?
- भारत के पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बडगाम में कार्रवाई केवल एक बयान तक सीमित नहीं थी।
- पहला, सुरक्षा बलों ने विशेष खुफिया सूचना के आधार पर अभियान शुरू किया।
- दूसरा, मुठभेड़ के बाद तलाशी अभियान में एक आतंकी का शव बरामद किया गया।
- तीसरा, भारतीय सेना ने शव की पहचान मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में की।
- चौथा, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अलग से मूसा के मारे जाने की पुष्टि की।
- पांचवां, गृह मंत्रालय ने बताया कि मूसा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में था और उसके खिलाफ तकनीकी तथा मानवीय खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई की गई।
पाकिस्तान के लिए यह मामला महत्वपूर्ण क्यों है ?
मूसा की पहचान को लेकर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को उसके पूर्व एसएसजी संबंध के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। भारत से जुड़े आधिकारिक और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार मूसा प्रशिक्षित कमांडो था और जम्मू-कश्मीर में लश्कर के लिए काम कर रहा था।
ऐसे में यदि भारत की ओर से दी गई पहचान सही साबित होती है तो यह पाकिस्तान की उस भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है जिसमें उसके पूर्व सैन्य प्रशिक्षित कर्मियों के आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप सामने आते हैं। इसी कारण पाकिस्तान के लिए इस पहचान को चुनौती देना महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है।
क्या पाकिस्तान का दावा भारत की कार्रवाई को झुठला देता है ?
नहीं। भारत ने जो सबूत पेश किया है उसे मूसा के मारे जाने की पुष्टि होती है। पाकिस्तान की ओर से एक व्यक्ति को जिंदा पेश करना भारत की ओर से जारी सेना और गृह मंत्रालय के आधिकारिक रिकॉर्ड को अपने आप समाप्त नहीं करता। भारत ने कार्रवाई, शव बरामदगी और पहचान के संबंध में अलग-अलग आधिकारिक सूचनाएं जारी की हैं।

