Explainer : डिजिटल फ्रॉड पीड़ितों को 25 हजार तक मुआवजा देने का प्रस्ताव, जानिये क्या है इसमें खास
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति बैठक में डिजिटल फ्रॉड मुआवजा प्रस्ताव, भुगतान सुरक्षा, मिस सेलिंग और रिकवरी एजेंटों पर सख्ती पर हुई चर्चा
Digital Fraud 25K Proposal : डिजिटल लेन-देन ने आपकी जिंदगी आसान जरूर बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। यूपीआई, गूगल पे, भीम एप, नेट बैंकिंग और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए हजारों रुपए सेकंडों में ट्रांसफर हो जाते हैं, लेकिन इसी रफ्तार का फायदा उठाकर साइबर अपराधी भी लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं।
ऐसे माहौल में भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल फ्रॉड के पीड़ितों को बड़ी राहत देने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के अनुसार, छोटे मूल्य के डिजिटल फ्रॉड मामलों में ग्राहकों को अधिकतम 25 हजार रुपये तक मुआवजा दिया जाएगा।
यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक स्तर पर इस तरह की संरचित मुआवजा व्यवस्था लाने की पहल की गई है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह व्यवस्था क्या है, किन शर्तों पर लागू होगी और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा।
क्यों जरूरी हुआ यह कदम
पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान का दायरा अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक, सब यूपीआई आधारित लेन देन को अपनाए हुए हैं। लेकिन इसी दौरान साइबर फ्रॉड के मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार फिलहाल ये स्थिति है :
- डिजिटल फ्रॉड मामलों में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है।
- करीब 65 प्रतिशत मामलों में ठगी की राशि 50 हजार रुपये से कम होती है।
- बड़ी संख्या में लोग छोटी रकम गंवाकर भी मानसिक और आर्थिक दबाव झेलते हैं
इसी पृष्ठभूमि में आरबीआई ने छोटे मूल्य की ठगी के मामलों में त्वरित राहत देने के लिए मुआवजा ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव रखा है।
मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में हुआ फैसला
हर दो महीने में होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में इस बार सिर्फ ब्याज दरों पर ही नहीं, बल्कि ग्राहकों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया। बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। तीन दिन चली बैठक मे रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा गया। डिजिटल भुगतान सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दिशा निर्देश प्रस्तावित किए गए।
डिजिटल फ्रॉड पीड़ितों के लिए मुआवजा व्यवस्था का खाका पेश किया गया।
मुआवजा कैसे काम करेगा : सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर आपको कितना और कैसे मुआवजा मिलेगा।
अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये : मुआवजे की ऊपरी सीमा 25 हजार रुपये तय की गई है। यानी इससे अधिक राशि का भुगतान नहीं होगा।
85 प्रतिशत का नियम : पीड़ित को नुकसान की 85 प्रतिशत राशि या 25 हजार रुपये, जो भी कम हो, दिया जाएगा।
पूरे मामले को कुछ ऐसे समझिये :
यदि आपके साथ 10 हजार रुपये का फ्रॉड हुआ है तो 85 प्रतिशत के हिसाब से आपको 8500 रुपये मिल सकते हैं। यदि 30 हजार रुपये की ठगी हुई है तो 85 प्रतिशत राशि 25,500 रुपये बनती है, लेकिन अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये है, इसलिए आपको 25 हजार रुपये मिलेंगे। यदि 1 लाख रुपये की ठगी हुई है तो 85 प्रतिशत राशि 85 हजार रुपये बनती है, लेकिन आपको 25 हजार रुपये ही मिलेंगे क्योंकि यही अधिकतम सीमा है। स्पष्ट है कि यह व्यवस्था छोटे और मध्यम स्तर के नुकसान की भरपाई पर केंद्रित है।
क्या ग्राहक की गलती पर भी मिलेगा मुआवजा
