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Gurugram Floods Explained : गुरुग्राम डूबता क्यों है? IIT की स्टडी ने बताया बारिश के पानी का पूरा नेटवर्क

छह घंटे में 31.48 अरब लीटर पानी का अनुमान; राजीव चौक, सुभाष चौक और शीतला माता रोड सबसे संवेदनशील

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गुरुग्राम में भारी बारिश के बाद जलभराव वाली सड़क से गुजरतीं स्कूल बसें। फाइल फोटो
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Gurugram Floods Explained : बारिश होते ही गुरुग्राम की कई सड़कें और चौराहे पानी में डूब जाते हैं। अब एक तकनीकी स्टडी ने बताया है कि इसकी वजह केवल किसी एक नाले की खराब हालत या किसी एक जगह की जल निकासी व्यवस्था नहीं है। शहर के अलग-अलग हिस्से आपस में जुड़े हैं और बारिश का पानी एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर तक जाता है। इसलिए एक जगह नाले को ठीक करने या पानी का रास्ता बदलने से दूसरी जगह जलभराव बढ़ सकता है।

नगर निगम गुरुग्राम (MCG) के लिए आईआईटी गांधीनगर और AIReSQ ने पूरे शहर में बारिश के पानी के बहाव का कंप्यूटर मॉडल तैयार किया है। इसका मकसद यह समझना था कि तेज बारिश में पानी कहां से आता है, किस रास्ते से गुजरता है और किन जगहों पर ज्यादा जमा हो सकता है।

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पहले समझिए, कितना पानी गुरुग्राम में आया ?

स्टडी में तीन घंटे में 107.3 मिमी बारिश होने की स्थिति को आधार बनाया गया। इस दौरान बारिश की सबसे तेज दर 73 मिमी प्रति घंटा मानी गई। इसके आधार पर छह घंटे तक पानी के बहाव का कंप्यूटर मॉडल तैयार किया गया।

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मॉडल के अनुसार, इस दौरान गुरुग्राम में कुल 31.48 मिलियन घन मीटर यानी करीब 31.48 अरब लीटर पानी पहुंचा।  इसमें 30.98 मिलियन घन मीटर पानी सीधे बारिश से आया, जबकि करीब 0.50 मिलियन घन मीटर पानी ऊपरी इलाकों से आया।

सेक्टरों के बीच सबसे ज्यादा पानी 44,237 घन मीटर बहने का अनुमान लगाया गया। यह पानी सेक्टर 1 से सेक्टर 111 की ओर जाने का अनुमान है।

117 सेक्टरों के बीच पानी कैसे पहुंचता है ?

स्टडी का सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि गुरुग्राम के सेक्टर अलग अलग नहीं हैं। बारिश का पानी एक सेक्टर से निकलकर दूसरे सेक्टर में जा सकता है। अध्ययन में 117 सेक्टरों के बीच पानी के 257 ऐसे रास्ते मिले, जहां से पानी एक सेक्टर की सीमा पार कर दूसरे सेक्टर में पहुंचता है।

शोधकर्ताओं ने 125 ऐसे जल निकासी क्षेत्रों की भी पहचान की है, जिनका पानी आगे जाकर साझा नालों और पानी के रास्तों में पहुंचता है। इसका सीधा मतलब है कि अगर किसी एक जगह नाला बड़ा कर दिया जाए या पानी का रास्ता बदल दिया जाए, तो वहां जलभराव कम हो सकता है, लेकिन पानी का दबाव दूसरी जगह बढ़ सकता है। यानी गुरुग्राम में बाढ़ का समाधान केवल एक दो जगहों पर काम करके नहीं किया जा सकता।

किन जगहों पर सबसे ज्यादा खतरा ?

