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Explainer : गहनों की शोभा के बाद अब गाड़ियों की ताकत बनी चांदी, जानिए कैसे बदल रही चांदी की कहानी

भारत में चांदी 2.20 लाख रुपये प्रति किलो पहुंची। EV और सौर ऊर्जा की मांग से यह भविष्य की ‘स्ट्रैटेजिक मेटल’ बन रही है।

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EV revolution and silver demand : कभी त्योहारों और शादियों में गहनों की शोभा बढ़ाने वाली चांदी आज तकनीक और ऊर्जा की दुनिया में नई ऊंचाइयां छू रही है। जो धातु कभी तिजोरियों में बंद रहती थी, अब कारों के इंजनों और सोलर पैनलों के भीतर दौड़ रही है। साल 2025 में जिसने निवेशकों को हैरान कर दिया था, वही चांदी अब एक बार फिर सुर्खियों में है।

24 दिसंबर 2025 को इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार चांदी का भाव बढ़कर 2 लाख 20 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। महज एक साल पहले यही चांदी 90 हजार रुपये प्रति किलो के आसपास थी। यानि एक साल में 130 प्रतिशत से ज्यादा का मल्टीबैगर रिटर्न।

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सोने की चमक के आगे हमेशा पीछे मानी जाने वाली इस धातु ने अब बाजार में अपनी नई पहचान बना ली है।
गहनों की धातु से लेकर भविष्य की तकनीक की धातु बनने तक चांदी का यह सफर असाधारण रहा है।

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2025 का साल जब चांदी ने निवेशकों को चौंका दिया

साल 2025 चांदी के निवेशकों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। शुरुआत में यह 90,500 रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी, जबकि दिसंबर तक यह 2 लाख 20 हजार रुपये प्रति किलो पार कर गई। इस दौरान इसमें 1,29,000 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो लगभग 130 प्रतिशत रिटर्न के बराबर है।  इतना शानदार रिटर्न न शेयर बाजार ने दिया, न सोने ने। इसी वजह से 2025 के अंत तक निवेशकों का झुकाव तेजी से सिल्वर मार्केट की ओर बढ़ गया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह बढ़ोतरी जारी रहेगी या मुनाफावसूली का दौर शुरू होगा।

सोने से आगे निकल गई चांदी

जहां सोने की कीमतें 2025 में करीब 60 प्रतिशत बढ़ीं, वहीं चांदी ने 130 प्रतिशत की छलांग लगाई। इस प्रदर्शन ने पारंपरिक निवेश की धारणा को पूरी तरह बदल दिया। एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर चांदी ने दिसंबर के तीसरे सप्ताह में 8 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त दर्ज की और 2,08,603 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। दिल्ली सर्राफा बाजार में थोड़ी मुनाफावसूली के बाद यह 2,04,100 रुपये प्रति किलो पर आ गई, लेकिन बाजार की धारणा अब भी तेजी की ओर झुकी हुई है।

क्यों बढ़ रही है चांदी की मांग

पीएल कैपिटल की रिपोर्ट बताती है कि चांदी की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह है औद्योगिक मांग में जबरदस्त उछाल। अब यह धातु सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों का अहम हिस्सा बन चुकी है।

इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है :

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) में
  • सौर ऊर्जा (Solar Panels) में
  • बैटरी और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी में
  • मोबाइल फोन और 5जी नेटवर्क में
  • मेडिकल डिवाइस और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Energy Storage Systems) में इन सेक्टरों की तेज़ी ने चांदी की मांग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है।

ईवी क्रांति ने बदल दी चांदी की कहानी

दुनिया अब तेजी से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) की ओर बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, 2030 तक हर तीन में से एक नई गाड़ी इलेक्ट्रिक होगी। इसी बदलाव ने चांदी को नई भूमिका दी है। इलेक्ट्रिक वाहनों की संरचना पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर आधारित होती है। बैटरी, मोटर, कंट्रोल यूनिट, चार्जिंग सिस्टम और सेंसर सब बिजली से चलते हैं। ऐसे में चांदी, जो दुनिया की सबसे श्रेष्ठ विद्युत चालक धातु मानी जाती है, अनिवार्य हो जाती है।

