Hanuman Ansh : ‘हनुमान अंश’ में हनुमान या नीम करौली बाबा? 25 स्क्रीन से 100 करोड़ तक ऐसे बदली फिल्म की किस्मत
करीब दो करोड़ रुपये से कम बजट में बनी फिल्म ने शुरुआती झटकों के बाद पकड़ी रफ्तार; जानिए कहानी, हनुमान कनेक्शन, कैंची धाम और इसकी सफलता की पूरी कहानी
Hanuman Ansh : किसी फिल्म की सफलता का अंदाजा आमतौर पर उसकी शुरुआती कमाई से लगाया जाता है। लेकिन ‘हनुमान अंश’ ने यह धारणा बदल दी। 7 अगस्त को महज 25 स्क्रीन पर रिलीज हुई इस फिल्म ने पहले दिन करीब 10 लाख रुपये कमाए। पहले सप्ताह में इसकी कमाई 1.08 करोड़ रुपये रही और दूसरे सप्ताह में यह घटकर करीब 40 लाख रुपये रह गई। इसके बाद फिल्म की रफ्तार अचानक बदल गई। तीसरे सप्ताह में कमाई 10.40 करोड़ रुपये और चौथे सप्ताह में करीब 61 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। 6 सितंबर को फिल्म ने भारत में 100 करोड़ रुपये नेट का आंकड़ा पार कर लिया।
आखिर ऐसा क्या हुआ कि शुरुआत में बेहद सीमित दर्शकों वाली फिल्म बाद में इतनी बड़ी हिट बन गई? और जिस फिल्म का नाम ‘हनुमान अंश’ है, उसकी कहानी भगवान हनुमान की है या नीम करौली बाबा की? इन सवालों के जवाब फिल्म की कहानी और उसकी असामान्य बॉक्स ऑफिस यात्रा में छिपे हैं।
क्या है ‘हनुमान अंश’ की कहानी ?
फिल्म का नाम सुनकर पहली धारणा यही बनती है कि यह भगवान हनुमान पर आधारित होगी। लेकिन ‘हनुमान अंश’ सीधे भगवान हनुमान के जीवन की कहानी नहीं है। फिल्म का केंद्र प्रसिद्ध संत नीम करौली बाबा और उनकी आध्यात्मिक यात्रा है।
कहानी लक्ष्मीनारायण के जीवन से शुरू होती है। जीवन, मृत्यु और ईश्वर से जुड़े सवालों के जवाब तलाशने की उनकी कोशिश उन्हें आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाती है। इसी यात्रा में उनका जीवन धीरे धीरे सांसारिक रास्ते से आध्यात्मिक मार्ग की ओर बढ़ता है और आगे चलकर नीम करौली बाबा के व्यक्तित्व से जुड़ता है।
फिल्म में भक्ति, सेवा, प्रेम और मानवता को प्रमुखता दी गई है। इसलिए इसे सिर्फ किसी संत की जीवन कथा के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह एक ऐसे व्यक्ति की आध्यात्मिक तलाश की कहानी भी है, जो जीवन के बड़े सवालों के जवाब खोजने निकलता है।
फिल्म के नाम में ‘हनुमान’ क्यों ?
अगर कहानी नीम करौली बाबा की है तो फिल्म का नाम ‘हनुमान अंश’ क्यों रखा गया? इसका जवाब बाबा की भगवान हनुमान के प्रति गहरी आस्था में मिलता है। नीम करौली बाबा को हनुमान जी का अनन्य भक्त माना जाता है। उनकी साधना और आध्यात्मिक जीवन में हनुमान भक्ति का महत्वपूर्ण स्थान रहा। फिल्म इसी संबंध को अपने शीर्षक में सामने लाती है।
इसलिए ‘हनुमान अंश’ को भगवान हनुमान की पारंपरिक कथा समझना सही नहीं होगा। यह नीम करौली बाबा के जीवन और हनुमान भक्ति के संबंध को केंद्र में रखती है।
250 से 25 शो हुए, फिर दर्शकों ने बदल दी तस्वीर
‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस यात्रा किसी कहानी से कम नहीं रही। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के अनुसार शुरुआती दौर में फिल्म के शो की संख्या करीब 250 से घटकर 25 रह गई थी। उन्होंने उस दौर में फिल्म को लेकर चिंता भी जताई थी।
हालांकि फिल्म की रिलीज 25 स्क्रीन पर हुई थी। पहले दिन करीब 10 लाख रुपये की कमाई और पहले दो सप्ताह की कमजोर प्रतिक्रिया के बाद फिल्म का भविष्य मुश्किल नजर आ रहा था। पहले सप्ताह में 1.08 करोड़ रुपये और दूसरे सप्ताह में सिर्फ 40 लाख रुपये की कमाई हुई।
फिर तीसरे सप्ताह से कहानी बदल गई। दर्शकों की संख्या बढ़ी और फिल्म ने 10.40 करोड़ रुपये कमाए। चौथे सप्ताह में कमाई करीब 61 करोड़ रुपये पहुंच गई। यानी चौथे सप्ताह की कमाई पहले सप्ताह से करीब 57 गुना अधिक रही। फिल्म की यह रफ्तार दर्शाती है कि दर्शकों की माउथ पब्लिसिटी ने इसकी किस्मत बदलने में बड़ी भूमिका निभाई।
माउथ पब्लिसिटी ने कैसे बदली फिल्म की किस्मत?
