Punjab Politics and Artists: पंजाब में कलाकार सिर्फ स्टार नहीं, राजनीति और समाज की आवाज भी
Punjab Politics and Artists: पंजाब का कलाकारों से प्रेम और टकराव का रिश्ता: शोहरत से गोलियों तक और अब नेतृत्व की अपील
Punjab Politics and Artists: पंजाब में कलाकारों का प्रभाव हमेशा राजनीति और समाज से जुड़ा रहा है। कुछ लोग व संगठन दिलजीत दोसांझ से राजनीति में आने की अपील कर रहे हैं। आइए पंजाब की राजनीति में कलाकारों का क्या महत्व है।
जब सेवानिवृत्त नौकरशाहों, शिक्षाविदों और सेना अधिकारियों के एक समूह ने इस सप्ताह दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) से पंजाब का नेतृत्व संभालने की अपील करते हुए एक फुल-पेज विज्ञापन प्रकाशित कराया, तो यह केवल एक असामान्य राजनीतिक घटना नहीं थी। यह पंजाब और उसके सांस्कृतिक प्रतीकों के बीच लंबे समय से चले आ रहे प्रेम और टकराव के रिश्ते का नया अध्याय था।
पंजाब ने अपने गायकों, कवियों और कलाकारों को सिर आंखों पर बिठाया है। राजनीतिक संकट के समय उन पर भरोसा किया है, लेकिन दूसरी ओर उन्हीं पर मुकदमे दर्ज किए, उन्हें परेशान किया और कई बार खुलेआम गोलियों का शिकार बनते भी देखा।
दिलजीत दोसांझ, जिन्होंने एक्स पर पोस्ट कर इस अपील को विनम्रता से ठुकरा दिया, अब पंजाब की राजनीतिक कल्पना के केंद्र में खड़े कलाकारों की लंबी परंपरा का हिस्सा बन गए हैं।
दिलजीत ही क्यों?
अगर चार पंजाब माने जाएं एक वास्तविक पंजाब, दूसरा दिल्ली की सत्ता की नजर में पंजाब, तीसरा कनाडा में बसा पंजाब और चौथा रैडक्लिफ लाइन के पार का पंजाबतो दिलजीत ऐसे कलाकार हैं जिनकी मौजूदगी इन सभी में महसूस की जाती है।
आज पंजाब में कोई भी राजनेता इतनी व्यापक स्वीकार्यता नहीं रखता। दिलजीत ऐसे पंजाबी कलाकार हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से मुलाकात की और जिनके कार्यक्रम में कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) भी पहुंचे।
उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान सिंघु बॉर्डर पर किसानों का समर्थन किया, भले ही इसकी पेशेवर कीमत चुकानी पड़ी। खालिस्तान समर्थक संगठनों की आलोचना के बावजूद उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह जो कुछ करते हैं, पंजाब के लिए करते हैं। उन्होंने अभिनेत्री कंगना रणौत (Kangana Ranaut) के पंजाब और सिख समुदाय पर दिए गए बयानों का भी खुलकर विरोध किया।
कलाकारों के पीछे चलने की पंजाब की परंपरा
पंजाब में कलाकारों को नेता मानने की परंपरा नई नहीं है। यहां मंच और राजनीति के बीच की दूरी हमेशा धुंधली रही है। नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने क्रिकेट और टीवी स्टार की छवि के सहारे राजनीति में जगह बनाई। भवगंत मान (Bhagwant Mann) कॉमेडियन से मुख्यमंत्री बने। दीप सिद्धू (Deep Sidhu) किसान आंदोलन के दौरान लाल किले तक पहुंचे, जबकि हंसराज हंस (Hans Raj Hans), सनी देओल (Sunny Deol) और अनमोल गगन मान (Anmol Gagan Maan) जैसे कई कलाकार राजनीति में आए।
जनता की आवाज बने गायक
पंजाब में गायकों से सिर्फ मनोरंजन की उम्मीद नहीं की जाती। वे लोगों की भावनाओं और संघर्षों की आवाज माने जाते हैं। क्रांतिकारी कवि पॉश ने राज्य और उग्रवाद दोनों का विरोध किया। अमर सिंह चमकीला (Amar Singh Chamkila) ने गांवों की उन भावनाओं को आवाज दी जिन्हें लोग खुलकर नहीं कह पाते थे।
सिद्धू मूसेवाला (Sidhu Moosewala) ने किसानों और पंजाब के मुद्दों पर गाने गाए, जिन्हें लोगों ने अपनी आवाज माना। समाजशास्त्री परमजीत जज कहते हैं, “कई बार गायक वही कहते हैं जो आम पंजाबी खुलकर नहीं कह पाता। यही उन्हें असाधारण प्रभाव देता है।”
हिंसा और मुकदमों का इतिहास
पंजाब में कलाकारों की लोकप्रियता कई बार उनके लिए खतरा भी बन गई। 1988 में अमर सिंह चमकीला और उनकी पत्नी अमरजोत की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसी वर्ष कवि पाश भी हिंसा का शिकार हुए। 2022 में दीप सिद्धू की सड़क हादसे में मौत हो गई, जबकि उसी साल मई में सिद्धू मूसेवाला की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
हिंसा के अलावा कानूनी कार्रवाई भी कलाकारों के खिलाफ इस्तेमाल होती रही। मूसेवाला पर कई एफआईआर दर्ज हुईं। दिलजीत दोसांझ को 2021 में गीतों के बोल को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग का नोटिस मिला था। कई पंजाबी गायकों पर आर्म्स एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए।
डॉ. परमजीत जज के मुताबिक, “समाज सिर्फ राजनेताओं से नहीं पहचाना जाता। कलाकार, बुद्धिजीवी और शिक्षाविद भी उसकी पहचान होते हैं। जब किसी समाज को सिर्फ नेता परिभाषित करने लगें, तो वह गिरावट का संकेत होता है।”