डिजिटल फ्रॉड के अधिकतर मामलों में ओटीपी साझा करना, फर्जी लिंक पर क्लिक करना या कॉल पर बैंक विवरण देना जैसी घटनाएं शामिल होती हैं। ऐसे मामलों में पहले अक्सर ग्राहकों को पूरी जिम्मेदारी उठानी पड़ती थी।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार :
- यदि आपने गलती से ओटीपी साझा कर दिया हो
- यदि अनजाने में फिशिंग लिंक पर क्लिक कर दिया हो
- यदि सोशल इंजीनियरिंग के जरिए आपसे जानकारी ली गई हो
तब भी आप मुआवजे के हकदार हो सकते हैं, बशर्ते मामला वास्तविक डिजिटल फ्रॉड का हो और समय पर रिपोर्ट किया गया हो।
एक बार का लाभ : यह मुआवजा सुविधा प्रत्येक ग्राहक को एक बार ही मिलेगी। यानी इसे नियमित बीमा योजना की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि एक सुरक्षा कवच के रूप में समझना चाहिए, जो गंभीर स्थिति में राहत देगा।
मुआवजा कहां से आएगा : रिपोर्टों के अनुसार मुआवजा आरबीआई के डिपोजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड से दिए जाने का प्रस्ताव है। यह फंड निष्क्रिय जमा खातों और अन्य स्रोतों से एकत्र राशि से बनाया जाता है और इसका उद्देश्य ग्राहकों के हितों की रक्षा करना है।
रिपोर्टिंग की अहमियत : मुआवजा पाने के लिए समय पर शिकायत दर्ज करना बेहद जरूरी होगा।
- फ्रॉड का पता चलते ही बैंक को सूचित करना
- साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करना
- लेन देन के विवरण सुरक्षित रखना
ये सभी कदम आपकी पात्रता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सिर्फ मुआवजा नहीं, व्यापक सुधार : मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में सिर्फ डिजिटल फ्रॉड पर ही नहीं, बल्कि बैंकिंग तंत्र की अन्य कमजोरियों पर भी ध्यान दिया गया।
मिस सेलिंग पर सख्ती : अक्सर देखा गया है कि बैंकों द्वारा थर्ड पार्टी प्रोडक्ट जैसे बीमा या निवेश योजनाएं ग्राहकों पर थोप दी जाती हैं। नई गाइडलाइंस के अनुसार
- ग्राहक की जरूरत के अनुरूप ही उत्पाद बेचे जाएंगे।
- पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
- गलत जानकारी देकर उत्पाद बेचने पर कार्रवाई होगी।
इससे आम उपभोक्ता को अनावश्यक वित्तीय बोझ से राहत मिल सकती है।
रिकवरी एजेंटों पर नियंत्रण : लोन डिफॉल्ट की स्थिति में रिकवरी एजेंटों की मनमानी और दबाव की शिकायतें लंबे समय से आती रही हैं।
ये है प्रस्ताव :
- बैंक और एनबीएफसी के नियमों को एक समान किया जाएगा।
- रिकवरी एजेंटों के आचरण पर सख्त दिशा निर्देश बनाए जाएंगे।
- जवाबदेही तय की जाएगी।
इससे ग्राहकों को मानसिक उत्पीड़न से राहत मिलने की उम्मीद है।
सीनियर सिटीजन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा : वरिष्ठ नागरिक अक्सर साइबर फ्रॉड का आसान निशाना बन जाते हैं। बैठक में सुझाव दिया गया कि डिजिटल भुगतान में फिंगर प्रिंट आधारित सत्यापन, वॉयस वेरिफिकेशन, अतिरिक्त सुरक्षा स्तर जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएं, ताकि उनकी जमा पूंजी सुरक्षित रह सके।
क्या यह पर्याप्त है
विशेषज्ञों का मानना है कि 25 हजार रुपये की सीमा छोटे मूल्य के फ्रॉड के लिए उपयोगी है, लेकिन बड़े मामलों में यह आंशिक राहत ही दे पाएगी। फिर भी यह कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
- इससे डिजिटल लेन देन में विश्वास बढ़ेगा।
- बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं पर जिम्मेदारी तय होगी।
- ग्राहक सुरक्षा को नीतिगत प्राथमिकता मिलेगी।
आपको क्या करना चाहिए
- ओटीपी कभी साझा न करें।
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- बैंक की आधिकारिक ऐप और वेबसाइट का ही उपयोग करें।
- मोबाइल और ईमेल पर दो स्तरीय सुरक्षा सक्षम रखें।
- डिजिटल सुविधा का लाभ तभी सुरक्षित है जब आप सजग रहें।
फिलहाल यह प्रस्तावित ढांचा है। अंतिम दिशा निर्देश और कार्यान्वयन प्रक्रिया जारी की जानी बाकी है। जब यह लागू होगा, तब बैंक और भुगतान कंपनियों को इसके अनुरूप अपनी प्रणाली में बदलाव करने होंगे। यदि इन फैसलों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो आने वाले समय में डिजिटल बैंकिंग अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकती है।