‘हनुमान अंश’ के पास बड़े सितारे नहीं थे। फिल्म का बजट भी बड़ी व्यावसायिक फिल्मों की तुलना में बहुत कम था। ऐसे में फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनी दर्शकों की प्रतिक्रिया।
फिल्म देखने के बाद लोगों ने इसकी कहानी और आध्यात्मिक विषय की चर्चा शुरू की। जैसे जैसे चर्चा बढ़ी, वैसे वैसे दर्शक भी बढ़ते गए। इसके साथ फिल्म को ज्यादा स्क्रीन मिलने लगीं।
आम तौर पर किसी फिल्म की कमाई पहले सप्ताह में सबसे ज्यादा होती है और उसके बाद धीरे धीरे गिरती जाती है। ‘हनुमान अंश’ में इसका उलटा हुआ। शुरुआत कमजोर रही, लेकिन तीसरे और चौथे सप्ताह में फिल्म की कमाई तेजी से बढ़ी। यही इसे एक असामान्य बॉक्स ऑफिस सफलता बनाता है।
100 करोड़ क्लब में कैसे पहुंची ?
6 सितंबर 2026 को फिल्म ने भारत में 100 करोड़ रुपये नेट का आंकड़ा पार किया। उपलब्ध ट्रेड आंकड़ों के अनुसार पांचवें रविवार की सुबह तक इसका घरेलू नेट कलेक्शन 100.81 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इससे पहले पांचवें शनिवार तक फिल्म 99.38 करोड़ रुपये पर थी।
करीब दो करोड़ रुपये से कम बजट में बनी फिल्म के लिए यह उपलब्धि खास है। वह भी तब, जब फिल्म में कोई स्थापित बड़ा बॉलीवुड स्टार नहीं है। फिल्म की सफलता इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि इसे 25 स्क्रीन से शुरुआत मिली और बाद में दर्शकों की संख्या बढ़ने के साथ इसका स्क्रीन काउंट भी तेजी से बढ़ा।
नीम करौली बाबा कौन थे ?
नीम करौली बाबा 20वीं सदी के प्रसिद्ध आध्यात्मिक संतों में गिने जाते हैं। उनके अनुयायी उन्हें महाराज जी के नाम से भी संबोधित करते हैं। उनकी शिक्षाओं में भक्ति के साथ सेवा और मानवता पर जोर दिया जाता है। भारत के अलावा विदेशों में भी उनके अनुयायी हैं। यही वजह है कि उनके जीवन पर बनी फिल्म को भारत से बाहर भी दर्शकों का एक संभावित वर्ग मिल सकता है।
कैंची धाम से क्या है संबंध ?
नीम करौली बाबा का नाम कैंची धाम से गहराई से जुड़ा है। उत्तराखंड स्थित यह आश्रम उनके अनुयायियों के लिए प्रमुख आस्था केंद्र है। बाबा की आध्यात्मिक विरासत और हनुमान भक्ति को समझने में कैंची धाम महत्वपूर्ण कड़ी है। फिल्म का विषय भी इसी आध्यात्मिक विरासत से जुड़ा है।
फिल्म की इसी कड़ी को देखते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राज्य में टैक्स फ्री करने की घोषणा की है। उन्होंने फिल्म देखने के बाद इसे आध्यात्मिक और परिवार के साथ देखने योग्य फिल्म बताया।
किसने निभाया नीम करौली बाबा का किरदार ?
