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दिल और स्ट्रोक से बचाव में फिजियोथेरेपी कैसे करती है मदद ? जानें एक्सरसाइज से जुड़ी जरूरी बातें

पीजीआई चंडीगढ़ के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अजीत कुमार ने बताया, नियमित शारीरिक गतिविधि से हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मिल सकती है मदद

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डॉ. अजीत कुमार
डॉ. अजीत कुमार

World Physiotherapy Day 2026 :  फिजियोथेरेपी को आमतौर पर चोट, दर्द या बीमारी के बाद शरीर की गतिविधियों को सामान्य करने से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इसकी भूमिका इससे कहीं व्यापक है। डॉ. अजीत कुमार (PT), सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट और PhD स्कॉलर, PRM (फिजियोथेरेपी) और ऑर्थोपेडिक्स विभाग, PGIMER, चंडीगढ़ के अनुसार, फिजियोथेरेपी हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन और पुनर्वास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 का विषय भी इसी पर केंद्रित है। इस वर्ष का अभियान गैर-संचारी रोगों पर विशेष ध्यान दे रहा है।

कार्डियोवैस्कुलर बीमारी क्या है ?

कार्डियोवैस्कुलर बीमारी यानी सीवीडी ऐसी बीमारियों का समूह है, जो हृदय या रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती हैं। हर साल दुनिया भर में होने वाली मौतों में 20.5 मिलियन यानी 2.05 करोड़ मौतें (30 प्रतिशत) कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के कारण होती हैं। इनमें से 85 प्रतिशत मामले हार्ट अटैक और स्ट्रोक से जुड़े होते हैं।

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यही वजह है कि हृदय को स्वस्थ रखने और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में नियमित शारीरिक गतिविधि और सही एक्सरसाइज महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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कार्डियोवैस्कुलर बीमारी में फिजियोथेरेपी की क्या भूमिका है ?

फिजियोथेरेपी केवल बीमारी होने के बाद पुनर्वास तक सीमित नहीं है। यह अधिक जोखिम वाले लोगों की पहचान करने, सुरक्षित एक्सरसाइज कराने और नियमित शारीरिक गतिविधि के लिए प्रोत्साहित करने में भी मदद करती है।

फिजियोथेरेपी की प्रमुख भूमिकाओं में शामिल हैं :-

  • अधिक जोखिम वाले लोगों की पहचान करना।
  • सुरक्षित और रोकथाम वाली एक्सरसाइज कराना।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि के लिए प्रोत्साहित करना।
  • बीमारी की जल्दी पहचान और जल्द कार्रवाई को बढ़ावा देना।
  • चेतावनी के संकेतों को पहचानने में मदद करना।

किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए ?

सीने में दर्द, सांस फूलना, थकान, कमजोरी और चक्कर आना ऐसे चेतावनी संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

स्वस्थ दिल के लिए कौन-सी एक्सरसाइज बेहतर हैं ?

हृदय को स्वस्थ रखने के लिए एक्सरसाइज को तीन प्रमुख हिस्सों में समझा जा सकता है।

  1.  एरोबिक एक्सरसाइज : तेज चलना, साइकिल चलाना, तैराकी और डांसिंग जैसी गतिविधियां एरोबिक एक्सरसाइज में आती हैं। इन्हें नियमित शारीरिक गतिविधि का हिस्सा बनाया जा सकता है।
  2.  रेसिस्टेंस ट्रेनिंग : मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज भी महत्वपूर्ण हैं। सप्ताह में कम से कम 2 से 3 दिन रेसिस्टेंस ट्रेनिंग की जा सकती है। इसमें वेट कफ, थेराबैंड, थेराबैंड ट्यूब, थेराबैंड लूप या शरीर के वजन पर आधारित गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। पुश-अप, स्क्वाट, लंज और पुल-अप इसके उदाहरण हैं।
  3. बैलेंस और लचीलेपन की एक्सरसाइज : एक पैर पर खड़े होना और स्ट्रेचिंग जैसी गतिविधियां शरीर के संतुलन और लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।

स्ट्रोक का खतरा कितना बड़ा है ?

हर चार में से एक व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी स्ट्रोक का जोखिम रहता है। नियमित शारीरिक गतिविधि स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद करती है। दिए गए मेटर के अनुसार, सप्ताह में पांच बार 30 मिनट तक एक्सरसाइज करने से स्ट्रोक का खतरा 25 प्रतिशत तक कम हो सकता है। रोजाना 6500 से 8500 कदम चलने की सलाह दी गई है।

फिजियोथेरेपिस्ट, खासकर न्यूरोलॉजी में विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट, स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के साथ-साथ स्ट्रोक के बाद मरीज के पुनर्वास में मदद करते हैं।

स्ट्रोक से बचे 73 प्रतिशत लोग स्ट्रोक के बाद पहले साल में गिर जाते हैं। ऐसे में संतुलन और चलने की क्षमता को बेहतर करना पुनर्वास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।

रोज कितनी शारीरिक गतिविधि जरूरी है?

शारीरिक गतिविधि के लिए दिए गए दिशा-निर्देश इस प्रकार हैं :-

  • वयस्कों के लिए : सप्ताह में 150 से 300 मिनट एरोबिक गतिविधि।
  • बच्चों और किशोरों के लिए : रोजाना 60 मिनट एरोबिक गतिविधि।

इसके बावजूद 31 प्रतिशत वयस्क और 80 प्रतिशत किशोर शारीरिक गतिविधि के सुझाए गए स्तर को पूरा नहीं करते। इसलिए रोजमर्रा की जिंदगी में चलना-फिरना बढ़ाना और लंबे समय तक बैठे रहने से बचना जरूरी है।

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग क्यों जरूरी है ?

