Punjab Farmers Protest: चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर किसानों का डेरा, 7 दिन नहीं 7 महीने का राशन लेकर पहुंचे
Punjab Farmers Protest: हजारों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ किसानों का जमावड़ा, एयरपोर्ट जाने वालों की बढ़ी परेशानी; बोले- आंदोलन बढ़ा तो और किसान पहुंचेंगे
Punjab Farmers Protest: चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर किसानों का पक्का मोर्चा लगातार मजबूत होता जा रहा है। पंजाब के अलग-अलग जिलों से हजारों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ बॉर्डर पर पहुंच चुके हैं। किसानों के बढ़ते जमावड़े का असर अब आम लोगों की आवाजाही पर भी दिखाई देने लगा है। खासकर मोहाली एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों और चंडीगढ़-मोहाली के बीच रोजाना सफर करने वालों को ट्रैफिक के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन में शामिल किसान पूरी तैयारी के साथ पहुंचे हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में राशन, गैस सिलेंडर, बिस्तर और रोजमर्रा की जरूरत का सामान लाया गया है। प्रदर्शन स्थल पर सड़क के किनारे लंगर की व्यवस्था शुरू हो गई है। कहीं खाना तैयार किया जा रहा है तो कहीं किसानों के ठहरने के इंतजाम किए गए हैं। गर्मी से बचने के लिए बड़े कूलर लगाए गए हैं, जबकि कुछ ट्रैक्टरों में एसी तक की व्यवस्था की गई है।
किसानों का कहना है कि वे केवल सात दिन के लिए तैयारी करके नहीं आए हैं। “हम सात दिन नहीं, सात महीने का राशन लेकर आए हैं। अगर आंदोलन आगे बढ़ा तो और किसान भी यहां पहुंचेंगे।” किसानों ने स्पष्ट किया कि मांगों का समाधान होने तक वे मोर्चे से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।
पंजाब के संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 32 किसान संगठनों ने सात दिन के आंदोलन का ऐलान किया है। मंगलवार से शुरू हुआ यह पक्का मोर्चा 7 सितंबर तक 24 घंटे जारी रहने वाला है। आंदोलन के दूसरे दिन भी पंजाब के विभिन्न जिलों से किसानों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल, हरिंदर सिंह लखोवाल समेत कई नेता मौके पर मौजूद हैं।
47/48 लाइट प्वाइंट से जगतपुरा तक असर
किसानों के जमावड़े का असर चंडीगढ़-मोहाली के ट्रैफिक पर भी पड़ा है। 47/48 लाइट प्वाइंट से लेकर जगतपुरा और आसपास के रास्तों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। IISER से जगतपुरा की तरफ जाने वाले मार्ग के एक हिस्से को बंद कर यातायात को दूसरे हिस्से से निकाला जा रहा है।
प्रशासन की ओर से अलग-अलग स्थानों पर बैरिकेडिंग और डायवर्जन किए गए हैं। मोहाली से चंडीगढ़ आने वाले वाहनों को भी वैकल्पिक मार्गों की ओर भेजा जा रहा है। ट्रैफिक दबाव को देखते हुए एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों और रोजाना चंडीगढ़-मोहाली के बीच आने-जाने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने की सलाह दी गई है।
सड़क के एक हिस्से पर धरना, दूसरे से ट्रैफिक
किसानों ने सड़क के एक हिस्से में अपना धरना और मंच लगाया है, जबकि प्रशासन ने दूसरे हिस्से से यातायात जारी रखने की व्यवस्था की है। किसानों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण आने वाले दिनों में ट्रैफिक व्यवस्था पर दबाव और बढ़ने की संभावना है।
चंडीगढ़ और मोहाली पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
‘आम लोगों के खिलाफ नहीं है संघर्ष’
किसान नेताओं का कहना है कि उनका संघर्ष सरकार की नीतियों के खिलाफ है और वे आम लोगों को परेशान नहीं करना चाहते। नेताओं ने कहा कि सरकार बातचीत के लिए आगे आती है तो वे बातचीत के लिए तैयार हैं। हालांकि, मांगों पर समाधान नहीं निकलने की स्थिति में आंदोलन को और आगे बढ़ाने के संकेत भी दिए गए हैं।
फिलहाल चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर किसानों के आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। किसानों के साथ बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पहुंचने और लंबे आंदोलन की तैयारी के चलते अगले कुछ दिनों तक यहां यातायात और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चुनौती बनी रहने की संभावना है।
किसानों की मांगें
अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते का विरोध: किसान संगठनों का सबसे प्रमुख विरोध केंद्र सरकार के अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को लेकर है। उनका कहना है कि इससे भारतीय कृषि और किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर केंद्र से ठोस कदम की मांग: किसानों ने कृषि और किसानों से जुड़े आर्थिक मुद्दों पर केंद्र सरकार से नीतिगत फैसले लेने और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
पंजाब के पानी और नदी संसाधनों पर राज्य का अधिकार: किसान संगठनों ने पंजाब के नदी जल और पानी से जुड़े अधिकारों का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि राज्य के जल संसाधनों से जुड़े फैसलों में पंजाब के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
BBMB में पंजाब के अधिकारों की रक्षा: भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में पंजाब के अधिकारों और प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे भी आंदोलन की मांगों में शामिल हैं। किसान संगठनों का कहना है कि बोर्ड से जुड़े फैसलों में पंजाब के हित सुरक्षित रहने चाहिए।
केंद्र और पंजाब सरकार से बातचीत की मांग : किसानों का कहना है कि उनकी मांगों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाए। आंदोलन में केंद्र सरकार के साथ-साथ पंजाब सरकार से जुड़े मुद्दे भी उठाए जा रहे हैं।