फिल्म में नीम करौली बाबा की भूमिका शोभिनव सत्या ने निभाई है। खास बात यह है कि वह शुरुआत में फिल्म की टीम के साथ सहायक निर्देशक के रूप में जुड़े थे।
परियोजना में मूल अभिनेता के स्थान पर बदलाव की स्थिति बनी तो शोभिनव सत्या को मुख्य भूमिका के लिए चुना गया। फिल्म की स्क्रिप्ट और आध्यात्मिक विषय की उनकी समझ ने इसमें भूमिका निभाई। फिल्म का लेखन और निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है।
एक असाइनमेंट से फिल्म तक पहुंची कहानी
‘हनुमान अंश’ के बनने की कहानी भी दिलचस्प है। फिल्म से जुड़ी अनुप्रिया नगर की नीम करौली बाबा में रुचि एक विश्वविद्यालय असाइनमेंट के दौरान पैदा हुई थी। स्टीव जॉब्स से जुड़े एक अकादमिक प्रोजेक्ट पर काम करते हुए उनका ध्यान नीम करौली बाबा और कैंची धाम से जुड़े संदर्भों की ओर गया। इसके बाद उन्होंने बाबा के जीवन के बारे में पढ़ना और शोध करना शुरू किया।
शुरुआत में इस विषय पर किताब या कॉमिक बनाने का विचार था। बाद में निर्देशक विशाल चतुर्वेदी से मुलाकात हुई और यह विचार फिल्म की शक्ल में आगे बढ़ा। यानी जिस विषय से एक विश्वविद्यालय असाइनमेंट के दौरान जिज्ञासा पैदा हुई, वह आगे चलकर फिल्म बना और अब 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई तक पहुंच गया।
फिल्म बनाने का तरीका भी रहा अलग
‘हनुमान अंश’ का बजट करीब दो करोड़ रुपये से कम बताया गया है। फिल्म ने बड़े सितारों या भारी प्रचार अभियान के बजाय कहानी और आध्यात्मिक विषय पर भरोसा किया।
निर्देशक के मुताबिक फिल्म के प्रचार के दौरान भंडारों का आयोजन भी किया गया। इस तरह फिल्म की प्रचार रणनीति भी उसके विषय से जुड़ी रही।
अब दुनिया भर में पहुंचेगी ‘हनुमान अंश’
भारत में सफलता के बाद फिल्म का अगला पड़ाव विदेशी बाजार है। 11 सितंबर 2026 से फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज किए जाने की तैयारी है। Hombale Films ने इसके अंतरराष्ट्रीय वितरण अधिकार हासिल किए हैं।
नीम करौली बाबा की लोकप्रियता भारत के बाहर भी है। ऐसे में विदेशी दर्शकों के बीच फिल्म को कैसी प्रतिक्रिया मिलती है, यह इसके सफर का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।
मध्य प्रदेश के सुनील की आवाज भी बनी पहचान![]()
‘हनुमान अंश’ की चर्चा फिल्म की कहानी और बॉक्स ऑफिस के साथ इसके भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ को लेकर भी है। इसे मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के दृष्टिबाधित लोकगायक सुनील लोधी ने गाया है। उनकी देसी और भावपूर्ण आवाज ने भजन को अलग पहचान दिलाई है।
सुनील ने कम उम्र से ही तमूरा लेकर भजन और बुंदेली लोकगीत गाने शुरू किए थे। गांवों और स्थानीय स्तर पर गाने से शुरू हुआ उनका सफर सोशल मीडिया तक पहुंचा। उनके भजनों की चर्चा के बाद उनकी आवाज फिल्म की टीम तक पहुंची और उन्हें ‘हनुमान अंश’ के लिए गाने का मौका मिला।
फिल्म में उनका गाया भजन दर्शकों के बीच चर्चा में है। इस तरह ‘हनुमान अंश’ की सफलता की कहानी में सुनील लोधी का सफर भी एक अलग और प्रेरक अध्याय बन गया है।
तो आखिर ‘हनुमान अंश’ क्यों बनी खास?
‘हनुमान अंश’ की कहानी दो स्तरों पर दिलचस्प है। पर्दे पर यह नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा और उनकी हनुमान भक्ति से जुड़ी कहानी है। पर्दे के बाहर यह एक ऐसी फिल्म की कहानी है, जिसकी शुरुआत महज 25 स्क्रीन से हुई, शुरुआती दो सप्ताह कमजोर रहे, शो घटे और फिर दर्शकों की चर्चा ने इसकी दिशा बदल दी।
10 लाख रुपये की ओपनिंग से शुरू होकर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा नेट तक पहुंचने का सफर बताता है कि हर फिल्म की किस्मत पहले दिन तय नहीं होती। कभी कभी कहानी को दर्शकों तक पहुंचने में समय लगता है और जब दर्शक उससे जुड़ते हैं तो वही दर्शक फिल्म के सबसे बड़े प्रचारक बन जाते हैं।
‘हनुमान अंश’ की सबसे बड़ी कहानी शायद यही है। फिल्म को शुरुआत में सिनेमाघरों में कम जगह मिली, लेकिन धीरे धीरे दर्शकों के बीच उसने अपनी जगह बना ली।

