Explainer : क्यों हाथ ऊपर नहीं जाता और कंधा जकड़ जाता है? फ्रोजन शोल्डर की पूरी कहानी
Frozen Shoulder रात की नींद तक उड़ा देता है फ्रोजन शोल्डर
Frozen Shoulder : फ्रोजन शोल्डर उन समस्याओं में से है, जो धीरे धीरे जीवन की सामान्य गतिविधियों को रोक देती है। शुरुआत में हल्का दर्द लगता है, लेकिन समय के साथ यह इतना बढ़ सकता है कि रात की नींद टूटने लगे, कपड़े पहनना कठिन हो जाए और हाथ सिर के ऊपर उठाना लगभग नामुमकिन लगने लगे। कई मरीज बताते हैं कि उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे कंधा ‘जाम’ हो गया हो।
फ्रोजन शोल्डर भले ही बेहद दर्दनाक हो, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह अपने आप ठीक होने वाली समस्या है। सही समय पर पहचान, धैर्य और संतुलित इलाज से अधिकतर मरीज बिना किसी बड़ी प्रक्रिया के सामान्य जीवन में लौट आते हैं।
फ्रोजन शोल्डर क्या होता है
फ्रोजन शोल्डर को मेडिकल भाषा में ‘एडहेसिव कैप्सुलाइटिस’ कहा जाता है। कंधे के जोड़ के चारों ओर एक झिल्ली होती है, जो सामान्य स्थिति में लचीली रहती है और कंधे को आसानी से हिलने देती है।
इस बीमारी में यही झिल्ली मोटी और सख्त हो जाती है। नतीजा यह होता है कि कंधे की हरकतें धीरे धीरे सीमित होने लगती हैं और दर्द बढ़ता जाता है। कुछ अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, कई मरीजों में यह केवल मैकेनिकल समस्या नहीं होती, बल्कि शरीर की सूजन और इम्यून प्रतिक्रिया भी इसमें भूमिका निभाती है।
किसे ज्यादा खतरा रहता है ![]()
फ्रोजन शोल्डर किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम ज्यादा देखा जाता है।
- 40 से 60 वर्ष की उम्र के लोग
• महिलाएं, खासकर मेनोपॉज के बाद
• डायबिटीज और थायरॉयड से पीड़ित लोग
• स्ट्रोक, हार्ट अटैक या कंधे की चोट से उबर रहे मरीज
• ऐसे काम जिनमें बार बार हाथ ऊपर उठाना पड़ता है
विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 20 से 30 प्रतिशत मरीजों में जीवन के किसी चरण में दूसरा कंधा भी प्रभावित हो सकता है।
रात में दर्द ज्यादा क्यों होता है
फ्रोजन शोल्डर में रात का दर्द मरीजों के लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाला होता है। इसके पीछे कुछ स्पष्ट कारण होते हैं।
- रात में सूजन को दबाने वाले हार्मोन का स्तर कम हो जाता है
• लेटी हुई अवस्था में कंधे के जोड़ पर दबाव बढ़ जाता है
• दिनभर की जकड़न रात में ज्यादा महसूस होती है
इसी वजह से कई मरीज बताते हैं कि दिन की तुलना में रात में दर्द ज्यादा होता है और नींद बार बार टूटती है।
बीमारी को 3 आसान चरणों में समझें
पहला चरण : दर्द वाला दौर
• अवधि: 2 से 9 महीने
• तेज दर्द, खासकर रात में
• कंधा हिलाने पर ज्यादा तकलीफ
• हाथ ऊपर या पीछे ले जाना मुश्किल
दूसरा चरण : जकड़न वाला दौर
• अवधि: 4 से 12 महीने
• दर्द कुछ कम हो जाता है
• लेकिन कंधा बहुत सख्त हो जाता है
• कपड़े पहनना, नहाना और कंघी करना मुश्किल
तीसरा चरण : ठीक होने का दौर
• अवधि: 6 से 20 महीने
• दर्द और जकड़न धीरे धीरे कम होती है
• कंधे की हरकतें वापस आने लगती हैं
• ज्यादातर मरीज लगभग पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, हालांकि कुछ में हल्की जकड़न बनी रह सकती है
जांच क्यों जरूरी है
फ्रोजन शोल्डर का पता अक्सर डॉक्टर शारीरिक जांच से ही लगा लेते हैं। फिर भी एक्स रे, अल्ट्रासाउंड या एमआरआई इसलिए कराई जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि
- रोटेटर कफ टियर
• कंधे का आर्थराइटिस
• कंधे में कैल्शियम जमना
• या टीबी जैसी कोई गंभीर बीमारी
तो मौजूद नहीं है। केवल एमआरआई रिपोर्ट के आधार पर इलाज या सर्जरी का फैसला करना कई बार गलत साबित हो सकता है।
इलाज: ज्यादातर मामलों में सर्जरी नहीं
अधिकतर मरीजों में फ्रोजन शोल्डर समय के साथ खुद ही ठीक हो जाता है। इस दौरान इलाज का मुख्य उद्देश्य दर्द को नियंत्रित करना और कंधे की हलचल बनाए रखना होता है।
आम और सुरक्षित इलाज
• दर्द कम करने की दवाएं
• हल्की और नियंत्रित फिजियोथेरेपी
• जरूरत पड़ने पर कंधे में स्टेरॉयड इंजेक्शन
• कुछ मामलों में अल्ट्रासाउंड गाइडेड हाइड्रोडाइलेशन, जिसमें जोड़ के भीतर तरल डालकर जकड़न कम की जाती है
एक जरूरी चेतावनी
शुरुआती दर्द वाले दौर में जबरन स्ट्रेचिंग या बहुत तेज फिजियोथेरेपी करने से सूजन बढ़ सकती है और समस्या लंबी खिंच सकती है। हर मरीज में फिजियोथेरेपी का तरीका अलग होना चाहिए।
कब सर्जरी पर विचार किया जाता है
अगर कई महीनों तक दवा और फिजियोथेरेपी से भी आराम न मिले, या दर्द बहुत ज्यादा हो जाए, तब सर्जरी एक विकल्प बनती है।
सर्जरी के विकल्प
• एनेस्थीसिया में कंधे की जकड़न तोड़ना
• आर्थ्रोस्कोपिक कैप्सुलर रिलीज, जिसमें छोटे चीरे के जरिए जकड़े हिस्से काटे जाते हैं
ये प्रक्रियाएं आमतौर पर सुरक्षित और प्रभावी होती हैं, लेकिन केवल चुनिंदा मरीजों में ही अपनाई जाती हैं।
क्या न करें
- दर्द के डर से कंधे को बिल्कुल स्थिर न रखें
• बिना जांच बार बार इंजेक्शन न लगवाएं
• शुरुआती चरण में भारी वजन न उठाएं
• इंटरनेट देखकर खुद इलाज शुरू न करें
फ्रोजन शोल्डर भले ही बहुत दर्दनाक हो, लेकिन यह समस्या समय, धैर्य और सही इलाज से अधिकतर मामलों में अपने आप ठीक हो जाती है। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार जांच कराना, संतुलित फिजियोथेरेपी अपनाना और जल्दबाजी से बचना ही इस बीमारी से निपटने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।
लेखक डॉ. विशाल कुमार हैं, जो पीजीआई,चंडीगढ़ में ऑर्थोपेडिक्स विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।

