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Explainer : कनाडा का रास्ता अब PU से... बीबीए छात्रों के लिए खुला ड्यूल डिग्री का दरवाजा, जानिए क्या है पूरा समझौता

तीसरे साल में सीधा प्रवेश, दो देशों की डिग्री, वैश्विक exposure और रोजगार संभावनाओं की नई दिशा

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उच्च शिक्षा के वैश्वीकरण के इस दौर में पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए कनाडा तक पहुंचने का औपचारिक शैक्षणिक रास्ता खुल गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ द फ्रेजर वैली (कनाडा) और पंजाब यूनिवर्सिटी (चंडीगढ़) के बीच बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) में ड्यूल डिग्री कार्यक्रम को लेकर समझौता हुआ है। यह पहल न केवल दो संस्थानों के बीच सहयोग है, बल्कि उन छात्रों के लिए बड़ा अवसर है जो वैश्विक exposure और अंतरराष्ट्रीय डिग्री के साथ अपना करियर बनाना चाहते हैं।

एमओयू पर पंजाब यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. वाई.पी. वर्मा और यूनिवर्सिटी ऑफ द फ्रेजर वैली के अध्यक्ष एवं वाइस चांसलर डॉ. जेम्स मैंडिगो ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान पंजाब यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. रेनू विग सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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क्या है यह ड्यूल डिग्री मॉडल?

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इस समझौते के तहत पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड मैनेजमेंट साइंसेज में अध्ययनरत बीबीए के पात्र छात्रों को यूनिवर्सिटी ऑफ द फ्रेजर वैली में तीसरे वर्ष में सीधा प्रवेश मिलेगा।

मॉडल के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

छात्र पहले दो वर्ष चंडीगढ़ में पढ़ाई करेंगे।

तीसरे वर्ष से कनाडा में प्रवेश लेकर शेष पाठ्यक्रम पूरा करेंगे।

इंटीग्रेटेड बीबीए-एमबीए कार्यक्रम के विद्यार्थियों को भी तीसरे और चौथे वर्ष कनाडा में अध्ययन का विकल्प मिलेगा।

निर्धारित शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने पर दोनों विश्वविद्यालयों से डिग्रियां प्रदान की जाएंगी।

अर्थात एक ही शैक्षणिक मार्ग से दो देशों की डिग्री प्राप्त करने का अवसर।

छात्रों के लिए क्या बदलेगा?

अब तक विदेश में पढ़ाई का विकल्प अधिकतर छात्रों के लिए अलग आवेदन प्रक्रिया, नई शुरुआत और अतिरिक्त वर्ष के रूप में सामने आता था। लेकिन इस मॉडल में:

पढ़ाई का निरंतरता बनी रहेगी।

शैक्षणिक क्रेडिट ट्रांसफर होगा।

दोहरी डिग्री से अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी।

आज के समय में बिजनेस शिक्षा का दायरा स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन, डिजिटल मार्केटिंग और स्टार्टअप संस्कृति जैसे विषयों में वैश्विक दृष्टिकोण आवश्यक हो गया है। ऐसे में कनाडा में अध्ययन का अनुभव छात्रों को नई समझ देगा।

विश्वविद्यालयों का दृष्टिकोण

पंजाब यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. रेनू विग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक साझेदारियां शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करती हैं और छात्रों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलती हैं। उन्होंने इसे विदेशी शिक्षण मार्गों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। यूनिवर्सिटी ऑफ द फ्रेजर वैली के अध्यक्ष डॉ. जेम्स मैंडिगो ने भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चले आ रहे शैक्षणिक संबंधों का उल्लेख करते हुए विश्वास जताया कि यह कार्यक्रम दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक सहयोग को और सुदृढ़ करेगा। समारोह में डीन इंटरनेशनल स्टूडेंट्स प्रो. केवल कृष्ण, डीयूआई प्रो. योजना रावत तथा यूआईएएमएस की निदेशक प्रो. अनुप्रीत कौर मावी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

रोजगार के नजरिए से क्या मायने?

कनाडाई डिग्री को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता प्राप्त है। इससे छात्रों के लिए:

उत्तरी अमेरिका में रोजगार के अवसर।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों में बेहतर प्रोफाइल।

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग

उच्च शिक्षा के लिए वैश्विक विश्वविद्यालयों में प्रवेश की संभावना बढ़ सकती है। साथ ही, भारत के तेजी से विकसित होते व्यापारिक वातावरण का अनुभव यूएफवी के छात्रों के लिए भी लाभकारी होगा। इस प्रकार यह साझेदारी द्विपक्षीय लाभ का मॉडल प्रस्तुत करती है।

क्या होंगे व्यावहारिक प्रश्न?

हालांकि अवसर आकर्षक है, लेकिन पाठकों और अभिभावकों के मन में कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न भी हैं:

फीस संरचना क्या होगी?

कनाडा में रहने और अन्य खर्चों का अनुमान कितना होगा?

वीजा प्रक्रिया कितनी सरल या जटिल होगी?

क्या छात्रवृत्ति या वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी?

यदि विश्वविद्यालय इन पहलुओं पर स्पष्ट और पारदर्शी दिशा-निर्देश जारी करते हैं, तो यह कार्यक्रम मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भी व्यावहारिक विकल्प बन सकता है।

शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा

भारत में नई शिक्षा नीति के बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग और छात्र गतिशीलता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ऐसे में पंजाब यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ द फ्रेज़र वैली के बीच यह समझौता उसी व्यापक परिप्रेक्ष्य का हिस्सा माना जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि यह मॉडल सफल रहता है तो:

अन्य पाठ्यक्रमों में भी ड्यूल डिग्री कार्यक्रम शुरू हो सकते हैं।

शोध सहयोग और फैकल्टी एक्सचेंज कार्यक्रम बढ़ सकते हैं।

उद्योग-अकादमिक साझेदारी को मजबूती मिल सकती है।

छात्रों और अभिभावकों की नजर से

मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए विदेश में पढ़ाई अक्सर आर्थिक चुनौती के रूप में सामने आती है। लेकिन यदि क्रेडिट ट्रांसफर, सीमित अवधि का विदेश प्रवास और स्पष्ट संरचना उपलब्ध हो, तो यह अपेक्षाकृत अधिक व्यवहारिक विकल्प बन सकता है। ड्यूल डिग्री कार्यक्रम छात्रों को न केवल शैक्षणिक बल्कि सांस्कृतिक अनुभव भी देगा। नई भाषा, नया शैक्षणिक वातावरण और वैश्विक सहपाठियों के साथ संवाद- ये सभी तत्व व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आगे की राह

समारोह के दौरान बिज़नेस इकोनॉमिक्स और अन्य विषयों में संभावित सहयोग पर भी चर्चा हुई। संकेत मिल रहे हैं कि यह साझेदारी भविष्य में और व्यापक रूप ले सकती है। यदि यह कार्यक्रम सफल रहता है, तो पंजाब यूनिवर्सिटी के अन्य विभागों में भी अंतरराष्ट्रीय समझौतों का रास्ता खुल सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ द फ्रेजर वैली और पंजाब यूनिवर्सिटी के बीच हुआ यह समझौता केवल एक औपचारिक एमओयू नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा के बदलते परिदृश्य में नई संभावनाओं का संकेत है। तीसरे वर्ष में सीधा प्रवेश, दोहरी डिग्री और वैश्विक exposure-ये सभी तत्व मिलकर छात्रों के लिए करियर की नई दिशा तय कर सकते हैं।

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