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El Nino Monsoon Impact : सितंबर की कम बारिश से क्यों बढ़ी चिंता? अल नीनो, खेती और जलाशयों पर समझिए पूरा असर

अगस्त में सामान्य से 16 फीसदी कम बारिश; खरीफ बुवाई का रकबा 2 फीसदी घटा, जलाशयों में भी पिछले साल से कम पानी

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El Nino Monsoon Impact : सितंबर में सामान्य से कम बारिश के अनुमान ने मानसून को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सितंबर में देशभर में दीर्घकालिक औसत (LPA) के 94 फीसदी से कम बारिश का अनुमान जताया है। अगस्त में भी बारिश सामान्य से 16 फीसदी कम रही थी। ऐसे में सवाल है कि अगर सितंबर में भी बारिश कमजोर रही तो इसका खेती, जलाशयों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

ICICI Bank की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त के अंत तक मानसून की संचयी कमी 14 फीसदी हो गई थी। रिपोर्ट में मजबूत होते अल नीनो और हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) के तटस्थ स्थिति में लौटने को मानसून के लिए नकारात्मक जोखिम बताया गया है।

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पहले समझिए-अल नीनो क्या है ?

अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म होने की स्थिति है। इससे दुनिया के कई हिस्सों में मौसम का पैटर्न बदलता है। भारत में मजबूत अल नीनो अक्सर कमजोर मानसून से जुड़ा रहा है। IMD के अनुसार, अल नीनो का असर खास तौर पर मानसून के दूसरे हिस्से और सितंबर की बारिश पर अधिक दिखाई दे सकता है।

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ICICI Bank की रिपोर्ट में जुलाई-सितंबर के दौरान मजबूत से बहुत मजबूत अल नीनो की संभावना करीब 99 फीसदी बताई गई है। इसमें बहुत मजबूत स्थिति की संभावना 75 फीसदी है। सितंबर-नवंबर के दौरान बहुत मजबूत अल नीनो की संभावना करीब 100 फीसदी आंकी गई है।

IOD कमजोर हुआ तो क्या बदलेगा ?

IOD हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री तापमान में अंतर से जुड़ी स्थिति है। यह भी भारतीय मानसून को प्रभावित कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में IOD इंडेक्स घटकर करीब 0.22 रह गया और तटस्थ क्षेत्र में लौट आया। ऐसे में मानसून को इससे मिलने वाला संभावित सहारा कमजोर हुआ है। दूसरी ओर, अल नीनो मजबूत हो रहा है। दोनों परिस्थितियां मानसून के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं।

सितंबर की बारिश इतनी महत्वपूर्ण क्यों है ?

सितंबर खरीफ फसलों के विकास और पकने का अहम समय है। इस दौरान पर्याप्त बारिश न होने पर मिट्टी में नमी कम हो सकती है और कुछ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। सितंबर की बारिश आगामी रबी फसलों की बुवाई के लिए भी मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद करती है।

इस साल अगस्त में ही बारिश सामान्य से 16 फीसदी कम रही। ऐसे में सितंबर की बारिश पर किसानों की नजर बनी हुई है।

खरीफ बुवाई पर कितना असर ?

28 अगस्त तक देश में 107.1 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी। यह पिछले साल के 109 मिलियन हेक्टेयर से करीब 2 फीसदी कम है।

प्रमुख फसलों का रकबा

  • धान: 3.4 फीसदी कम
  • मोटे अनाज: 2.3 फीसदी कम
  • तिलहन: 0.5 फीसदी कम
  • दलहन: 1.2 फीसदी अधिक

अगस्त के अंत तक सामान्य खरीफ क्षेत्र का करीब 97 फीसदी हिस्सा बोया जा चुका था। पिछले साल यह आंकड़ा 99 फीसदी था।

हालांकि, तस्वीर पूरी तरह खराब नहीं है। ICICI Bank के अनुसार, खरीफ की बुवाई का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। इसलिए मौजूदा बारिश की कमी का असर बुवाई की तुलना में अब फसलों की बढ़वार और पैदावार पर अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

जलाशयों में भी पिछले साल से कम पानी

27 अगस्त तक देश के 150 प्रमुख जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का 68 फीसदी पानी था। पिछले साल इसी समय यह स्तर 74 फीसदी था।

जलाशयों में कम भंडारण का असर आने वाले समय में सिंचाई और रबी फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है। हालांकि, सितंबर में बारिश बेहतर रहने पर जलाशयों के स्तर में सुधार की उम्मीद है।

क्या ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा असर ?

फिलहाल ग्रामीण मांग में मजबूती बनी हुई है। ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों की बिक्री से ग्रामीण बाजार को सहारा मिल रहा है। जुलाई में कृषि ऋण की वृद्धि सालाना आधार पर 17 फीसदी रही।

लेकिन अगर सितंबर में बारिश लगातार कमजोर रही तो फसल उत्पादन और किसानों की आय पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर आगे चलकर ग्रामीण मांग पर भी पड़ सकता है।

तो क्या मानसून को खराब मानें ?

मौजूदा आंकड़े मानसून पर दबाव जरूर दिखाते हैं, लेकिन सितंबर की वास्तविक बारिश अभी महत्वपूर्ण है। मजबूत अल नीनो, कमजोर IOD, अगस्त में कम बारिश और जलाशयों में घटता भंडारण चिंता के प्रमुख कारण हैं।

दूसरी ओर, खरीफ बुवाई का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है और कुछ फसलों, खासकर दलहन, का रकबा बढ़ा है। इसलिए आने वाले हफ्तों में सबसे अहम बात यह होगी कि सितंबर में वास्तव में कितनी बारिश होती है और उसका क्षेत्रवार वितरण कैसा रहता है।-एजेंसी इनपुट के साथ

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