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Gold Price Explained : क्या 37% तक गिर सकते हैं सोने के दाम? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट से समझिए पूरा गणित

3,857 डॉलर और 3,500 डॉलर प्रति औंस के प्रमुख तकनीकी स्तरों पर नजर, रिपोर्ट ने संभावित परिदृश्य पेश किया, निश्चित गिरावट नहीं

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प्रतीकात्मक चित्र
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Gold Price Explained : क्या सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आने वाली है? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की ताजा रिपोर्ट ने इस संभावना को लेकर चर्चा तेज कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,857 डॉलर प्रति औंस के प्रमुख तकनीकी समर्थन स्तर से नीचे जाता है तो इसकी कीमत 3,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। यह जनवरी के उच्चतम स्तर से करीब 37 प्रतिशत की संभावित गिरावट होगी। हालांकि, यह केवल तकनीकी विश्लेषण पर आधारित संभावित परिदृश्य है।

रिपोर्ट में आखिर कहा क्या गया है?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, फिलहाल सोना सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है, लेकिन मार्च की शुरुआत से बने डाउनट्रेंड से अभी बाहर नहीं निकल पाया है। यदि कीमत 3,943 डॉलर प्रति औंस से नीचे टिकती है और इसके बाद 3,857 डॉलर का स्तर भी टूट जाता है तो 3,500 डॉलर प्रति औंस अगला प्रमुख तकनीकी समर्थन स्तर हो सकता है।

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37% गिरावट का मतलब क्या है ?

रिपोर्ट में जिस 37 प्रतिशत गिरावट का उल्लेख किया गया है, वह जनवरी में बने उच्चतम स्तर की तुलना में है। इसका मतलब यह नहीं है कि सोना निश्चित रूप से 37 प्रतिशत गिरेगा। रिपोर्ट केवल तकनीकी विश्लेषण के आधार पर संभावित समर्थन स्तर की ओर संकेत करती है।

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सोने पर दबाव क्यों बढ़ा ?

हाल के दिनों में कई कारणों से सोने की कीमतों पर दबाव बना है।

  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें फिलहाल स्थिर रखी हैं।
  • बाजार अब फेडरल रिजर्व की आगे की मौद्रिक नीति को लेकर नई संभावनाओं का आकलन कर रहा है।
  • गोल्ड ईटीएफ में निवेश का प्रवाह धीमा पड़ा है।
  • कॉमेक्स में निवेशकों की लंबी पोजिशन घटी है।
  • अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेतों से सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के रूप में सोने की मांग कुछ कमजोर हुई है।

मजबूत जापानी येन कैसे देगा सहारा ?

रिपोर्ट के अनुसार, यदि जापानी येन मजबूत होता है और अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ता है तो इससे सोने की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। डॉलर कमजोर होने पर अन्य देशों के खरीदारों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ सकती है।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर ?

आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कई अहम आर्थिक घटनाक्रमों पर रहेगी, जिनमें शामिल हैं:

  • अमेरिका के विनिर्माण (Manufacturing PMI) और सेवा क्षेत्र (Services PMI) के आंकड़े
  • जुलाई के रोजगार (Payroll) के आंकड़े
  • फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेत
  • अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम

इन सभी का सीधा असर सोने की कीमतों की दिशा पर पड़ सकता है।

भारतीय निवेशकों पर क्या होगा असर?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर भारत में सोने की कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, घरेलू बाजार में कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय भाव से तय नहीं होतीं। डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, जीएसटी और स्थानीय मांग जैसे कई अन्य कारक भी सोने के दाम प्रभावित करते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का पूरा असर भारतीय खुदरा बाजार में दिखे, यह जरूरी नहीं है।

क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल किसी एक रिपोर्ट के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। यदि आप लंबी अवधि के निवेशक हैं तो चरणबद्ध तरीके से निवेश (SIP या किस्तों में खरीद) जोखिम कम करने का एक बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अल्पकालिक निवेशकों को अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर रखनी चाहिए।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट फिलहाल एक संभावित तकनीकी परिदृश्य पेश करती है। यदि प्रमुख समर्थन स्तर टूटते हैं तो सोने की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। वहीं, मजबूत जापानी येन, कमजोर अमेरिकी डॉलर या वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव जैसी परिस्थितियां कीमतों को फिर से सहारा भी दे सकती हैं। कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व के संकेत और वैश्विक घटनाक्रम तय करेंगे कि सोना मौजूदा स्तर पर टिकता है या इसमें और गिरावट आती है। -एजेंसी इनपुट के साथ

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