EVs में चांदी का उपयोग होता है :

  • हाई-परफॉर्मेंस इलेक्ट्रिकल कनेक्टर्स में
  • पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और इनवर्टर्स में
  • बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में
  • सेंसर और कंट्रोल यूनिट्स में
  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में

विशेषज्ञों के अनुसार, एक इलेक्ट्रिक कार में पारंपरिक गाड़ियों की तुलना में कई गुना अधिक चांदी की आवश्यकता होती है।

सप्लाई कम, मांग ज्यादा-यही है असली वजह

मांग में यह उछाल चांदी की सप्लाई से मेल नहीं खा रहा। चांदी आमतौर पर कॉपर, जिंक और लेड की खदानों से साथ में निकलती है। इसलिए केवल चांदी के लिए नई खदानें खोलना महंगा और समय लेने वाला काम है। रिपोर्टों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर पिछले पांच वर्षों में चांदी का उत्पादन लगभग स्थिर रहा है, जबकि औद्योगिक उपयोग में 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह असंतुलन अब बाजार में दीर्घकालिक तेजी (Long-Term Bullish Trend) को मजबूत बना रहा है।

भारत में बढ़ती दिलचस्पी और निवेश की नई सोच

भारत में निवेशकों की मानसिकता भी तेजी से बदल रही है। पहले जहां सोने और रियल एस्टेट को प्राथमिकता दी जाती थी, अब चांदी को एक औद्योगिक परिसंपत्ति (Industrial Asset) के रूप में देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि चांदी अब सिर्फ भावनात्मक या पारंपरिक धातु नहीं, बल्कि उद्योगों की रीढ़ बन चुकी है। इसका मूल्य अब केवल फैशन या गहनों से नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और ऊर्जा ट्रांजिशन से तय होता है।

2026 में क्या होगा

वर्तमान भाव 2,20,000 रुपये प्रति किलो है। मार्केट विश्लेषक मानते हैं कि अगर मांग इसी गति से बढ़ती रही
और सप्लाई में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ, तो 2026 के अंत तक चांदी 2.5 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है कम अवधि में इसमें 2.25 लाख से 2.45 लाख रुपये प्रति किलो का उतार-चढ़ाव संभव है। हालांकि वैश्विक ब्याज दरें, डॉलर इंडेक्स और चांदी की रीसाइक्लिंग दरें इसकी गति को प्रभावित कर सकती हैं। फिर भी दीर्घकालिक दृष्टि से बाजार विशेषज्ञ इसे मजबूत संरचनात्मक तेजी (Strong Structural Bullish Phase) मान रहे हैं।

भविष्य की ‘स्ट्रैटेजिक मेटल’

सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और 5जी टेक्नोलॉजी की बढ़ती मांग ने चांदी को एक नई श्रेणी में ला खड़ा किया है, जिसे विशेषज्ञ स्ट्रैटेजिक मेटल कह रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि यह धातु अब केवल सजावट या निवेश का माध्यम नहीं रही, बल्कि भविष्य की ऊर्जा और संचार प्रणालियों के लिए एक आवश्यक संसाधन बन चुकी है। दूसरे शब्दों में, जो धातु कभी तिजोरी में बंद रहती थी, अब वह कल की गाड़ियों और सोलर पैनलों में तकनीक की शक्ति बन गई है। जहां सोना स्थिर निवेश का प्रतीक रहा है, वहीं चांदी अब नवाचार और विकास की पहचान बन चुकी है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दुनिया इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में इसी गति से बढ़ती रही, तो आने वाले कुछ वर्षों में चांदी की यह चमक और तेज होगी।

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