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EXPLAINER: छह महीने का ब्रिज कोर्स कैसे बदल रहा है स्कूल से बाहर बच्चों का भविष्य?

Right to Education Act: बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए बने ऐतिहासिक कानून शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सभी बच्चों को कम से कम प्राथमिक शिक्षा अवश्य मिले। स्कूल से बाहर...

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Right to Education Act: बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए बने ऐतिहासिक कानून शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सभी बच्चों को कम से कम प्राथमिक शिक्षा अवश्य मिले। स्कूल से बाहर बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) का एक प्रमुख घटक है, जिसका लक्ष्य RTE अधिनियम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 (NEP-2020) के प्रावधानों के अनुरूप सभी आउट-ऑफ-स्कूल चिल्ड्रन को औपचारिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।

स्कूल से बाहर बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप कक्षा में प्रवेश दिलाने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए 7 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को छह माह का गैर-आवासीय विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए राज्य भर में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सर्वेक्षण कराया जाता है।

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स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान के लिए सर्वे कैसे किया जाता है?

जिला परियोजना समन्वयक (समग्र शिक्षा) का कार्यालय, जिले की आवश्यकता और निर्धारित मानकों के अनुसार छह माह की अवधि के लिए शिक्षा स्वयंसेवकों (Education Volunteers) को नियुक्त करता है। ये स्वयंसेवक स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान/खोज के लिए सर्वे करते हैं। इसके अलावा, क्षेत्र के निवासी भी अपने आसपास किसी स्कूल से बाहर बच्चे की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे सकते हैं।

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विशेष प्रशिक्षण का उद्देश्य क्या है?

RTE अधिनियम–2009 के प्रावधानों के अनुसार, स्कूल से बाहर बच्चों को औपचारिक स्कूलों में उनकी आयु के अनुरूप कक्षा में शामिल करने से पहले उन्हें समान स्तर पर लाने के लिए विशेष प्रशिक्षण आवश्यक है। यह कार्यक्रम उन बच्चों के लिए ब्रिज कोर्स के रूप में कार्य करता है, जिन्होंने कभी स्कूल नहीं देखा या जो बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम कैसे काम करता है?

स्कूल से बाहर बच्चों को उनकी आयु के आधार पर ब्रिज कोर्स में नामांकित किया जाता है। कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें नियमित स्कूल में उनकी आयु के अनुरूप कक्षा में दाखिला दिया जाता है। 16 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे भी छह माह का प्रशिक्षण लेकर हरियाणा ओपन स्कूलिंग सिस्टम के माध्यम से कक्षा 10वीं की परीक्षा दे सकते हैं। परीक्षा पूरी होने तक उन्हें नजदीकी सरकारी स्कूल में भेजा जाएगा। ऐसे प्रत्येक छात्र को 2,000 की वित्तीय सहायता भी मिलेगी।

सर्वे में चिन्हित बच्चे पढ़ाई के लिए कहाँ जाते हैं?

चिन्हित बच्चों के लिए जिले में उनकी संख्या के अनुसार विशेष प्रशिक्षण केंद्र (STC) स्थापित किए जाते हैं, जहाँ वे छह माह का प्रशिक्षण लेते हैं। साथ ही, उन्हें नजदीकी सरकारी स्कूल में भी नामांकित किया जाता है।

क्या दस्तावेज न होने पर बच्चों को प्रवेश से वंचित किया जा सकता है?

सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आधार कार्ड/पीपीपी (PPP) या बैंक खाता न होने के कारण किसी भी बच्चे को प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा। यदि ऐसा किया जाता है तो संबंधित स्कूल प्रमुख/कक्षा प्रभारी/शिक्षक के खिलाफ सक्षम प्राधिकारी द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बच्चे के प्रवेश के बाद आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बनवाने की संयुक्त जिम्मेदारी स्कूल प्रमुख और कक्षा प्रभारी की होगी।

प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को क्या सुविधाएं मिलती हैं?

बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जाती है और स्टडी किट उपलब्ध कराई जाती है। STC में मिड-डे मील भी दिया जाता है। इसके अलावा, केंद्र/राज्य सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी उन्हें मिलता है।

एक विशेष प्रशिक्षण केंद्र में कितने बच्चे पढ़ सकते हैं?

एक STC में न्यूनतम 15 और अधिकतम 35 बच्चे पढ़ सकते हैं। प्रशिक्षण का समय सरकारी स्कूलों के समान होगा—कार्यदिवसों में प्रतिदिन छह घंटे। विशेष परिस्थितियों में छोटे समूह/माइक्रो समूह/ऑनलाइन माध्यम से भी प्रशिक्षण दिया जा सकता है और समय में आवश्यक बदलाव किया जा सकता है।

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