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Explainer : फोन खोया है ? परेशान मत होइए, जाने CEIR कैसे है उम्मीद की किरण

सरकार की CEIR वेबसाइट पर लाखों शिकायतें दर्ज, हजारों गुम मोबाइल उनके असली मालिकों तक पहुंचे

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Recover Your Lost Phone : अचानक जेब में हाथ गया और एक पल के लिए दिल जैसे रुक सा गया। मोबाइल फोन नहीं था। पहले लगा कि कहीं रखकर भूल गया होगा, फिर खुद को समझाया कि शायद थोड़ी देर में मिल जाएगा। लेकिन कुछ ही पलों में सच साफ हो गया। फोन गुम हो चुका था।

उस एक पल में सिर्फ मोबाइल नहीं गया था। बैंकिंग एप, यूपीआई, जरूरी नंबर, बच्चों की तस्वीरें और पूरी डिजिटल जिंदगी जैसे एक साथ हाथ से निकल गई। दिमाग में बस एक ही सवाल था कि अब क्या होगा। ऐसे हालात में ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं और मान लेते हैं कि फोन अब कभी वापस नहीं मिलेगा।

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लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि इसी परेशानी में देशभर के लाखों लोग एक सरकारी व्यवस्था तक पहुंच रहे हैं, जिसकी मदद से हजारों मोबाइल फोन उनके असली मालिकों तक वापस भी पहुंचे हैं।

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यह व्यवस्था है Central Equipment Identity Register, जिसे CEIR कहा जाता है। यह केंद्र सरकार की Sanchar Saathi पहल के तहत काम करती है।

CEIR क्या है और यह कैसे काम करता है

हर मोबाइल फोन में 15 अंकों का एक यूनिक पहचान नंबर होता है, जिसे आईएमईआई कहा जाता है।

CEIR इसी आईएमईआई नंबर के आधार पर गुम या चोरी हुए मोबाइल फोन को नेटवर्क पर पहचानता है।

जब कोई व्यक्ति ceir.gov.in पोर्टल पर मोबाइल गुम या चोरी होने की शिकायत दर्ज करता है, तो वह फोन देशभर के सभी मोबाइल नेटवर्क पर तुरंत ब्लॉक कर दिया जाता है। नया सिम डालने पर भी उस फोन से कॉल, इंटरनेट या ओटीपी काम नहीं करता।

सबसे अहम बात यह है कि यदि वही फोन कहीं दोबारा नेटवर्क पर सक्रिय होता है, तो सिस्टम अपने आप पुलिस और टेलीकॉम कंपनियों को संकेत देता है। यहीं से फोन को ट्रेस करने और रिकवरी की प्रक्रिया शुरू होती है।

मोबाइल गुम होते ही क्या करें

मोबाइल गुम होने पर सबसे बड़ी गलती होती है इंतजार करना।

असल में तीन काम तुरंत करने चाहिए।

  • सबसे पहले फोन का आईएमईआई नंबर निकालें, जो फोन के बॉक्स, बिल या गूगल अकाउंट से मिल सकता है
  • नजदीकी पुलिस थाने में एफआईआर या डीडीआर दर्ज कराएं
  • बिना देरी किए ceir.gov.in वेबसाइट पर जाकर Block Lost Stolen Mobile विकल्प से शिकायत दर्ज करें

CEIR पोर्टल पर शिकायत कैसे दर्ज होती है

CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते समय मोबाइल का आईएमईआई नंबर, फोन गुम होने की तारीख, पुलिस शिकायत का विवरण और पहचान पत्र अपलोड करना होता है।  ओटीपी सत्यापन के बाद शिकायत दर्ज हो जाती है और एक Request ID मिलती है। यही रिक्वेस्ट आईडी आगे की पूरी प्रक्रिया की सबसे अहम कड़ी होती है।

शिकायत के बाद फोन का क्या होता है

शिकायत दर्ज होते ही फोन से कॉल, इंटरनेट और ओटीपी पूरी तरह बंद हो जाते हैं। चोर या किसी अन्य व्यक्ति के लिए वह मोबाइल पूरी तरह बेकार हो जाता है। इसके साथ ही वह फोन पुलिस की तकनीकी निगरानी में आ जाता है।

