पहले गाड़ी गायब, फिर चोरी की रिपोर्ट! नूंह में क्या है ईएमआई का नया खेल?
कर्ज की किस्तों से बचने के लिए अपनी ही गाड़ियां गायब करवाने का संदेह; रिठाठ में 55 संदिग्ध इंजन बरामद, फाइनेंस और बीमा रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
Staged Vehicle Theft : नूंह में वाहन चोरी के मामलों की जांच के दौरान पुलिस को एक ऐसे कथित तरीके के संकेत मिले हैं, जिसमें कर्ज की किस्तें चुकाने में असमर्थ कुछ वाहन मालिक अपनी ही कार या पिकअप गायब करवाने की व्यवस्था कर रहे हैं। इसके बाद वाहन की चोरी की शिकायत दर्ज करवाई जाती है और गाड़ी को कबाड़ के नेटवर्क में पहुंचाकर उसके पुर्जे अलग कर दिए जाते हैं। इससे वाहन की बरामदगी और मामले की जांच मुश्किल हो जाती है।
रिठाठ गांव में हाल ही में हुई छापेमारी के बाद पुलिस इस आशंका की पड़ताल कर रही है। एक दर्जन से अधिक कबाड़ दुकानों और गोदामों की तलाशी में करीब 55 संदिग्ध इंजन बरामद किए गए हैं। पुलिस इनके रिकॉर्ड खंगाल रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि बरामद वाहनों में कितने चोरी के हैं और कितनों के गायब होने में उनके मालिकों की भूमिका हो सकती है।
कैसे सामने आया अपनी ही गाड़ी गायब करवाने का मामला?
नूंह में वाहन चोरी का पुराना तरीका यह रहा है कि दिल्ली और गुरुग्राम जैसे शहरों से गाड़ियां चोरी कर जिले के कबाड़ केंद्रों तक पहुंचाई जाती हैं। वहां उन्हें खोलकर इंजन और दूसरे पुर्जे अलग कर दिए जाते हैं। पुलिस की हालिया जांच में अब इस नेटवर्क के कथित इस्तेमाल का एक और तरीका सामने आया है।
पुलिस के मुताबिक, कुछ वाहन मालिक लोन की किस्तें चुकाने में असमर्थ होने पर अपनी गाड़ियां गायब करवाने की व्यवस्था कर सकते हैं। वाहन के गायब होने की शिकायत दर्ज होने के बाद बीमा और फाइनेंस से जुड़ी प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसी दौरान गाड़ी को कबाड़ केंद्र तक पहुंचाकर उसके पुर्जे अलग कर दिए जाते हैं। इस मामले में पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वाहन मालिकों, कबाड़ कारोबारियों और गाड़ियों को ठिकाने लगाने वाले लोगों के बीच किस तरह का संपर्क था।
रिठाठ में छापेमारी, 55 संदिग्ध इंजन बरामद
पिछले सप्ताह रिठाठ गांव में पुलिस ने एक दर्जन से अधिक कबाड़ दुकानों और गोदामों की तलाशी ली। इस दौरान करीब 55 ऐसे इंजन बरामद हुए, जिनके चोरी के वाहनों से जुड़े होने का संदेह है। पुलिस अब बरामद इंजनों और अन्य सामग्री से चेसिस नंबरों की पहचान कर रही है। इनका ऑनलाइन वाहन रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। इसके साथ ही स्पेयर पार्ट्स के कारोबारियों से पूछताछ जारी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान यह संकेत मिला कि बरामद कुछ वाहनों का संबंध सामान्य चोरी की शिकायतों के बजाय लोन पर खरीदे गए वाहनों से हो सकता है। इसी आधार पर अपनी ही गाड़ी गायब करवाने की आशंका की जांच की जा रही है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बरामद सभी इंजन किन वाहनों के हैं और कितने मामलों में वाहन मालिकों की कथित मिलीभगत के सबूत मिले हैं।
कबाड़ नेटवर्क कैसे बनता है चोरी के वाहनों का ठिकाना?
नूंह में वाहन चोरी और अवैध कबाड़ कारोबार का नेटवर्क लंबे समय से पुलिस की निगरानी में है। रिठाठ के अलावा राजाका, घीड़ा और रानिका गांवों में भी वाहन चोरी और अवैध कबाड़ कारोबार के मामलों में पुलिस कार्रवाई कर चुकी है।
छापेमारी के दौरान वाहन खोलने के उपकरण, गैस कटर और बिना लाइसेंस चल रहे कबाड़ गोदामों से जुड़ी बरामदगी भी होती रही है। नूंह के एसपी डॉ. अर्पित जैन के मुताबिक, चोरी की गाड़ी हो या कथित तौर पर कर्ज की किस्तों से बचने के लिए गायब करवाई गई गाड़ी, दोनों का अंतिम ठिकाना कबाड़ इकाई हो सकती है। वहां वाहन को कुछ ही घंटों में खोल दिया जाता है।
यही वजह है कि पुलिस अब केवल वाहन चोरी की एफआईआर तक सीमित नहीं रहना चाहती। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि वाहन किस कंपनी से फाइनेंस हुआ था और उसके गायब होने से किसे लाभ हो सकता था।
जांच का तरीका क्यों बदल रहा है?
