Explainer : हरियाणा में 41.61 लाख वाहन बिना बीमा, ‘बिना कवच’ दौड़ रहीं गाड़ियां, जानिये कानून सख्त फिर भी क्यों जारी है उल्लंघन
कानून सख्त होने के बावजूद उल्लंघन जारी : पंजाब, दिल्ली भी पीछे नहीं, लोकसभा में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
Insurance Alert : अगर आप हर दिन सड़क पर निकलते हैं, तो यह मानकर चलते हैं कि सामने से आ रही गाड़ी नियमों के तहत चल रही होगी। लेकिन क्या वह बीमित भी है? यह सवाल अब केवल औपचारिक नहीं रहा। लोकसभा में सामने आए आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि हरियाणा की सड़कों पर 41.61 लाख वाहन ऐसे हैं, जिनके पास वैध बीमा नहीं है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में यह जानकारी दी। यह आंकड़ा पंजाब के होशियारपुर से सांसद राजकुमार चब्बेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में सामने आया। यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सामाजिक जोखिम है।
केवल हरियाणा ही नहीं, तस्वीर और भी चिंताजनक
हरियाणा के 41.61 लाख वाहनों के अलावा पंजाब में 56.54 लाख, दिल्ली में 30.95 लाख और चंडीगढ़ में 2.19 लाख वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं। देशभर में ऐसे वाहनों की संख्या 14.31 करोड़ बताई गई है। राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश 2.10 करोड़, महाराष्ट्र 1.60 करोड़ और तमिलनाडु 1.27 करोड़ के साथ शीर्ष पर हैं। यानी सड़क पर दौड़ती हर बड़ी आबादी का एक हिस्सा बिना किसी बीमा कवच के है।
‘बिना कवच’ का मतलब क्या
भारत में थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य है। इसका उद्देश्य वाहन मालिक की नहीं, बल्कि दुर्घटना पीड़ित की सुरक्षा है। यदि किसी बीमित वाहन से दुर्घटना होती है, तो बीमा कंपनी पीड़ित को कानूनी मुआवजा देती है। लेकिन यदि वाहन बिना बीमा के है, तो इलाज, मुआवजा और कानूनी खर्च की पूरी जिम्मेदारी सीधे वाहन मालिक पर आती है।
हरियाणा में हर साल लगभग 12 हजार सड़क दुर्घटनाएं दर्ज होती हैं और करीब 5 हजार लोगों की मौत होती है। ऐसे में बिना बीमा वाहन किसी भी परिवार के लिए आर्थिक संकट बन सकता है।
कानून क्या कहता है
मोटर व्हीकल एक्ट , 1988 के तहत बिना वैध बीमा वाहन चलाना गैरकानूनी है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार :
- पहली बार पकड़े जाने पर 2,000 रुपये तक जुर्माना या 3 महीने तक की सजा
- दोबारा उल्लंघन पर 4,000 रुपये तक जुर्माना या सजा
- वाहन जब्त करने का अधिकार
कानून सख्त है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उसका पालन व्यापक स्तर पर नहीं हो रहा।
सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि यदि बिना बीमा वाहन दुर्घटना में शामिल पाया जाता है, तो मुआवजे के लिए वाहन की नीलामी तक की जा सकती है। अदालत ने राज्यों को नियमों के कड़ाई से पालन के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर प्रवर्तन कमजोर नजर आता है।
फिर उल्लंघन क्यों जारी है
1. डिजिटल सिस्टम का बिखराव
बीमा, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र और रोड टैक्स अलग अलग प्लेटफॉर्म पर दर्ज हैं। इनके बीच रियल टाइम समन्वय की कमी है।
2. नवीनीकरण में लापरवाही
कई वाहन मालिक समय पर बीमा रिन्यू नहीं कराते। जागरूकता की कमी भी एक वजह है।
3. सीमित चेकिंग
सड़क पर नियमित जांच का दायरा सीमित है। ई चालान की व्यवस्था होने के बावजूद निरंतर निगरानी नहीं हो पाती।
4. आर्थिक सोच
कुछ लोग बीमा प्रीमियम को खर्च मानते हैं, सुरक्षा निवेश नहीं।
सरकार का ‘4 ई’ मॉडल
केंद्र सरकार सड़क सुरक्षा के लिए ‘4 ई’ मॉडल पर काम कर रही है:
- एजुकेशन
- इंजीनियरिंग
- इंफोरसमेंट
- इमरजेंसी केयर
विशेषज्ञों का सुझाव है कि बीमा सत्यापन को वाहन फिटनेस, प्रदूषण और टैक्स नवीनीकरण से डिजिटल रूप से जोड़ा जाए। यदि बीमा समाप्त हो तो अन्य सेवाएं स्वतः अवरुद्ध हो जाएं, ऐसी व्यवस्था प्रभावी हो सकती है। 41.61 लाख वाहन केवल संख्या नहीं, बल्कि 41.61 लाख संभावित जोखिम हैं। सड़क पर चलना केवल व्यक्तिगत सुविधा नहीं, सामूहिक जिम्मेदारी भी है। जब तक बीमा को केवल कागजी औपचारिकता समझा जाएगा, तब तक सड़क सुरक्षा अधूरी रहेगी।

