Explainer : सिटी ब्यूटीफुल को नंबर वन बनाने की तैयारी, क्या बच्चे बनेंगे गेम चेंजर, जानिये स्कूलों से कैसे बदलेगी स्वच्छता की सोच
Swachh School Ranking : बदलाव की शुरुआत स्कूलों से जहां आदतें बनती हैं
Swachh School Ranking : किसी शहर को स्वच्छ बनाना हो, तो सवाल यह नहीं होता कि सफाई कितनी बार हुई, बल्कि यह होता है कि साफ रहने की आदत कितनी गहरी है। सड़कें और पार्क साफ किए जा सकते हैं, लेकिन सोच तभी बदलती है जब आदत बचपन में बने।
इसीलिए इस बार चंडीगढ़ में स्वच्छता की शुरुआत किसी अभियान या जुर्माने से नहीं, बल्कि स्कूल की कक्षा से की जा रही है।
शहर को नंबर वन बनाने की इस नई तैयारी में बच्चे केंद्र में हैं। विचार साफ है। अगर बच्चा स्कूल में साफ रहना सीखता है, तो वही आदत घर जाती है और फिर पूरे समाज में फैलती है। इसी सोच के साथ नगर निगम चंडीगढ़ ने ‘स्वच्छ स्कूल रैंकिंग इनिशिएटिव’ शुरू किया है।
यह पहल 3 से 15 फरवरी 2026 तक चलेगी और इसमें चंडीगढ़ के सरकारी और निजी स्कूल शामिल होंगे। मकसद स्कूलों को रैंक देना भर नहीं, बल्कि स्वच्छता को बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना है। सवाल अब यही है कि क्या ये बच्चे सच में सिटी ब्यूटीफुल को नंबर वन बनाने के गेम चेंजर बन पाएंगे।
स्वच्छता की सोच बदलने की जरूरत क्यों पड़ी
अब तक स्वच्छता को अक्सर एक औपचारिक गतिविधि के रूप में देखा गया। कहीं सफाई सप्ताह, कहीं पोस्टर प्रतियोगिता, कहीं भाषण। इन प्रयासों से जागरूकता तो बढ़ी, लेकिन व्यवहार में बड़ा बदलाव कम दिखा।
हकीकत यह रही कि कई स्कूलों में
- कचरा अलग अलग डालने की व्यवस्था तो बनी, पर आदत नहीं बनी
- शौचालय बने, लेकिन नियमित सफाई और रखरखाव चुनौती रहा
- प्लास्टिक के विकल्प मौजूद होने के बावजूद इस्तेमाल कम नहीं हुआ
- बच्चों की भूमिका सीमित रही, जिम्मेदारी नहीं बनी
‘स्वच्छ स्कूल रैंकिंग इनिशिएटिव’ इसी अंतर को पाटने की कोशिश है। यह पहल बताती है कि स्वच्छता दिखावे से नहीं, रोजमर्रा के व्यवहार से आती है।
औपचारिक शुरुआत और मंच का संदेश
इस पहल का औपचारिक शुभारंभ चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने सेक्टर 38 स्थित रानी लक्ष्मी बाई महिला भवन में आयोजित ‘स्वच्छ स्कूल ओरिएंटेशन प्रोग्राम’ के दौरान किया।
कार्यक्रम में शिक्षा सचिव प्रेरणा पुरी, नगर निगम आयुक्त अमित कुमार, विशेष आयुक्त प्रदीप कुमार, डिप्टी मेयर सुमन देवी, एरिया काउंसलर योगेश धींगरा, पार्षद, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में स्कूलों के प्रधानाचार्य व शिक्षक शामिल हुए।
मेयर का फोकस | बच्चे क्यों हैं केंद्र में
मेयर सौरभ जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि स्कूल किसी भी समाज की बुनियाद होते हैं। अगर बच्चों में बचपन से स्वच्छता और जिम्मेदारी का भाव आ जाए, तो वही संस्कार घर और समाज तक पहुंचते हैं।
उनके अनुसार, यह पहल केवल स्कूल की इमारतों को देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के व्यवहार और सोच को परखने का प्रयास है। यही बच्चे आने वाले वर्षों में सिटी ब्यूटीफुल को नंबर वन बनाने के असली गेम चेंजर बन सकते हैं।
शिक्षा और स्वच्छता का सीधा रिश्ता
शिक्षा सचिव प्रेरणा पुरी ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ और सुरक्षित स्कूल वातावरण का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यह पहल शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता को एक साथ जोड़ती है। इको क्लब, आरआरआर सेंटर और वर्षा जल संचयन जैसे प्रयास बच्चों को केवल जागरूक नहीं करते, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।