मजबूती बढ़ाने वाली एक्सरसाइज से कोलेस्ट्रॉल और अन्य ब्लड लिपिड, इंसुलिन सेंसिटिविटी और शरीर की बनावट जैसे कारकों में सुधार होता है। ये सभी कोरोनरी आर्टरी डिजीज और मायोकार्डियल इन्फार्क्शन यानी दिल के दौरे से जुड़े हैं।

दिए गए मेटर के अनुसार, हर सप्ताह स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का एक अतिरिक्त घंटा दिल की गंभीर बीमारी के जोखिम में 5 प्रतिशत और हार्ट अटैक के जोखिम में 14 प्रतिशत कमी से जुड़ा था।

कितनी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें ?

  • वयस्कों के लिए : सप्ताह में 2 दिन, लगातार नहीं; 60 से 120 मिनट प्रति सप्ताह।
  • बुजुर्गों के लिए : सप्ताह में 3 दिन, लगातार नहीं।

एक्सरसाइज करने से क्या-क्या फायदे होते हैं ?

  • एनर्जी बढ़ाने और नींद बेहतर करने में मदद।
  • शरीर का वजन नियंत्रित करने में मदद।
  • एरोबिक फिटनेस बेहतर करना।
  • ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को बेहतर रखने में मदद।
  • हार्ट अटैक का जोखिम कम करने में मदद।
  • तनाव कम करना और मूड बेहतर करना।
  • टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम कम करना।
  • कुछ तरह के कैंसर का जोखिम कम करना।
  • संतुलन बेहतर करना।
  • गिरने का जोखिम कम करना।
  • मांसपेशियों की ताकत बढ़ाना।

छोटी-छोटी आदतें कैसे कम कर सकती हैं दिल की बीमारी का जोखिम ?

दिल की बीमारी का जोखिम कम करने के लिए रोजमर्रा की छोटी आदतों में बदलाव भी महत्वपूर्ण है।

  • ज्यादा चलें-फिरें और कम बैठें।
  • संतुलित और हेल्दी डाइट लें।
  • स्मोकिंग न करें।
  • शराब का सेवन सीमित करें।
  • नियमित हेल्थ चेक-अप करवाएं।
  • हर उम्र में सक्रिय रहें और ज्यादा चलें-फिरें।

बैलेंस ट्रेनिंग क्या है और इसके कितने प्रकार हैं ?

बैलेंस ट्रेनिंग को मुख्य रूप से दो प्रकारों में समझा जा सकता है—स्टैटिक बैलेंस और डायनामिक बैलेंस।

1. स्टैटिक बैलेंस

खुद को एक ही स्थिति या पोस्चर में बनाए रखने की क्षमता को स्टैटिक बैलेंस कहते हैं।

सिंगल लेग स्टांस : एक पैर पर 8 से 12 सेकंड तक खड़े रहना। इसे सपोर्ट के साथ या बिना सपोर्ट के किया जा सकता है।

सिंगल लेग बैलेंस : एक पैर पर खड़े होकर एड़ी या पंजे पर भार डालने का अभ्यास किया जाता है। वेट कफ या पानी की बोतल के साथ दोनों हाथों को क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज दिशा में घुमाकर इसका अभ्यास किया जा सकता है।

2. डायनामिक बैलेंस

शरीर को गति में रखते हुए संतुलन बनाए रखने की क्षमता को डायनामिक बैलेंस कहते हैं।

इसमें ये अभ्यास शामिल हैं :-

  • हील डिग : बैठकर और फिर खड़े होकर एड़ी को जमीन पर टिकाना।
  • काफ रेज : बैठकर और फिर खड़े होकर पिंडलियों की कसरत करना।
  • नी रेज : घुटनों को ऊपर उठाना।
  • टो टैप : पैर के पंजे से क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज दिशा में टैप करना।
  • टेंडम वॉक : एड़ी से पंजे तक चलना और एक पैर के ठीक आगे दूसरा पैर रखना।
  • साइड टैप्स : पैर को बगल में टैप करना।
  • 4-पॉइंट नीलिंग : घुटनों और हाथों के बल झुकना।

प्रोप्रियोसेप्शन एक्सरसाइज क्या है ?

प्रोप्रियोसेप्शन शरीर के अंगों की स्थिति और उनकी गति को महसूस करने की क्षमता से जुड़ा है। इसके लिए आंखें बंद करके 20 से 30 सेकंड तक खड़े रहने का अभ्यास बताया गया है। संतुलन से जुड़े ऐसे अभ्यास व्यक्ति की क्षमता के अनुसार और जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपिस्ट की निगरानी में किए जाने चाहिए।

विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 का फोकस यह बताता है कि फिजियोथेरेपी केवल बीमारी या चोट के बाद पुनर्वास तक सीमित नहीं है। हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम, नियमित शारीरिक गतिविधि, मांसपेशियों की मजबूती, संतुलन और बीमारी के बाद पुनर्वास—इन सभी क्षेत्रों में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। उम्र और क्षमता के अनुसार एक्सरसाइज को जीवनशैली का हिस्सा बनाना स्वस्थ दिल और बेहतर शारीरिक क्षमता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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