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Highway Shock : 13 किलोमीटर का सफर 4 घंटे में क्यों, नौ महीने बाद भी गड्ढों से बाहर क्यों नहीं निकल पाया सोहना-भिवाड़ी नेशनल हाईवे

Highway Shock : हर सुबह घर से निकलते वक्त लोगों को यह नहीं पता होता कि वे दफ्तर, फैक्ट्री या घर समय पर पहुंच पाएंगे या नहीं। गुरुग्राम से सटे मेवात क्षेत्र में सोहना-भिवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग 919 पर सफर अब...

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Highway Shock : हर सुबह घर से निकलते वक्त लोगों को यह नहीं पता होता कि वे दफ्तर, फैक्ट्री या घर समय पर पहुंच पाएंगे या नहीं। गुरुग्राम से सटे मेवात क्षेत्र में सोहना-भिवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग 919 पर सफर अब एक रोजमर्रा की परीक्षा बन चुका है। महज 13 किलोमीटर की दूरी तय करने में 3 से 4 घंटे लग रहे हैं। गड्ढों, जाम और रेंगते ट्रैफिक ने इस सड़क को लोगों के धैर्य और सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बना दिया है।

नौ महीने पहले सड़क को गड्ढा मुक्त करने का काम शुरू हुआ था, लेकिन हालात आज भी वैसे ही हैं। छात्र स्कूल पहुंचने में देर से पहुंच रहे हैं, मजदूरों की ड्यूटी छूट रही है और मरीज जाम में फंस रहे हैं। यह हाईवे अब केवल खराब सड़क की कहानी नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और ठेकेदारी व्यवस्था पर उठते गंभीर सवालों का प्रतीक बन चुका है।

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क्षेत्र के लिए क्यों अहम है यह राजमार्ग

सोहना-भिवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग हरियाणा और राजस्थान को जोड़ने वाला अहम मार्ग है। गुरुग्राम, सोहना, तावड़ू, नूंह और भिवाड़ी के बीच रोजाना हजारों वाहन इसी रास्ते से गुजरते हैं। भिवाड़ी की औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों के लिए यही मुख्य रास्ता है। स्थानीय व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी काफी हद तक इसी सड़क पर निर्भर हैं।

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लेकिन मौजूदा हालात में यह राजमार्ग सुविधा का नहीं, बल्कि मजबूरी का रास्ता बन गया है। लोग जानते हैं कि सफर लंबा और थकाने वाला होगा, फिर भी उनके पास कोई विकल्प नहीं है।

मरम्मत के दावे और जमीनी हकीकत

मार्च 2025 में इस 24 किलोमीटर लंबे मार्ग को गड्ढा मुक्त करने के लिए दिल्ली की एक निर्माण कंपनी को टेंडर दिया गया था। इस पर 1 करोड़ 37 लाख रुपये खर्च होने थे। दावा किया गया था कि सड़क को जल्द दुरुस्त कर लिया जाएगा और लोगों को राहत मिलेगी।

नौ महीने बाद भी स्थिति यह है कि कई हिस्सों में काम शुरू होने के संकेत तक नहीं दिखते। कहीं अधूरी पैचिंग की गई, तो कहीं सड़क पहले से ज्यादा उखड़ गई। बरसात के दौरान जलभराव ने हालात और बिगाड़ दिए और भारी वाहनों के दबाव से गड्ढे और गहरे हो गए।

कहां सबसे ज्यादा खराब है हालात

तावड़ू से सोहना के बीच शिकारपुर चौराहा, केएमपी फ्लाईओवर के नीचे का हिस्सा, निजामपुर गांव और खोरी कला क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन इलाकों में सड़क पर जगह जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं। वाहन रेंग रेंग कर चलते हैं और थोड़ी सी बारिश या ट्रैफिक बढ़ते ही लंबा जाम लग जाता है।

कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोगों को गांवों के संकरे और कच्चे रास्तों से निकलना पड़ता है, जहां दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है।

आम लोगों पर भारी पड़ती बदहाली

इस बदहाल सड़क का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। छात्र समय पर स्कूल और कॉलेज नहीं पहुंच पा रहे हैं। मजदूरों की ड्यूटी छूट रही है, जिससे उनकी रोजाना की कमाई प्रभावित हो रही है। व्यापारियों को माल ढुलाई में देरी झेलनी पड़ रही है।

आपात स्थिति में एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए यह रास्ता किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। लोगों का कहना है कि जाम में फंसे मरीजों के लिए हर मिनट कीमती होता है, लेकिन यहां मिनट नहीं, घंटे बर्बाद हो जाते हैं।

गड्ढे बनते जा रहे हैं जानलेवा

सड़क पर बने गड्ढे अब सिर्फ असुविधा नहीं रहे। वे सीधे तौर पर लोगों की जान के लिए खतरा बन चुके हैं। हाल ही में एक बाइक सवार गहरे गड्ढे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया। ऐसे हादसे लोगों के डर और गुस्से को और बढ़ा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना इसी डर के साथ सफर करना पड़ता है कि कब कौन सा गड्ढा हादसे की वजह बन जाए।

स्थानीय आवाजें, बढ़ता गुस्सा

प्रभावित रवि पंवार बताते हैं कि वे शाम 7 बजे तावड़ू से निकले थे और घर पहुंचते पहुंचते रात 11 बज गए। उनके मुताबिक यह हाल अब रोज का हो चुका है। खोरी कला के पंचायत सदस्य आजाद अली का कहना है कि सड़क पर बने गड्ढे सीधे तौर पर जानलेवा साबित हो रहे हैं। निजामपुर के शब्बीर अहमद बताते हैं कि उनके गांव की सीमा में तो अब तक काम शुरू होने के कोई ठोस संकेत भी नहीं दिखे हैं।

प्रशासन का जवाब और लोगों की उम्मीद

भवन एवं लोक निर्माण विभाग नूंह के कार्यकारी अभियंता प्रदीप संधू का कहना है कि वे स्वयं मौके का निरीक्षण करेंगे। यदि कहीं लापरवाही पाई गई तो संबंधित एजेंसी को नोटिस जारी किया जाएगा और काम में सुधार सुनिश्चित किया जाएगा।  लेकिन स्थानीय लोग इन आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि ऐसे बयान पहले भी कई बार दिए जा चुके हैं। टेंडर हुआ, बजट तय हुआ, लेकिन जमीनी हालात नहीं बदले।

अनिश्चितता से भरा सफर

सोहना-भिवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग 919 की बदहाली अब केवल एक सड़क की समस्या नहीं रही। यह प्रशासनिक जवाबदेही, ठेकेदारी व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर रही है। आपके लिए यह सड़क रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। जब तक इसे गड्ढा मुक्त और सुरक्षित नहीं बनाया जाता, तब तक हर दिन का सफर लोगों के लिए परेशानी, खतरे और अनिश्चितता से भरा रहेगा।

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