उधार के पैसों के धनुष से एशियाई गोल्ड तक जींद की कीर्ति का सफर, गांव में मन रहा जश्न
रिटोली की कीर्ति ने कोरिया हराकर गोल्ड जीता, मां बोली 5 हजार का धनुष उधार लिया था, पिता 3 एकड़ में खेती करते हैं
जींद जिले की एक और बेटी ने अभावों को भेद एशियाई खेलों में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता है। तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीतने वाली यह बेटी है जींद के रिटोली की कीर्ति। कीर्ति के शुक्रवार को एडीसी खेलों की तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीतने की खबर जैसे ही उसके गांव पहुंची, उस पूरा गांव वक्त जश्न में डूब गया।
कीर्ति शर्मा ने महिला रिकर्व टीम इवेंट में अपनी साथियों अंकिता भकत और कुमकुम अनिल मोहोद के साथ मिलकर फाइनल में दक्षिण कोरिया को पराजित कर यह स्वर्णिम इतिहास रचा है। शुक्रवार को जैसे ही कीर्ति के स्वर्ण पदक जीतने की सूचना गांव पहुंची, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां मनाईं।
अभावों को भेद कीर्ति ने बनाया कीर्तिमान
कीर्ति की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उसके परिवार का वर्षों का संघर्ष और त्याग छिपा है। उसकी माता गुड्डी देवी ने नम आंखों से यादों के पन्ने पलटते हुए बताया कि कीर्ति की प्रतिभा की पहचान पिल्लूखेड़ा मंडी के एफएस स्कूल में हुई थी। शुरुआत में वह एथलेटिक्स में दौड़ लगाया करती थी। कोच ऊधम सिंह ने जब उसके स्टैमिना और एकाग्रता को देखा, तो उसे तीरंदाजी में हाथ आजमाने की सलाह दी।
5 हजार का लकड़ी का धनुष भी उधार के पैसे से खरीदा था
कीर्ति की मां बताती हैं कि उनके पास तो इतने पैसे भी नहीं थे कि बेटी के लिए अच्छा धनुष खरीद लेते। हमने सोचा था छोटा-मोटा खेल होगा। पहली बार पांच हजार का लकड़ी का धनुष उधार पैसे लेकर खरीदकर दिया था। जब उसकी कला में निखार आया तो कोच के कहने पर 55000 रुपए का प्रोफेशनल धनुष आढ़ती से कर्ज लेकर लाए।
तीन एकड़ जमीन से गुजर बसर
कीर्ति के पिता विजय कुमार, जो महज तीन एकड़ जमीन पर खेती करके परिवार का गुजर-बसर करते हैं, बताते हैं कि जब बच्ची का चयन भारतीय खेल प्राधिकरण के पद्मा हजारीबाग (झारखंड) केंद्र में हुआ, तब उसके अभ्यास के लिए 55000 रुपए का नया धनुष भी आढ़ती से ब्याज पर पैसे उठाकर दिलाना पड़ा था।
पिता ने भावुक होते हुए कहा, "जब बेटी का फोन आया कि 'पापा, हमने कोरिया को हराकर गोल्ड जीत लिया है', तो एक पल के लिए यकीन ही नहीं हुआ। उस वक्त मैं खेत में धान की कटाई की तैयारी कर रहा था। 3 एकड़ जमीन में बच्चों को पढ़ाया और इस मुकाम तक पहुंचाया। आज बेटी ने सारा कर्ज चुकता कर दिया।" कीर्ति बीते 4 सालों से परिवार और घर त्यागकर झारखंड में इंटरनेशनल कोच ऊधम सिंह के मार्गदर्शन में दिन-रात कड़ा अभ्यास कर रही थी।
दादा रामजवारी और दादी लखपती का सीना गर्व से हुआ चौड़ा
कीर्ति की एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने की खुशी में उसके दादा रामजवारी और दादी लखपति देवी का सीना शुक्रवार को गर्व से चौड़ा हो गया।
जींद जिले के नाम एशियाई खेलों में अब तक 5 पदक
एशियन गेम्स 2026 में जींद जिले के खिलाड़ियों का दबदबा कायम है। कीर्ति शर्मा से पहले निशानेबाज नीरू ढांढा दो स्वर्ण पदक, जुलाना की पूजा कबड्डी में स्वर्ण पदक और अलेवा के हिमांशु रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुके हैं। कीर्ति की इस स्वर्णिम उपलब्धि से पूरे जिले में उत्साह का माहौल है।

