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File Finally Closed : 7.65 रुपये की कहानी, जो 50 साल बाद अदालत में ऐसे हुई खत्म

दो अज्ञात लोगों पर रुपये चोरी करने का लगाया था आरोप

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File Finally Closed : आज के दौर में 7.65 रुपये शायद किसी को खास न लगें, लेकिन यही मामूली रकम 1977 में कानून की लंबी यात्रा पर निकल पड़ी थी। करीब पांच दशक तक पुलिस और अदालत की फाइलों में भटकने के बाद अब मुंबई की मझगांव अदालत ने इस मामले पर आखिरकार पूर्णविराम लगा दिया।

इस केस में दो अज्ञात व्यक्तियों पर 7.65 रुपये चोरी करने का आरोप दर्ज किया गया था। उस समय यह रकम छोटी नहीं मानी जाती थी। पुलिस ने वर्षों तक आरोपियों की तलाश की और गैर जमानती वारंट भी जारी किए, लेकिन न आरोपी मिले, न शिकायतकर्ता और न ही कोई ऐसा सुराग जिससे मामला आगे बढ़ सके। समय के साथ यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

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न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आरती कुलकर्णी ने 14 जनवरी को आदेश पारित करते हुए कहा कि यह मामला लगभग 50 साल पुराना है और बिना किसी प्रगति के अनावश्यक रूप से लंबित रहा। अदालत ने टिप्पणी की कि जरूरत से ज्यादा समय बीत चुका है और ऐसे मामले को आगे खींचने का कोई औचित्य नहीं है।

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अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 379 के तहत दर्ज मामले में दोनों आरोपियों को बरी कर दिया और निर्देश दिया कि चोरी की गई 7.65 रुपये की राशि शिकायतकर्ता को लौटाई जाए। यदि सूचना देने वाला नहीं मिलता है, तो अपील अवधि पूरी होने के बाद यह राशि सरकारी खाते में जमा कर दी जाएगी।

अदालत ने इसी तरह के अन्य पुराने मामलों का भी उल्लेख किया, जिनमें आरोपी, शिकायतकर्ता और गवाह समय के साथ लापता हो चुके हैं। अदालत का संकेत साफ था कि न्याय का मतलब अनंत इंतजार नहीं, बल्कि समय पर फैसला है।

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