जैसे ही मोबाइल किसी नेटवर्क पर दोबारा सक्रिय होता है, उसकी जानकारी सिस्टम के जरिए संबंधित एजेंसियों तक पहुंच जाती है।

देशभर की तस्वीर क्या कहती है

सरकारी समेकित आंकड़ों के अनुसार अब तक

  1. 43,17,280 मोबाइल फोन गुम या चोरी होने की शिकायतें दर्ज की गईं
  2. इन शिकायतों के आधार पर मोबाइल फोन ब्लॉक किए गए
  3. 26,76,571 मोबाइल ट्रेस किए जा सके
  4. 7,56,714 मोबाइल फोन रिकवर होकर असली मालिकों तक पहुंचे

इस तरह देश में कुल मोबाइल रिकवरी प्रतिशत 28.27 रहा। यानी हर चार शिकायतों में से केवल एक का ही अंत मोबाइल वापसी के रूप में हो सका।

उत्तर भारत के राज्यों की स्थिति

राष्ट्रीय औसत 28.27 प्रतिशत के मुकाबले उत्तर भारत के इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की स्थिति कमजोर रही। इन क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हुईं, मोबाइल ब्लॉक और ट्रेस भी किए गए, लेकिन रिकवरी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई।

पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल और उत्तराखंड में क्या हुआ

राष्ट्रीय औसत 28.27 प्रतिशत के मुकाबले उत्तर भारत के इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की स्थिति कमजोर रही। इन क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हुईं, मोबाइल ब्लॉक और ट्रेस भी किए गए, लेकिन रिकवरी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई। सीईआईआर के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर भारत के राज्यों में मोबाइल रिकवरी की तस्वीर एक जैसी नहीं है।

हरियाणा में कुल 73,603 मोबाइल फोन ब्लॉक किए गए। इनमें से 46,536 मोबाइल ट्रेस तो हो गए, लेकिन 13,811 फोन ही रिकवर होकर असली मालिकों तक पहुंच पाए। इस तरह राज्य में मोबाइल रिकवरी दर 29.68 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत के आसपास मानी जा सकती है।

हिमाचल प्रदेश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर नजर आती है। यहां 20,606 मोबाइल फोन ब्लॉक किए गए, जिनमें से 14,612 मोबाइल ट्रेस किए गए। इनमें से 4,950 फोन वापस मिले, जिससे मोबाइल रिकवरी प्रतिशत 33.88 दर्ज किया गया। पहाड़ी राज्य होने के बावजूद यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से ऊपर रहा।

पंजाब में तस्वीर चिंताजनक रही। राज्य में 1,14,165 मोबाइल फोन ब्लॉक किए गए और 80,680 मोबाइल ट्रेस भी हुए, लेकिन इसके बावजूद रिकवरी प्रतिशत केवल 16.58 रहा। यानी बड़ी संख्या में फोन सिस्टम में चिन्हित होने के बाद भी असली मालिकों तक नहीं लौट पाए।

उत्तराखंड में भी मोबाइल रिकवरी की रफ्तार हिमाचल के मुकाबले बेहतर रही। राज्य में 26,560 मोबाइल फोन ब्लॉक किए गए, जिनमें से 16,767 मोबाइल ट्रेस किए गए और 5,039 फोन बरामद हुए। यहां मोबाइल रिकवरी प्रतिशत 33.88 दर्ज किया गया।

चंडीगढ़ में कुल 2,646 मोबाइल फोन ब्लॉक किए गए। इनमें से 1,711 मोबाइल ट्रेस हुए, लेकिन केवल 301 मोबाइल फोन ही वापस मिल सके। इस तरह यहां मोबाइल रिकवरी प्रतिशत 17.59 रहा, जो यह संकेत देता है कि सीमित क्षेत्र होने के बावजूद रिकवरी प्रक्रिया कमजोर बनी हुई है।

फोन मिल जाए तो क्या करना चाहिए

अगर आपका मोबाइल फोन वापस मिल जाए, तो CEIR पोर्टल पर जाकर Unblock Found Mobile विकल्प चुनना होता है। Request ID, आईएमईआई नंबर और ओटीपी सत्यापन के बाद फोन दोबारा नेटवर्क पर वैध रूप से सक्रिय हो जाता है।

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