Explainer: पंजाब के सीमावर्ती किसानों की क्या है समस्या, कैसे निकलेगा समाधान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर पंजाब से जुड़े कई लंबित मामलों पर बातचीत की
India-Pakistan border land: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर पंजाब से जुड़े कई लंबित मामलों पर बातचीत की। इनमें सीमावर्ती सुरक्षा व्यवस्था, कृषि संकट, अंतरराज्यीय जल विवाद और केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण विकास फंड (RDF) के बकाए की अदायगी जैसे अहम मुद्दे शामिल रहे। खासतौर पर सीमावर्ती इलाकों में किसानों को हो रही परेशानियों को मुख्यमंत्री ने प्रमुखता से उठाया।
सीमावर्ती इलाकों में किसानों की मुख्य समस्या क्या है?
अंतरराष्ट्रीय सीमा (जीरो लाइन) और भारत-पाक सीमा पर लगी कंटीली तार (फेंसिंग) के बीच पंजाब की बड़ी मात्रा में कृषि योग्य भूमि स्थित है। कई स्थानों पर यह फेंसिंग जीरो लाइन से दो से तीन किलोमीटर अंदर तक लगी हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार इसे लगभग 150 मीटर की दूरी पर होना चाहिए।
इससे किसानों को किस तरह की दिक्कत होती है?
हजारों एकड़ जमीन कंटीली तार के पार होने के कारण किसानों को रोजाना अपने खेतों तक पहुंचने के लिए पहचान पत्र दिखाने पड़ते हैं, बीएसएफ की निगरानी में आवाजाही करनी होती है और समय व सुरक्षा संबंधी पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। इससे खेती करना मुश्किल हो जाता है और किसानों में डर व असुरक्षा की भावना बनी रहती है।
पंजाब सरकार क्या समाधान चाहती है?
मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि यदि कंटीली तार को अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक दोबारा स्थापित किया जाए, तो भारतीय भूमि का बड़ा हिस्सा फेंसिंग के इस पार आ जाएगा। इससे किसान बिना डर और रोजाना की बाधाओं के खेती कर सकेंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी कोई समझौता नहीं होगा।
केंद्र सरकार का रुख क्या है?
मुख्यमंत्री के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि यह मुद्दा विचाराधीन है और पठानकोट क्षेत्र में इसी तरह की व्यवस्था पर पहले काम किया जा चुका है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकल सकता है।