डीएसपी (मुख्यालय) अभिमन्यु लोहान के अनुसार, हालिया छापेमारी में सामने आए संकेतों के बाद पुलिस अब वाहन चोरी के मामलों में मालिक की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। पहले जांच का मुख्य जोर चोरी हुए वाहन को तलाशने और उसे कबाड़ नेटवर्क तक पहुंचाने वालों का पता लगाने पर रहता था। अब पुलिस यह भी जांच रही है कि कहीं वाहन मालिक ने खुद ही उसे गायब करवाने की व्यवस्था तो नहीं की।
इसके लिए वाहन की चोरी की शिकायत, फाइनेंस कंपनी के रिकॉर्ड और बीमा संबंधी दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वाहन के गायब होने के पीछे किसका हित जुड़ा था।
साइबर ठगी और वाहन चोरी के नेटवर्क में क्या संबंध?
नूंह में साइबर ठगी के मामलों में भी पुलिस कार्रवाई करती रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जिले के कुछ युवा साइबर अपराध और वाहन चोरी जैसे गैरकानूनी कामों से जुड़े हैं। पुलिस का कहना है कि दोनों तरह के अपराधों में संगठित नेटवर्क और काम के बंटवारे की भूमिका हो सकती है। हालांकि, मौजूदा जांच में साइबर ठगी और वाहन चोरी के बीच किसी साझा गिरोह की व्यापकता को लेकर पुष्ट आंकड़े सामने नहीं आए हैं।
इसलिए दोनों अपराधों को एक ही नेटवर्क का हिस्सा मानना अभी उचित नहीं होगा। फिलहाल पुलिस का ध्यान वाहन चोरी, कबाड़ कारोबार और लोन पर खरीदी गई गाड़ियों के गायब होने के बीच संभावित संबंध की जांच पर है।
क्या ईएमआई नहीं चुकाने वाला हर व्यक्ति संदेह के घेरे में है?
नहीं। लोन की किस्तें नहीं चुका पाना अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है। पुलिस की जांच उन विशिष्ट मामलों पर केंद्रित है, जिनमें वाहन के गायब होने, फाइनेंस रिकॉर्ड और कबाड़ नेटवर्क के बीच संभावित संबंध सामने आए हैं।
पुलिस फिलहाल इस कथित तरीके से जुड़े मामलों की संख्या भी तय नहीं कर पाई है। अधिकारियों का कहना है कि वाहन मालिकों पर आरोप लगाने से पहले पर्याप्त सबूत जुटाना जरूरी है।
इसलिए मौजूदा जांच को सभी कर्जदार वाहन मालिकों पर संदेह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह उन विशिष्ट मामलों की पड़ताल है, जिनमें वाहन के गायब होने, फाइनेंस रिकॉर्ड और कबाड़ नेटवर्क के बीच संभावित संबंध सामने आए हैं।
अब पुलिस किन पहलुओं की जांच करेगी?
बरामद 55 संदिग्ध इंजनों की पहचान और उनके वाहन रिकॉर्ड का मिलान।
वाहनों के लोन और किस्तों से संबंधित दस्तावेजों की जांच।
चोरी की एफआईआर और बीमा संबंधी रिकॉर्ड का सत्यापन।
कबाड़ कारोबारियों और वाहन मालिकों के बीच संभावित संपर्क की पड़ताल।
यह पता लगाना कि वाहन गायब होने से किसे आर्थिक लाभ हो सकता था।
नूंह पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि रिठाठ में बरामद इंजन किन वाहनों के हैं और उनमें से कितने चोरी के मामलों से जुड़े हैं। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि लोन पर खरीदे गए वाहनों को कथित तौर पर गायब करवाने का तरीका कितने मामलों में अपनाया गया।
एसपी डॉ. अर्पित जैन और डीएसपी अभिमन्यु लोहान के मुताबिक, अब कबाड़ कारोबार की जांच में वाहन के फाइनेंस रिकॉर्ड और उसके गायब होने से लाभ पाने वाले पक्ष की पड़ताल भी शामिल रहेगी।

