Explainer : पेट में रहने वाले बैक्टीरिया : दोस्त कौन, दुश्मन कौन ? जानिए ये आपकी सेहत का खेल कैसे बदलते हैं
Good vs Bad Bacteria : पेट के बैक्टीरिया आपकी सेहत कैसे बदलते हैं, बता रहे हैं पीजीआई के डॉ. विशाल शर्मा
Good vs Bad Bacteria : हमारे शरीर के भीतर एक ऐसी दुनिया है, जिसे हम देख नहीं सकते, लेकिन जो हमारी सेहत को रोज प्रभावित करती है। यह दुनिया हमारे पेट में रहने वाले बैक्टीरिया की है।
बैक्टीरिया का नाम सुनते ही अक्सर बीमारी का ख्याल आता है, लेकिन सच्चाई यह है कि पेट में रहने वाले ज्यादातर बैक्टीरिया हमारे दोस्त होते हैं। यही बैक्टीरिया तय करते हैं कि हमारा पाचन कैसा रहेगा, हम कितने ऊर्जावान महसूस करेंगे और बीमारियों से लड़ने की हमारी क्षमता कितनी मजबूत होगी।
पिछले कुछ समय से प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स को लेकर काफी चर्चा हो रही है। प्रोबायोटिक्स को आम भाषा में अच्छे बैक्टीरिया कहा जा सकता है, जबकि प्रीबायोटिक्स ऐसे फाइबर होते हैं, जो इन अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करते हैं। ये दोनों मिलकर पेट में बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
पेट में रहने वाले बैक्टीरिया, प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स की भूमिका पर विस्तार से जानकारी डॉ. विशाल शर्मा, एडीशनल प्रोफेसर, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग, पीजीआई चंडीगढ़ ने साझा की है।
पेट में बैक्टीरिया क्यों रहते हैं
मानव शरीर की आंतों में करोड़ों बैक्टीरिया रहते हैं। इन सभी को मिलाकर ‘गट माइक्रोयोम’ कहा जाता है। ये बैक्टीरिया जन्म के कुछ समय बाद ही हमारे शरीर में बसने लगते हैं और जीवनभर हमारे साथ रहते हैं।
इनका मुख्य काम भोजन को पचाने में मदद करना, ऐसे पोषक तत्व तैयार करना जो शरीर खुद नहीं बना सकता, और आंतों को स्वस्थ बनाए रखना है। जब अच्छे और खराब बैक्टीरिया के बीच संतुलन बना रहता है, तो पेट सही तरीके से काम करता है।
अच्छे बैक्टीरिया कैसे होते हैं दोस्त![]()
अच्छे बैक्टीरिया हमारे शरीर के लिए कई तरह से मददगार होते हैं। ये भोजन को छोटे हिस्सों में तोड़कर पचाने में मदद करते हैं, जिससे शरीर को सही पोषण मिल पाता है। ये आंतों की अंदरूनी परत को मजबूत रखते हैं, ताकि हानिकारक तत्व शरीर में प्रवेश न कर सकें।
इसके अलावा, अच्छे बैक्टीरिया रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि जब पेट ठीक रहता है, तो व्यक्ति बार बार बीमार नहीं पड़ता और खुद को हल्का व सक्रिय महसूस करता है।
कब बन जाते हैं बैक्टीरिया दुश्मन![]()
समस्या तब शुरू होती है, जब पेट में अच्छे बैक्टीरिया कम और खराब बैक्टीरिया ज्यादा हो जाते हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में डिस्बायोसिस कहा जाता है।
डिस्बायोसिस के पीछे कई कारण हो सकते हैं। लगातार बाहर का तला-भुना और प्रोसेस्ड खाना, फाइबर की कमी, अधिक मीठा, अनियमित जीवनशैली, लगातार तनाव, धूम्रपान और शराब इसके प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, बिना जरूरत एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन भी अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाता है।
जब खराब बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं, तो पेट दर्द, गैस, सूजन, दस्त या कब्ज जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे, तो अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
प्रोबायोटिक्स क्या करते हैं
प्रोबायोटिक्स ऐसे जीवित अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जिन्हें बाहर से शरीर में दिया जाता है। इनका उद्देश्य पेट में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाना और खराब बैक्टीरिया को काबू में रखना होता है।
प्रोबायोटिक्स पेट के एसिड को पार कर आंतों तक पहुंचते हैं और वहां जाकर पेट के माहौल को बेहतर बनाते हैं। हालांकि यह समझना जरूरी है कि प्रोबायोटिक्स कोई स्थायी समाधान नहीं हैं। जैसे ही इनका सेवन बंद किया जाता है, इनका असर धीरे धीरे कम हो जाता है।
क्या हर किसी को प्रोबायोटिक की जरूरत है
यह सबसे आम सवाल है। ज्यादातर स्वस्थ लोगों को प्रोबायोटिक सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती। अगर रोजमर्रा के भोजन में पर्याप्त फाइबर, सब्जियां, फल और दालें शामिल हों, तो पेट के अच्छे बैक्टीरिया खुद संतुलन बनाए रखते हैं। हालांकि कुछ खास परिस्थितियों में प्रोबायोटिक्स फायदेमंद हो सकते हैं, जैसे एंटीबायोटिक दवाएं लेने के बाद पेट खराब होना, यात्रा के दौरान दस्त या लंबे समय से पेट से जुड़ी बीमारी होना। ऐसे मामलों में भी प्रोबायोटिक डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।
प्रीबायोटिक्स क्या होते हैं
अगर प्रोबायोटिक्स अच्छे बैक्टीरिया हैं, तो प्रीबायोटिक्स उनका भोजन हैं। प्रीबायोटिक्स ऐसे फाइबर होते हैं, जो हमारे शरीर में पचते नहीं, बल्कि सीधे आंतों में पहुंचकर अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ने में मदद करते हैं।
सीधी भाषा में कहें, तो अच्छे बैक्टीरिया को जिंदा और मजबूत रखने के लिए उन्हें सही भोजन देना जरूरी है, और यही काम प्रीबायोटिक्स करते हैं।
खाने से कैसे बढ़ाएं अच्छे बैक्टीरिया![]()
अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है सही भोजन। प्याज, लहसुन, कच्चे केले, सेब, ओट्स, हरी सब्जियां और दालें फाइबर से भरपूर होती हैं और पेट के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं।
दही और कांजी जैसे पारंपरिक फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ भी पेट की सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं, बशर्ते इन्हें संतुलित मात्रा में लिया जाए।
ज्यादा फाइबर या प्रोबायोटिक से नुकसान
हर चीज की तरह यहां भी संतुलन जरूरी है। बहुत ज्यादा फाइबर या प्रीबायोटिक्स लेने से पेट फूल सकता है और गैस बन सकती है। प्रोबायोटिक्स आमतौर पर सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन गंभीर रूप से बीमार लोगों में इनके नुकसान के दुर्लभ मामले सामने आए हैं।
डॉ. विशाल शर्मा के अनुवास पेट में रहने वाले बैक्टीरिया न पूरी तरह दुश्मन हैं और न ही सभी दोस्त। सही खानपान और जीवनशैली से अच्छे बैक्टीरिया को मजबूत किया जा सकता है और खराब बैक्टीरिया को काबू में रखा जा सकता है। घर का संतुलित भोजन, फाइबर से भरपूर डाइट, कम तनाव और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह यही पेट की सेहत को बेहतर रखने का सबसे भरोसेमंद तरीका है।

