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Herbal Cigarettes : सावधान! तुलसी-लौंग वाली सिगरेट भी सेहत की दुश्मन; वैज्ञानिकों ने तोड़ी बड़ी गलतफहमी

तंबाकू वाली सिगरेट की तुलना में हर्बल सिगरेट से निकलने वाला धुआं अधिक घातक हो सकता है : शोध

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Herbal Cigarettes : भारत और विदेश में व्यापक रूप से "प्राकृतिक, तंबाकू-रहित और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी वैकल्पिक उत्पाद" के रूप में बेची जाने वाली हर्बल सिगरेट सामान्य तंबाकू वाली सिगरेट की तुलना में अधिक नुकसान पहुंचा सकती है। यह दावा एक शोध रिपोर्ट में किया गया है।

हर्बल सिगरेट का धुआं ज्यादा खतरनाक

इसमें कहा गया है कि हर्बल सिगरेट से निकलने वाला धुआं तंबाकू वाली सिगरेट से निकले धुएं जितना या उससे भी अधिक हानिकारक हो सकता है। यह शोध 'जर्नल ऑफ हजार्डस मटीरियल्स' में प्रकाशित हुआ है और इसमें शोधकर्ताओं ने भारतीय बाजारों में उपलब्ध हर्बल और तंबाकू वाले सिगरेट के धुएं के भौतिक, रासायनिक व ऑक्सीडेटिव गुणों की विस्तृत तुलना की है।

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तुलसी-ग्रीन टी वाली सिगरेट भी पहुंचाती है नुकसान

शोध के लेखक समीर पटेल ने कहा, "हमारे शोध निष्कर्ष इस व्यापक धारणा को चुनौती देते हैं कि तंबाकू रहित होने का अर्थ जोखिम से मुक्त होना होता है।" शोधकर्ताओं ने भारत के दो सबसे अधिक बिकने वाले तंबाकू ब्रांड और तुलसी, लौंग, दालचीनी, पुदीना, ग्रीन टी, वॉटर लिली और कैमोमाइल जैसे मिश्रण वाली चार लोकप्रिय हर्बल सिगरेटों से निकलने वाले धुएं की तुलना की।

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'नेचुरल' और 'हेल्दी' दावों को शोध ने किया खारिज

पटेल ने कहा कि हर्बल सिगरेटों से निकलने वाला धुआं लगभग हर मापदंड पर तंबाकू सिगरेटों के बराबर या उनसे अधिक पाया गया। पत्तों में लिपटी हर्बल किस्में सबसे अधिक हानिकारक पाई गईं। इनमें से दो हर्बल ब्रांड में तेंदू पत्तों का उपयोग किया गया है, जो भारत में सबसे अधिक सेवन किए जाने वाले बीड़ी उत्पादों में भी इस्तेमाल होते हैं। हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि हर्बल सिगरेट से उत्सर्जित धुआं तंबाकू वाली सिगरेटों से निकलने वाले धुएं के बराबर या उससे भी अधिक घातक होता है, जो यह दर्शाता है कि ये उनकी तरह ही हानिकारक हो सकती हैं। 500 नैनोमीटर से छोटे कणों की मात्रा हर्बल सिगरेटों में तंबाकू सिगरेटों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक पाई गई। ये सूक्ष्म कण हृदय और श्वसन रोगों से जुड़े होते हैं।

हर्बल सिगरेट के नुकसान

फेफड़ों को नुकसान: हर्बल सिगरेट का धुआं फेफड़ों में जलन पैदा कर सकता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा इससे कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है, जिससे कई गंभीर बीमारियों की आशंका बढ़ती है।

श्वसन रोगों का खतरा: लगातार सेवन से ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। साथ ही लंबे समय तक धूम्रपान करने से शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर हो सकती है।

दिल संबंधी समस्याएं: धुएं में मौजूद सूक्ष्म कण और कार्बन मोनोऑक्साइड रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकते हैं।

कैंसर का जोखिम: तंबाकू न होने के बावजूद किसी भी जली हुई वनस्पति सामग्री से निकलने वाले कुछ रसायन कैंसरकारी हो सकते हैं, जिससे फेफड़े, मुंह और गले के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

गले और मुंह की समस्याएं: गले में खराश, खांसी, मुंह में जलन और बार-बार संक्रमण की शिकायत हो सकती है। शोध के अनुसार, हर्बल सिगरेट के धुएं में मौजूद बेहद छोटे कण फेफड़ों से होते हुए रक्त प्रवाह तक पहुंच सकते हैं, जिससे हृदय और श्वसन तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

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