Explainer : सड़क हादसे क्यों नहीं रुक रहे ? जानिये, कहां हो रही सुरक्षा में चूक
चंडीगढ़ में सेफ सिस्टम अप्रोच पर राज्य-स्तरीय मंथन
Rethinking Road Safety : सुबह घर से निकला बेटा शाम तक लौट नहीं पाया। स्कूल छोड़ने गई मां खुद अस्पताल पहुंच गई। तेज़ रफ्तार नहीं थी, शराब भी नहीं… फिर भी जान चली गई।
ऐसी खबरें अब अपवाद नहीं रहीं। आप रोज़ अखबार में पढ़ते हैं, कुछ पल ठहरते हैं और फिर आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन हर हादसे के बाद एक सवाल भीतर रह जाता है कि अगर गलती इंसान से होना तय है, तो हर गलती मौत में क्यों बदल जाती है?
यही सवाल सड़क सुरक्षा की सबसे बड़ी बहस का केंद्र है। इसी सोच को सामने रखकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ ने लोक निर्माण विभाग, पंजाब सरकार के सहयोग से ‘सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण’ यानी सेफ सिस्टम अप्रोच पर राज्य-स्तरीय कार्यशाला आयोजित की। मकसद साफ था कि सड़क हादसों को सिर्फ मानवीय गलती नहीं, बल्कि सिस्टम की जिम्मेदारी के रूप में समझना।
सबसे पहले यह समझिए : हादसे इतने जानलेवा क्यों हो जाते हैं ?
सड़क हादसे अक्सर एक वजह से नहीं, बल्कि कई चूकों के जोड़ से जानलेवा बनते हैं।
- सड़क का डिज़ाइन गलती सहने लायक नहीं होता
• स्पीड सड़क की बनावट के हिसाब से तय नहीं होती
• पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए सुरक्षित जगह नहीं होती
• हादसे के बाद मदद समय पर नहीं पहुंचती
जब ये सारी कमजोरियां एक साथ सामने आती हैं, तो एक छोटी सी चूक भी जान ले लेती है।
क्या हर हादसे की वजह सिर्फ ड्राइवर होता है ?
अब तक ज्यादातर मामलों में जवाब यही माना गया कि ड्राइवर की गलती थी।
लेकिन सेफ सिस्टम अप्रोच इस सोच को अधूरा मानता है।
यह मानता है कि इंसान से गलती हो सकती है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सिस्टम को उस गलती के असर को सीमित करना चाहिए। अगर एक पल की चूक पर मौत हो जाए, तो सवाल सिर्फ ड्राइवर पर नहीं, सड़क और व्यवस्था पर भी उठता है।
सेफ सिस्टम अप्रोच क्या कहता है?
सेफ सिस्टम अप्रोच की सोच बहुत सीधी है कि इंसान से गलती होगी, लेकिन गलती की कीमत मौत नहीं होनी चाहिए। इस दृष्टिकोण में सड़क, वाहन, नियम, प्रवर्तन और आपातकालीन सेवाएं मिलकर काम करती हैं। यानी जिम्मेदारी केवल ड्राइवर की नहीं होती।
सड़क डिज़ाइन कहां चूक जाता है?
कई सड़कें आज भी ऐसी हैं जो गलती को ‘माफ’ नहीं करतीं।
- खतरनाक मोड़ बिना चेतावनी के
• अचानक खत्म हो जाने वाली लेन
• डिवाइडर या क्रैश बैरियर की कमी
• पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग का अभाव
ऐसी सड़कों पर मामूली चूक भी सीधे गंभीर हादसे में बदल जाती है।
स्पीड : सिर्फ तेज़ रफ्तार नहीं, गलत रफ्तार
अक्सर कहा जाता है कि तेज़ रफ्तार जान लेती है।
लेकिन असल सवाल यह है कि क्या हर सड़क एक ही गति के लिए बनी होती है?
सेफ सिस्टम अप्रोच कहता है :
- रिहायशी इलाकों में कम गति जरूरी
• स्कूल और बाजार क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी
• हाईवे पर भी सड़क के डिज़ाइन के हिसाब से गति तय हो
गलत जगह पर थोड़ी सी ज्यादा रफ्तार भी हादसे को जानलेवा बना देती है।
हादसे के बाद जान क्यों नहीं बच पाती?
कई मामलों में दुर्घटना इतनी गंभीर नहीं होती, लेकिन एंबुलेंस देर से पहुंचती है। जिस कारण नजदीकी अस्पताल तक समय पर पहुंच नहीं हो पाती और प्राथमिक इलाज में देरी हो जाती है। विशेषज्ञ इसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहते हैं। सेफ सिस्टम अप्रोच में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं भी उतनी ही अहम मानी जाती हैं जितनी सड़क और नियम।
कार्यशाला में क्या बात साफ हुई?
चंडीगढ़ में हुई कार्यशाला में अधिकारियों ने एक बात पर सहमति जताई कि सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है।
पंजाब के लोक निर्माण विभाग मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि सड़क डिज़ाइन से लेकर रखरखाव तक सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी राकेश कुमार ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब राजमार्गों की योजना में मानव जीवन को सबसे ऊपर रखा जाए।
राज्य परिवहन आयुक्त एवं महानिदेशक, सड़क सुरक्षा, पंजाब प्रणीत शेरगिल के अनुसार बिना मजबूत डेटा और संस्थागत तालमेल के स्थायी सुधार संभव नहीं है।
सड़कें क्या बदल सकती हैं?
सेफ सिस्टम अप्रोच के तहत सड़कें बहुत कुछ बदल सकती हैं—
- खतरनाक मोड़ों का सुधार
• ब्लैक स्पॉट की पहचान और उपचार
• क्रैश बैरियर और सुरक्षित डिवाइडर
• पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए सुरक्षित रास्ते
ऐसी सड़कें हादसे को पूरी तरह रोक न भी पाएं, तो भी मौत की आशंका काफी कम कर देती हैं।
‘शून्य मृत्यु गलियारा’: क्या यह संभव है?
कार्यशाला में ‘शून्य मृत्यु गलियारा’ की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। इसका मतलब है कि ऐसे सड़क खंड, जहां हादसे हों, लेकिन मौत न हो।
इसके लिए जरूरी है कि
- सुरक्षित इंजीनियरिंग
• सड़क के अनुरूप गति
• प्रभावी और निष्पक्ष प्रवर्तन
• तेज़ आपातकालीन सेवाएं
आम आदमी के लिए इसका मतलब
सेफ सिस्टम अप्रोच कोई तकनीकी शब्द भर नहीं है।
इसका सीधा मतलब है कि
- सड़कें ज्यादा सुरक्षित हों
• हादसों में मौतें कम हों
• परिवार उजड़ने से बचें
यानी सड़क सुरक्षा सीधे आपकी और आपके परिवार की ज़िंदगी से जुड़ा सवाल है। अब सवाल यह नहीं होना चाहिए कि गलती किसकी थी। बल्कि सवाल यह होना चाहिए कि क्या सिस्टम इतना मजबूत था कि वह जान बचा सके?

