Dainik Tribune Initiative : डड्डूमाजरा ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्रोजेक्ट को केंद्र की मंजूरी
Dainik Tribune Initiative : डड्डू माजरा का कचरा पहाड़ वर्षों से शहर की बेबसी की पहचान बना हुआ था। समाधान की घोषणाएं होती रहीं, लेकिन जमीन पर ठोस बदलाव नजर नहीं आया। ऐसे समय में दैनिक ट्रिब्यून ने अपनी विस्तृत...
Dainik Tribune Initiative : डड्डू माजरा का कचरा पहाड़ वर्षों से शहर की बेबसी की पहचान बना हुआ था। समाधान की घोषणाएं होती रहीं, लेकिन जमीन पर ठोस बदलाव नजर नहीं आया। ऐसे समय में दैनिक ट्रिब्यून ने अपनी विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट ‘पीसीएमसी बनाम डड्डू माजरा’ प्रकाशित कर न केवल इस संकट की परतें खोलीं, बल्कि समाधान की ठोस राह भी दिखाई।
मोशी मॉडल का उदाहरण देकर यह स्पष्ट किया गया कि इच्छाशक्ति, तकनीक और स्पष्ट नीति के साथ कचरा संकट को ऊर्जा में बदला जा सकता है। रिपोर्ट के बाद मामला संसद तक पहुंचा। सांसद मनीष तिवारी ने मुद्दा उठाया और अब केंद्र सरकार ने डड्डू माजरा ‘वेस्ट टू एनर्जी’ परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह संकेत है कि जब तथ्य आधारित पत्रकारिता दिशा दिखाती है, तो नीति को कदम आगे बढ़ाने पड़ते हैं।
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रिपोर्ट में महाराष्ट्र के मोशी स्थित वेस्ट टू एनर्जी मॉडल का उदाहरण देते हुए पूछा गया था कि जब वहां कचरे से 14 मेगावाट बिजली बन सकती है और लीगेसी वेस्ट को वैज्ञानिक तरीके से लगभग खत्म किया जा सकता है, तो चंडीगढ़ क्यों पीछे है।
अब उस रिपोर्ट का स्पष्ट असर सामने आया है। चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने डड्डू माजरा का मुद्दा संसद में प्रमुखता से उठाया। केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया। इसके बाद केंद्र ने चंडीगढ़ में ‘वेस्ट टू एनर्जी’ परियोजना को मंजूरी दे दी है और परियोजना में अपनी हिस्सेदारी भी स्वीकृत कर दी है। दैनिक ट्रिब्यून की ग्राउंड रिपोर्ट ने बहस को स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
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Dainik Tribune Initiative-ग्राउंड रिपोर्ट में क्या था खास
ट्रिब्यून की पत्रकार कविता राज ने पीआईबी के आउचरीच प्रोग्राम के तहत पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम का दौरा कर एक स्पेशल ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की और बताया कि कैसे मोशी में अत्याधुनिक तकनीक के जरिये कचरे को संसाधन में बदला गया है।
मोशी वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की प्रमुख उपलब्धियां
- प्रतिदिन लगभग 1000 टन कचरे की प्रोसेसिंग
- 14 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता
- 16.66 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन
- 3,41,111 मीट्रिक टन आरडीएफ का उपयोग
- लगभग 76.57 करोड़ रुपये की बचत
- बायोमाइनिंग से लीगेसी वेस्ट लगभग समाप्त
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि कचरा केवल डंप करने की वस्तु नहीं, बल्कि ऊर्जा और अर्थव्यवस्था का स्रोत भी हो सकता है।
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डड्डू माजरा की स्थिति
चंडीगढ़ का डड्डू माजरा दशकों से मुख्य डंपिंग साइट रहा है। रिहायशी इलाकों के बेहद पास स्थित इस क्षेत्र में
- बार बार आग लगने की घटनाएं
- जहरीला धुआं
- सांस संबंधी बीमारियों की शिकायतें
- मिट्टी और भूजल प्रदूषण का खतरा लगातार चिंता का विषय रहे हैं। दैनिक ट्रिब्यून की रिपोर्ट ने यह सवाल उठाया था कि क्या इस संकट को आधुनिक तकनीक से अवसर में बदला जा सकता है।
Dainik Tribune Initiative-संसद में गूंजा सवाल![]()
रिपोर्ट के बाद सांसद मनीष तिवारी ने संसद में डड्डू माजरा डंपिंग ग्राउंड का मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र से पूछा कि क्या चंडीगढ़ के लिए ‘वेस्ट टू एनर्जी’ जैसे स्थायी समाधान पर विचार किया जा रहा है।
केंद्र सरकार के जवाब में परियोजना को मंजूरी दिए जाने की जानकारी दी गई। हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया कि साइट की सफाई और लीगेसी वेस्ट के निस्तारण की जिम्मेदारी चंडीगढ़ नगर निगम और प्रशासन की होगी।
ग्राउंड रिपोर्ट का असर और आगे की चुनौती
केंद्र की मंजूरी पहला महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी।
शहर की नजर अब इन सवालों पर है :
- क्या बायोमाइनिंग की प्रक्रिया तेज होगी
- क्या कचरे का सेग्रीगेशन सख्ती से लागू होगा
- क्या परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी होगी
- क्या पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित होगा।
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