Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

Explainer: तीन दिनों में 2000 अंकों से ज्यादा क्यों टूटा सेंसेक्स? जानिए गिरावट की बड़ी वजहें

Indian Stock Market: भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन गिरावट के दौर से गुजर रहा है। बुधवार को सेंसेक्स करीब 800 अंक लुढ़क गया, जिससे बीते तीन दिनों में कुल गिरावट 2000 अंकों से अधिक हो चुकी है। हालांकि दोपहर...

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
Indian Stock Market सांकेतिक फाइल फोटो।
Advertisement

Indian Stock Market: भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन गिरावट के दौर से गुजर रहा है। बुधवार को सेंसेक्स करीब 800 अंक लुढ़क गया, जिससे बीते तीन दिनों में कुल गिरावट 2000 अंकों से अधिक हो चुकी है। हालांकि दोपहर में यह थोड़ा सुधरा। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर तिमाही नतीजों ने निवेशकों की धारणा को झटका दिया है।

बुधवार सुबह 10:50 बजे तक एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स 755.89 अंक टूटकर 81,424.58 पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी-50 222.45 अंक गिरकर 25,010.05 पर कारोबार कर रहा था। हालांकि बाद में सेंसेक्स व निफ्टी दोनों में थोड़ा सुधार हुआ। इस दौरान बीएसई मिडकैप इंडेक्स 2.52% और स्मॉलकैप इंडेक्स 2.74% तक टूट गया।

Advertisement

मंगलवार को भी बाजार को जोरदार झटका लगा था। उस दिन सेंसेक्स आठ महीने की सबसे बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ और तीन महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया था। लगातार बिकवाली से साफ है कि निवेशक अब भी विदेशी पूंजी निकासी, कमजोर नतीजों और वैश्विक अनिश्चितता को लेकर चिंतित हैं। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 3% की गिरावट, निफ्टी रियल्टी 5% से ज्यादा टूटा, जबकि ऑटो, आईटी, मेटल और फार्मा सेक्टर करीब 2% गिरे। फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 1.16% और निफ्टी बैंक 0.81% नीचे रहा।

Advertisement

आखिर क्यों गिर रहा है भारतीय शेयर बाजार?

1. ट्रेड वॉर और भू-राजनीतिक तनाव की आशंका

निवेशक बदलते वैश्विक हालात को लेकर आशंकित हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अधिग्रहित करने और यूरोपीय संघ के खिलाफ व्यापार युद्ध दोबारा शुरू करने की धमकी ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने इस मुद्दे पर विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

2. कमजोर और निराशाजनक तीसरी तिमाही (Q3) नतीजे

अब तक आए Q3 नतीजे मिले-जुले रहे हैं। नए श्रम कानूनों के एकमुश्त असर के कारण कई कंपनियों के प्रदर्शन पर दबाव दिखा।

विशेषज्ञों का कहना है कि आंकड़े स्थिर जरूर हैं, लेकिन कोई बड़ा सकारात्मक सरप्राइज नहीं मिला, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सके।

3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार शेयर बेच रहे हैं। 2 जनवरी को हल्की खरीद को छोड़ दें, तो इस महीने अब तक FIIs ने हर कारोबारी सत्र में बिकवाली की है। सोमवार को ही FIIs ने 3,262.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है।

4. सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव

भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते निवेशक रिस्की एसेट्स से दूरी बना रहे हैं। कई निवेशक शेयरों में मुनाफावसूली कर सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे गोल्ड और सिल्वर, संभावित अमेरिकी फेड की ब्याज दर कटौती, टैरिफ युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण निवेशकों को ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं।

5. बजट 2026 से पहले सतर्कता

1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से पहले भी बाजार में सतर्कता है। निवेशकों को उम्मीद है कि सरकार उपभोक्ता मांग, रोजगार सृजन और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने वाले कदम उठा सकती है। हालांकि, यह आशंका भी है कि यदि सरकार राजकोषीय घाटा कम करने पर ज्यादा जोर देती है, तो इससे सरकारी पूंजीगत खर्च प्रभावित हो सकता है, जो बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

Advertisement
×