जानिये क्या है ‘स्वच्छ स्कूल रैंकिंग इनिशिएटिव’
यह एक शहरव्यापी मूल्यांकन और मार्गदर्शन कार्यक्रम है, जिसके तहत स्कूलों की स्वच्छता, हाइजीन और पर्यावरणीय व्यवहार को तय मानकों पर परखा जाएगा।
इसका उद्देश्य स्कूलों को डराना या केवल प्रतिस्पर्धा में झोंकना नहीं है, बल्कि
- स्कूलों को साफ मापदंड देना
- कमियों की पहचान कर सुधार का रास्ता दिखाना
- और अच्छी पहल को पूरे शहर में दोहराना
यह पहल स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के दिशा निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है।
रैंकिंग क्यों जरूरी है
नगर निगम आयुक्त अमित कुमार के अनुसार, रैंकिंग इस पहल का साधन है, लक्ष्य नहीं।
रैंकिंग से
- स्कूलों को अपनी स्थिति समझने में मदद मिलेगी
- अच्छे प्रयासों को पहचान मिलेगी
- और दूसरे स्कूलों को सीखने का अवसर मिलेगा
इससे स्वच्छता प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी बनेगी।
किन आधारों पर होगा स्कूलों का आकलन
स्कूलों का मूल्यांकन व्यापक और व्यवहारिक मानकों पर किया जाएगा। इनमें शामिल हैं
- परिसर की दृश्य स्वच्छता
- कचरे का स्रोत पर पृथक्करण
- डस्टबिन की उपलब्धता और उनका सही उपयोग
- स्कूल परिसर में ही कचरे का निपटान और कंपोस्टिंग
- शौचालयों की स्वच्छता, पानी और नियमित रखरखाव
- सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियां
- आरआरआर सिद्धांत यानी रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल
- आरआरआर सेंटर की सक्रियता
- इको क्लब की भागीदारी
- पर्यावरणीय स्थिरता के प्रयास
- सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रभावी रोक
मूल्यांकन में फोटोग्राफिक साक्ष्य और जमीनी स्तर पर दिखने वाला काम खास महत्व रखेगा।
बच्चों की भूमिका क्यों अहम मानी जा रही है
इस पहल का सबसे मजबूत आधार बच्चे हैं। जब बच्चा खुद कचरा अलग डालता है, पानी बचाता है और प्लास्टिक से दूरी बनाता है, तो वही व्यवहार घर तक पहुंचता है।
नगर निगम और शिक्षा विभाग का मानना है कि बच्चों के जरिए किया गया बदलाव सबसे टिकाऊ होता है और लंबे समय तक असर दिखाता है।
स्कूलों के लिए क्या है रास्ता
स्कूल इस पहल में क्यूआर कोड या ऑनलाइन पंजीकरण के माध्यम से शामिल हो सकते हैं। तय अवधि में उनका आकलन किया जाएगा।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को अलग अलग श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। उनकी सफल पहल को शहर स्तर पर साझा किया जाएगा, ताकि दूसरे स्कूल भी उनसे सीख सकें।
आरआरआर और इको क्लब की अहमियत
आरआरआर यानी रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल को इस पहल की रीढ़ माना गया है। इसका उद्देश्य कचरे को समस्या नहीं, बल्कि संसाधन के रूप में देखना है। इको क्लब बच्चों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का मंच बनेंगे, जहां वे पौधारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता से जुड़े व्यावहारिक प्रयोग कर सकेंगे।
जनप्रतिनिधियों का भरोसा
एरिया काउंसलर योगेश धिंगरा ने कहा कि स्कूल प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी यह दिखाती है कि चंडीगढ़ इस बदलाव के लिए तैयार है। प्रशासन, जनप्रतिनिधि और शिक्षक मिलकर यदि काम करें, तो सिटी ब्यूटीफुल स्वच्छता और स्थिरता का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है। ‘स्वच्छ स्कूल रैंकिंग इनिशिएटिव’ का असली मकसद रैंकिंग तालिका नहीं है। असली मकसद वह सोच है, जो बच्चों के साथ बड़ी होती है।

