Delhi Police NCR vs FIR : प्रवेश साहिब सिंह के खिलाफ NCR क्या है, FIR से कैसे अलग ? समझें पूरा कानूनी अंतर
तिलक नगर में सड़क निरीक्षण के दौरान व्यक्ति को थप्पड़ मारने के आरोप में मंत्री के खिलाफ NCR; PWD अधिकारी की शिकायत पर AAP विधायक Jarnail Singh के खिलाफ FIR
Delhi Police NCR vs FIR : दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री Parvesh Sahib Singh के खिलाफ तिलक नगर में सड़क निरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति को कथित तौर पर थप्पड़ मारने की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट (NCR) दर्ज की है। वहीं, PWD के एक सहायक अभियंता की शिकायत पर AAP विधायक Jarnail Singh के खिलाफ अधिकारियों को धमकाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में FIR दर्ज की गई है।
दोनों मामलों में पुलिस ने शिकायतों पर कार्रवाई की है, लेकिन NCR और FIR की कानूनी प्रकृति और पुलिस के अधिकार अलग-अलग होते हैं। आइए समझते हैं कि NCR क्या होती है, FIR कब दर्ज की जाती है और दोनों में क्या अंतर है।
क्या होती है NCR?
NCR यानी Non-Cognisable Report (गैर-संज्ञेय रिपोर्ट) ऐसी शिकायत से संबंधित पुलिस रिकॉर्ड है, जिसमें आरोप किसी गैर-संज्ञेय अपराध से जुड़े होते हैं।
गैर-संज्ञेय अपराध में पुलिस को सामान्य तौर पर मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना जांच शुरू करने का अधिकार नहीं होता। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 174 के तहत ऐसे मामले की जांच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होती है।
ऐसे मामले में केवल शिकायत के आधार पर पुलिस संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती। गिरफ्तारी के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है।
NCR दर्ज होने का क्या मतलब है?
NCR दर्ज होने का अर्थ है कि पुलिस ने शिकायत को अपने रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया है। यह अपने आप में आरोपों की पुष्टि या संबंधित व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं है।
यदि मामले में जांच की जरूरत होती है तो पुलिस मजिस्ट्रेट से अनुमति लेकर आगे की कार्रवाई कर सकती है।
FIR क्या होती है ?
FIR यानी First Information Report (प्रथम सूचना रिपोर्ट) तब दर्ज की जाती है, जब पुलिस को दी गई सूचना से किसी संज्ञेय (Cognisable) अपराध का पता चलता है।
संज्ञेय अपराध में पुलिस सामान्य तौर पर मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना जांच शुरू कर सकती है। कानून के तहत निर्धारित परिस्थितियों में पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी भी कर सकती है।
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करती है। इस दौरान बयान दर्ज किए जा सकते हैं, साक्ष्य जुटाए जा सकते हैं और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
NCR और FIR में क्या अंतर है ?
| आधार | NCR | FIR |
|---|---|---|
| अपराध की प्रकृति | गैर-संज्ञेय अपराध | संज्ञेय अपराध |
| जांच | सामान्यतः मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद | सामान्यतः बिना पूर्व अनुमति शुरू की जा सकती है |
| गिरफ्तारी | केवल शिकायत के आधार पर गिरफ्तारी नहीं | कानून की अनुमति होने पर बिना वारंट गिरफ्तारी संभव |
| पुलिस की शुरुआती कार्रवाई | शिकायत को रिकॉर्ड किया जाता है | अपराध की सूचना पर FIR दर्ज कर जांच शुरू की जाती है |
| क्या इससे दोष सिद्ध होता है? | नहीं | नहीं |
FIR या NCR, दोनों का मतलब दोष साबित होना नहीं
यह समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ NCR दर्ज होना या FIR दर्ज होना, अपने आप में उसकी दोषसिद्धि नहीं है।
FIR पुलिस को संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर दर्ज की जाती है। इसके बाद जांच होती है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होती है।
इसी तरह NCR में दर्ज शिकायत के आरोपों की सत्यता भी अलग प्रक्रिया के तहत जांची जाती है। इसलिए केवल NCR या FIR दर्ज होने को अपराध साबित होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
Parvesh Sahib Singh के मामले में क्या हुआ ?
दिल्ली पुलिस ने तिलक नगर में सड़क निरीक्षण के दौरान हुई घटना से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई की। एक व्यक्ति ने शिकायत में आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान उसे थप्पड़ मारा गया।
इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने Parvesh Sahib Singh के खिलाफ NCR दर्ज की है। पुलिस को घटना से संबंधित अन्य शिकायतें भी मिली हैं। इन शिकायतों पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
NCR दर्ज होना इस बात का निष्कर्ष नहीं है कि शिकायत में लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
Jarnail Singh के खिलाफ क्यों दर्ज हुई FIR ?
इसी घटना से जुड़े अलग मामले में PWD के एक सहायक अभियंता ने पुलिस को शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि AAP विधायक Jarnail Singh ने PWD अधिकारियों को धमकाया और उनके सरकारी कार्य में बाधा डाली।
पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की है। इसके बाद पुलिस आरोपों की जांच करेगी और शिकायत में बताए गए तथ्यों तथा उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल करेगी।
आसान भाषा में समझें
NCR: गैर-संज्ञेय अपराध से संबंधित शिकायत को पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज करना। ऐसे मामले में जांच शुरू करने के लिए सामान्यतः मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होती है।
FIR: संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर दर्ज की जाने वाली प्रथम सूचना रिपोर्ट। ऐसे मामले में पुलिस सामान्य तौर पर बिना पूर्व अनुमति जांच शुरू कर सकती है।
सबसे जरूरी बात: NCR या FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराता। आरोपों की सत्यता जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में तय होती है।

