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Explainer : जिस दवा से गर्भवती महिलाएं डर गईं, जानिये क्या है उसकी असली कहानी

Truth Check : गर्भावस्था के दौरान जब बुखार, सिरदर्द या बदन दर्द होता है, तो सबसे पहले दिमाग में जिस दवा का नाम आता है, वह है पैरासिटामोल। वर्षों से इसे गर्भवती महिलाओं के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता रहा...

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Truth Check : गर्भावस्था के दौरान जब बुखार, सिरदर्द या बदन दर्द होता है, तो सबसे पहले दिमाग में जिस दवा का नाम आता है, वह है पैरासिटामोल। वर्षों से इसे गर्भवती महिलाओं के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ महीनों में यही दवा डर और दुविधा की वजह बन गई। कई महिलाएं दर्द सहने लगीं, सिर्फ इस आशंका में कि कहीं एक गोली उनके होने वाले बच्चे के भविष्य को प्रभावित न कर दे। सवाल यह है कि यह डर आया कहां से और अब विज्ञान इस बारे में क्या कह रहा है।

डर की शुरुआत कैसे हुई

पिछले साल अमेरिका में कुछ सरकारी चेतावनियों और सार्वजनिक बयानों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल का सेवन बच्चों में ऑटिज्म यानी स्वलीनता या ध्यान की कमी से जुड़ी अतिसक्रियता यानी एडीएचडी से जुड़ा हो सकता है। मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया चर्चाओं ने इस आशंका को और बढ़ा दिया। नतीजा यह हुआ कि गर्भवती महिलाओं के बीच यह संदेश फैल गया कि सुरक्षित मानी जाने वाली यह दवा भी जोखिम भरी हो सकती है।

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नई रिसर्च ने क्यों बदली तस्वीर

इसी पृष्ठभूमि में हाल ही में द लैंसेट में प्रकाशित एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययन को अहम माना जा रहा है। इस समीक्षा से जुड़ी प्रमुख शोधकर्ता आन्या आर्थर्स हैं, जो ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय से जुड़ी हैं। यह अध्ययन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने किसी एक देश या सीमित समूह के आंकड़ों पर भरोसा नहीं किया।

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शोधकर्ताओं ने कुल 43 पूर्व अध्ययनों का विश्लेषण किया। इसे व्यवस्थित समीक्षा और बहुविध अध्ययन-विश्लेषण कहा जाता है, जिसमें अलग अलग जगहों पर किए गए शोध को एक साथ देखा जाता है। मकसद यह समझना था कि क्या गर्भ में पैरासिटामोल के संपर्क में आने वाले बच्चों में बाद के वर्षों में ऑटिज्म, एडीएचडी या बौद्धिक अक्षमता का खतरा सच में बढ़ता है या नहीं।

भाई बहनों वाले अध्ययन क्यों बने आधार

इस समीक्षा की खास बात यह रही कि शोधकर्ताओं ने भाई बहनों की तुलना वाले अध्ययनों को ज्यादा महत्व दिया। ऐसे अध्ययनों में एक ही परिवार के भाई बहनों की तुलना की जाती है, जिनमें से एक की गर्भावस्था के दौरान मां ने पैरासिटामोल लिया और दूसरे की दौरान नहीं लिया।

इस तरीके से आनुवंशिकी, घरेलू माहौल और सामाजिक परिस्थितियों जैसे कारक लगभग समान रहते हैं। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि अगर कोई फर्क है, तो वह दवा की वजह से है या किसी और कारण से।

नतीजे क्या कहते हैं

उच्च गुणवत्ता वाले इन अध्ययनों के विश्लेषण में शोधकर्ताओं को कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला कि गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल लेने से बच्चों में ऑटिज्म, एडीएचडी या बौद्धिक अक्षमता का जोखिम बढ़ता है। यह नतीजा तब भी वही रहा, जब केवल कम पूर्वाग्रह वाले अध्ययनों को देखा गया और उन बच्चों के आंकड़ों को शामिल किया गया जिनकी निगरानी पांच साल या उससे अधिक समय तक की गई थी।

दूसरे शब्दों में कहें तो, जब सबसे भरोसेमंद शोध पद्धतियों का इस्तेमाल किया गया, तो पहले सामने आए डरावने संबंध टिक नहीं पाए।

बुखार का इलाज क्यों जरूरी

डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान तेज बुखार को नजरअंदाज करना खुद में जोखिम भरा हो सकता है। बुखार मां और भ्रूण दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में पैरासिटामोल जैसी दवा, जो लंबे समय से सुरक्षित मानी जाती रही है, एक जरूरी विकल्प बनती है।

विशेषज्ञ यह भी याद दिलाते हैं कि गर्भावस्था में इस्तेमाल की जा सकने वाली दर्द निवारक दवाओं के विकल्प पहले से ही सीमित हैं।

गर्भवतियों के लिए निर्धारित मात्रा सुरक्षित

इस नई वैज्ञानिक समीक्षा के बाद विशेषज्ञों का संदेश साफ है। गर्भावस्था के दौरान दर्द या बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह से और निर्धारित मात्रा में पैरासिटामोल लेना सुरक्षित माना जाता है। डर के कारण जरूरी इलाज से बचना सही नहीं है, लेकिन बिना जरूरत दवा लेना भी उचित नहीं।

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