Diabetes Heart Disease : डायबिटीज से दिल पर क्यों बढ़ता है खतरा, जानिए कैसे हो सकता है हार्ट अटैक
लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज रक्त नलिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है; कई मरीजों को दिल की बीमारी के बावजूद सीने में दर्द महसूस नहीं होता
Diabetes Heart Disease : डायबिटीज यानी शरीर में ब्लड शुगर का बढ़ जाना। आमतौर पर इसे केवल शुगर की बीमारी माना जाता है, लेकिन इसका असर सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक डायबिटीज रहने पर इसका असर दिल और रक्त नलिकाओं पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति में हार्ट अटैक और अन्य हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई बार डायबिटीज मरीज को दिल में बढ़ रही परेशानी का समय पर पता नहीं चलता। कुछ मरीजों को हार्ट अटैक से पहले होने वाला सीने का दर्द भी महसूस नहीं होता। ऐसे में बीमारी चुपचाप बढ़ती रह सकती है।
डायबिटीज से दिल को नुकसान कैसे पहुंचता है ?
सर गंगाराम अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में हार्ट फेल्योर कार्यक्रम के निदेशक डॉ. अश्विन मेहता के अनुसार, लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से शरीर में कई बदलाव होते हैं।
इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं। जैसे किसी पानी की पाइप में समय के साथ गंदगी जमा होने से उसका रास्ता संकरा हो जाता है, वैसे ही डायबिटीज में रक्त नलिकाओं को लंबे समय तक नुकसान पहुंचने से उनमें प्लाक जमा होने का खतरा बढ़ सकता है।
डायबिटीज में बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रक्त नलिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके साथ शरीर में सूजन और इंसुलिन के ठीक से काम न करने की समस्या भी हो सकती है। इससे रक्त नलिकाओं में वसा या प्लाक जमा होने की संभावना बढ़ जाती है।
कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर भी बढ़ा सकते हैं परेशानी
डायबिटीज के साथ कई मरीजों में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर भी बढ़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी साथ हो सकती है। जब ये समस्याएं एक साथ होती हैं तो दिल की धमनियों पर दबाव बढ़ जाता है। इससे धमनियां धीरे-धीरे संकरी हो सकती हैं। यदि किसी समय इनमें रक्त का प्रवाह बहुत कम हो जाए या पूरी तरह बंद हो जाए तो हार्ट अटैक हो सकता है।
क्या डायबिटीज में हार्ट अटैक अचानक होता है?
जरूरी नहीं। कई बार दिल की धमनियों में समस्या कई वर्षों में धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। मरीज को इसका पता तब चलता है, जब समस्या काफी बढ़ चुकी होती है। डॉ. मेहता ने 45 वर्षीय एक डायबिटीज मरीज का उदाहरण दिया। यह व्यक्ति करीब 10 साल से डायबिटीज से पीड़ित था और दवाएं नियमित रूप से नहीं ले रहा था। उसे पहले कभी हार्ट अटैक नहीं हुआ था और हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत भी नहीं थी।
एक दिन उसे पेट के ऊपरी हिस्से में तेज असहजता हुई। उसे लगा कि ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना खाने के कारण गैस की समस्या हुई है। अस्पताल में ईसीजी कराया गया तो उसमें बदलाव मिले। इसके बाद एंजियोग्राफी की गई। जांच में पता चला कि उसकी तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियां पूरी तरह ब्लॉक थीं। उसे बाईपास सर्जरी की जरूरत पड़ी। इस उदाहरण से पता चलता है कि डायबिटीज में दिल की बीमारी कई बार लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ सकती है।
डायबिटीज मरीज को सीने में दर्द क्यों नहीं महसूस हो सकता?
मेदांता के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहन के अनुसार, लंबे समय तक डायबिटीज रहने से शरीर की कुछ नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे दिल से आने वाले दर्द के संकेत भी कम महसूस हो सकते हैं।
आम तौर पर जब दिल को पर्याप्त रक्त नहीं मिलता तो सीने में दर्द या दबाव महसूस हो सकता है। लेकिन कुछ डायबिटीज मरीजों में यह चेतावनी स्पष्ट रूप से महसूस नहीं होती। यानी दिल में परेशानी बढ़ती रहती है, लेकिन मरीज को समय पर इसका पता नहीं चलता। यही वजह है कि डायबिटीज को दिल के लिए एक ‘साइलेंट रिस्क’ माना जाता है।
कब पता चलता है कि दिल पर असर पड़ चुका है?
कुछ मरीजों में सांस फूलना, जल्दी थक जाना या सामान्य काम करने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। कई बार जांच के दौरान ही पता चलता है कि दिल की पंप करने की क्षमता काफी कम हो गई है।
डॉ. त्रेहन ने बताया कि उनके पास ऐसे मरीज भी आते हैं, जिनके दिल की कार्यक्षमता 20 प्रतिशत तक रह गई होती है, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती। सांस फूलने के बाद जांच कराने पर उन्हें इसका पता चलता है।
क्या हर डायबिटीज मरीज को दिल की जांच करानी चाहिए?
विशेषज्ञों ने डायबिटीज मरीजों को नियमित रूप से हृदय की जांच कराने की जरूरत पर जोर दिया है। डॉ. त्रेहन के अनुसार, डायबिटीज का इलाज करने वाले डॉक्टरों को भी मरीजों को दिल से जुड़े संभावित खतरे के बारे में बताना चाहिए।
हालांकि, किस व्यक्ति को कौन-सी जांच और कितनी बार करानी है, यह उसकी उम्र, डायबिटीज की अवधि, अन्य बीमारियों और जोखिम के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के जांच का समय तय करना उचित नहीं है।
डायबिटीज मरीज क्या सावधानी रखें?
1. शुगर को नियंत्रित रखें
डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें और ब्लड शुगर की नियमित जांच कराएं।
2. दवा बीच में न छोड़ें
शुगर सामान्य आने पर भी दवा अपने आप बंद न करें।
3. ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर नजर रखें
डायबिटीज के साथ इनका बढ़ना दिल के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।
4. लक्षणों को नजरअंदाज न करें
सीने में दर्द के अलावा सांस फूलना, असामान्य थकान या अचानक कमजोरी जैसे लक्षण भी गंभीर हो सकते हैं।
5. नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
डायबिटीज के मरीज अपने डॉक्टर से हृदय की जांच की जरूरत और उसके समय के बारे में सलाह लें।
सबसे जरूरी बात
डायबिटीज का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से दिल की बीमारी होगी। लेकिन लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा सकती है। इसलिए केवल ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना ही पर्याप्त नहीं है। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, वजन, खान-पान, शारीरिक गतिविधि और दिल की सेहत पर भी ध्यान देना जरूरी है। समय पर जांच और उपचार से जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

