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ICMR-SHINE 2026 : किताबों से निकलकर लैब तक पहुंचेंगे 30 हजार स्कूली छात्र, जानेंगे स्वास्थ्य शोध की दुनिया

83 केंद्रों पर दो दिन चलेगा ICMR-SHINE कार्यक्रम; वैज्ञानिकों से संवाद के साथ प्रयोगशाला भ्रमण और लाइव प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी

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ICMR-SHINE 2026 : विज्ञान की किताबों में पढ़े प्रयोग अब स्कूली विद्यार्थियों को प्रयोगशालाओं में करीब से देखने का मौका मिलेगा। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने मंगलवार को ICMR-SHINE 2026 का दूसरा संस्करण शुरू किया। देशभर के 83 स्थानों पर आयोजित हो रहे इस दो दिवसीय कार्यक्रम से करीब 30 हजार विद्यार्थियों को स्वास्थ्य अनुसंधान से जोड़ने का लक्ष्य है।

11 और 12 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम में कक्षा 9 से 12 तक के सरकारी और निजी स्कूलों के विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। ICMR संस्थानों के अलावा मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट्स और संबद्ध फील्ड यूनिट्स को भी कार्यक्रम से जोड़ा गया है।

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प्रयोगशालाओं में देखेंगे शोध की प्रक्रिया

ICMR-SHINE का पूरा नाम Science and Health Innovation for NextGen Explorers है। इसका मकसद विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ाना और उन्हें स्वास्थ्य अनुसंधान को करियर के विकल्प के तौर पर समझने का अवसर देना है।

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कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए निर्देशित प्रयोगशाला भ्रमण, शोध प्रदर्शनियां, पोस्टर वॉक, वीडियो प्रस्तुतियां और लाइव प्रदर्शन रखे गए हैं। वे ICMR के वैज्ञानिकों से सीधे बातचीत कर उनके शोध कार्य, विशेषज्ञता और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े काम के बारे में जानकारी हासिल कर रहे हैं।

कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के केलांग से केरल और दीव से नागालैंड तक विभिन्न स्थानों के विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। ICMR का कहना है कि इससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलेगी कि वैज्ञानिक अनुसंधान केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि समुदायों की वास्तविक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में इसकी अहम भूमिका है।

डॉ. राजीव बहल ने छात्रों से कहा- सवाल पूछते रहें

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कार्यक्रम में विद्यार्थियों से बातचीत की। उन्होंने छात्रों को जिज्ञासु बने रहने, सवाल पूछने और विज्ञान को करियर के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि हर खोज एक सवाल से शुरू होती है और हर नवाचार नई संभावना तलाशने के साहस से जन्म लेता है। बहल ने विज्ञान, स्वास्थ्य और अनुसंधान से जुड़े विद्यार्थियों के सवालों के जवाब भी दिए। इस दौरान उन्होंने ICMR के शोध कार्यों और नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

छात्र खुद तैयार करेंगे शोध सवाल

ICMR ने विद्यार्थियों के लिए देशव्यापी स्कूल प्रतियोगिता की भी घोषणा की है। इसमें छात्रों को वास्तविक जनस्वास्थ्य चुनौतियों पर अपने शोध सवाल तैयार करने और संभावित समाधान सुझाने होंगे।

इस पहल के जरिये विद्यार्थियों को केवल वैज्ञानिकों का काम देखने के बजाय स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुद सवाल उठाने और उनके समाधान के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

‘डॉ. क्यूरियो’ बनेगा विज्ञान का साथी

कार्यक्रम के लिए ICMR ने ‘डॉ. क्यूरियो’ को आधिकारिक शुभंकर बनाया है। इसे SHINE की प्रचार सामग्री, पोस्टर, सोशल मीडिया और इंटरैक्टिव वीडियो में शामिल किया गया है।

ICMR ने कार्यक्रम की आधिकारिक वेबसाइट भी शुरू की है। इस पर स्वास्थ्य अनुसंधान में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए संसाधन, अपडेट और अवसरों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होगी।

विकसित भारत-2047 के लक्ष्य से जोड़ा कार्यक्रम

ICMR ने SHINE को विकसित भारत-2047 के विजन से जोड़ा है। परिषद के अनुसार, देश के स्वास्थ्य और विकास से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करना जरूरी है।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना है कि अनुसंधान के जरिये समाज की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान कैसे खोजा जाता है। ICMR को उम्मीद है कि यह पहल नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को विज्ञान और स्वास्थ्य अनुसंधान की ओर आकर्षित करेगी। -एजेंसी इनपुट के साथ

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