स्टडी में राजीव चौक, सुभाष चौक और शीतला माता रोड को प्राथमिकता वाले तीन प्रमुख जलभराव वाले स्थान बताया गया है।

मॉडल में मानी गई तेज बारिश के दौरान इन जगहों पर पानी की अधिकतम मात्रा करीब 5.26 करोड़ से 10.80 करोड़ लीटर तक पहुंचने का अनुमान है।

पानी को भूमिगत टैंकों में रोकने की योजना

स्टडी में बारिश के अतिरिक्त पानी को तुरंत सड़कों और नालों में जाने देने के बजाय कुछ समय के लिए भूमिगत टैंकों में जमा करने का सुझाव दिया गया है। उदाहरण के तौर पर 14,000 घन मीटर क्षमता वाले टैंक का मॉडल तैयार किया गया। इसमें जमा पानी को चार चरणों में साफ करने की योजना है। इसमें स्क्रीनिंग, पानी को कुछ समय टैंक में रोकना, फिल्ट्रेशन और पानी की गुणवत्ता की जांच शामिल है।

इसके बाद पानी को नाले में छोड़ा जा सकता है, लेकिन तभी जब आगे के नाले में पानी लेने की पर्याप्त क्षमता हो। दूसरा विकल्प निगरानी वाले रिचार्ज कुओं के जरिये जांच किए गए गहरे भूजल भंडार तक पानी पहुंचाने का है। हालांकि, जमीन के नीचे ऊपरी स्तर पर मौजूद पानी में रिचार्ज करने का विकल्प इस योजना में शामिल नहीं किया गया है।

पालम विहार में मॉडल से क्या पता चला?

कंप्यूटर मॉडल में पालम विहार के दो पार्कों में बारिश का पानी कुछ समय के लिए रोकने की योजना का परीक्षण किया गया।

इसके मुताबिक, सड़क पर पानी की अधिकतम गहराई में 10.6 प्रतिशत और सड़क पर जमा पानी की अधिकतम मात्रा में 25.2 प्रतिशत कमी आ सकती है। मॉडल में परीक्षण क्षेत्र के बाहर अतिरिक्त जलभराव भी नहीं हुआ। इसका मतलब है कि अगर बारिश के पानी को कुछ समय के लिए रोक लिया जाए, तो सड़कों पर पानी का दबाव कम किया जा सकता है।

क्या अभी भूमिगत टैंक बनेंगे ?

नहीं। फिलहाल MCG ने इनके निर्माण की मंजूरी नहीं मांगी है।

पहले जमीन पर सर्वे किया जाएगा। इसके साथ भूजल भंडार की जांच और छोटे स्तर पर पायलट परीक्षण होगा। इसके बाद यह देखा जाएगा कि कंप्यूटर मॉडल में मिले नतीजे वास्तविक परिस्थितियों में भी सही साबित होते हैं या नहीं।

इसी के आधार पर आगे निर्माण का फैसला लिया जाएगा।

MCG क्या कह रहा है ?

MCG आयुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि निगम अब जलभराव वाली जगह पर केवल अस्थायी उपाय करने के बजाय समस्या के मूल कारणों को दूर करने पर ध्यान दे रहा है। उनका कहना है कि पूरे शहर के जल निकासी तंत्र को ध्यान में रखते हुए समाधान तैयार किया जा रहा है।

आसान भाषा में समझिए पूरी बात

गुरुग्राम में बारिश का पानी कई सेक्टरों के बीच एक दूसरे से जुड़े रास्तों से गुजरता है। इसलिए किसी एक जगह नाला ठीक करने या पानी का रास्ता बदलने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। पानी का दबाव दूसरी जगह पहुंच सकता है।

आईआईटी की स्टडी का मुख्य संदेश है कि गुरुग्राम में बाढ़ का समाधान पूरे शहर के जल निकासी तंत्र को एक साथ समझकर करना होगा। भूमिगत टैंक और पार्कों में पानी रोकने जैसे उपायों का अभी मॉडल के स्तर पर परीक्षण हुआ है। जमीन पर सर्वे और पायलट परीक्षण के बाद ही इनके निर्माण पर फैसला होगा।

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