ECI Row: दो अफसरों की भूमिका पर सवाल, IT प्रमुख सीमा खन्ना और मनीष गर्ग सुर्खियों में
ECINET में मतदाता डाटाबेस के कथित केंद्रीकरण और कार्य आवंटन में बदलाव को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में कथित आंतरिक मतभेदों के बीच आयोग के दो वरिष्ठ अधिकारियों निर्वाचन आयोग की महानिदेशक (आईटी) डॉ. सीमा खन्ना और वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग की भूमिका चर्चा में है। हाल की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तथा आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
ECINET में पहुंच को लेकर विवाद
विवाद का एक प्रमुख केंद्र ECINET और उससे पहले इस्तेमाल किए जा रहे ERONet को बताया जा रहा है। चुनाव आयोग ने जनवरी 2026 में ECINET को अपने 40 से अधिक ऐप और पोर्टल को एक मंच पर लाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू किया था। आयोग के अनुसार इसका उद्देश्य चुनाव संबंधी सेवाओं को अधिक एकीकृत और पारदर्शी बनाना था।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ निर्वाचन अधिकारियों विशेष रूप से निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) की डिजिटल पहुंच को लेकर संधू और जोशी ने सवाल उठाए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों आयुक्तों ने मतदाता डाटाबेस के नियंत्रण के धीरे-धीरे केंद्रीकृत होने की आशंका जताई और यह सवाल उठाया कि क्या आईटी विभाग को वैधानिक रूप से जिम्मेदार अधिकारियों की पहुंच सीमित करने का अधिकार है।
रिपोर्ट के अनुसार, संधू ने अगस्त में यह भी दर्ज किया कि कई मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और ERO ने उन्हें ERONet पर पूर्ण और उचित पहुंच नहीं होने की जानकारी दी थी। उन्होंने वैधानिक अधिकारियों को पूर्ण पहुंच देने की बात कही थी।
कौन हैं सीमा खन्ना?
ECI की आधिकारिक अधिकारी निर्देशिका के अनुसार, डॉ. सीमा खन्ना महानिदेशक (आईटी) हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, खन्ना 2025 में प्रतिनियुक्ति पर निर्वाचन आयोग से जुड़ीं। इससे पहले वह इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) से जुड़ी थीं। उन्होंने IIT दिल्ली से BTech और MTech की पढ़ाई की तथा सूचना सुरक्षा में डॉक्टरेट की है।
ECINET के जनवरी 2026 में लॉन्च के दौरान खन्ना ने साइबर सुरक्षा को प्लेटफॉर्म का प्रमुख आधार बताया था। आयोग के अनुसार ECINET में 40 से अधिक ऐप और पोर्टल को एकीकृत किया गया है।
मनीष गर्ग पर क्या सवाल उठे?
ECI की आधिकारिक निर्देशिका में मनीष गर्ग को वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 में प्रशासन का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद गर्ग ने कार्य आवंटन में बदलाव किया। इस बदलाव के तहत आईटी विभाग की निगरानी से एक वरिष्ठ अधिकारी को हटाए जाने की बात सामने आई। संधू और जोशी ने इस आदेश पर आपत्ति जताते हुए अलग-अलग कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई की मांग की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, अगले दिन दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने गर्ग के आदेश को अलग रखते हुए पूर्व कार्य आवंटन जारी रखने का निर्देश दिया, जब तक आयोग इस बारे में कोई सहमति नहीं बना लेता।
विवाद का व्यापक संदर्भ
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब निर्वाचन आयोग मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चला रहा है। ERONet अब ECINET के व्यापक डिजिटल ढांचे का हिस्सा है और मतदाता सूची से संबंधित कई प्रक्रियाएं इसके जरिए संचालित होती हैं।
हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि आयोग ने सार्वजनिक रूप से ECINET को कानून के अनुरूप विकसित प्लेटफॉर्म बताया है। जनवरी में इसके शुभारंभ के समय मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि ECINET को कानून के अनुरूप विकसित किया गया है।
इसलिए मौजूदा विवाद में एक ओर दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई आपत्तियां हैं, वहीं दूसरी ओर आयोग की ओर से ECINET को कानून के अनुरूप और चुनावी सेवाओं के एकीकरण के लिए तैयार किया गया प्लेटफॉर्म बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इन मुद्दों को लेकर अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं।

