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Gallantry Awards 2026 : अदम्य साहस को राष्ट्रपति भवन का सलाम, देश के 51 जांबाजों की शौर्य गाथा, जाने क्या है कीर्ति, वीर और शौर्य चक्र का महत्व

7 मई 2025 को ऐसा क्या हुआ कि वायुसेना को मिले एक साथ इतने वीर चक्र; जाने मरणोपरांत सम्मान पाने वाले 6 शूरवीरों और नारी शक्ति के अदम्य साहस की कहानी

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नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह (चरण-1) के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत 'कीर्ति चक्र' से अलंकृत करती हुईं। -पीटीआई
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Gallantry Awards 2026 :  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह (चरण-1) के दौरान देश के 51 शूरवीरों को वीरता पुरस्कारों से अलंकृत किया। यह समारोह केवल पदकों को वर्दी पर सजाने का आयोजन नहीं था, बल्कि यह 140 करोड़ देशवासियों की ओर से उन जांबाजों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का क्षण था, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी। इन पुरस्कारों में 7 कीर्ति चक्र, 15 वीर चक्र और 29 शौर्य चक्र शामिल हैं। आम पाठकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर ये पदक किन परिस्थितियों में दिए जाते हैं और इन 51 वीरों के पदकों के पीछे की अघोषित कहानियां और सामरिक महत्व क्या है।

वीरता पुरस्कारों का वर्गीकरण और उनका महत्व

भारतीय सशस्त्र बलों में वीरता पुरस्कारों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है- युद्धकालीन (वॉर टाइम) और शांतिकालीन (पीस टाइम)। जब देश आधिकारिक रूप से युद्ध लड़ रहा हो या सीमा पर दुश्मन के साथ सीधी गोलाबारी हो रही हो, तब परमवीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र दिए जाते हैं। वीर चक्र युद्धकालीन वीरता का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है।

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दूसरी ओर, जब देश में शांति हो, लेकिन सेना आतंकवादियों, उग्रवादियों या घुसपैठियों से लड़ रही हो, तब अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र प्रदान किए जाते हैं। कीर्ति चक्र शांतिकालीन वीरता का दूसरा और शौर्य चक्र तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है। इन वीरों का चयन एक बेहद कठोर प्रक्रिया से गुजरता है, जहां यह साबित होना चाहिए कि जवान या अधिकारी ने 'ड्यूटी की सामान्य पुकार से बहुत आगे बढ़कर' व्यक्तिगत सुरक्षा की पूरी तरह परवाह किए बिना अदम्य साहस का परिचय दिया।

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7 मई 2025: वायुसेना और थलसेना के पराक्रम का वह विशेष दिन

पुरस्कार विजेताओं की सूची का विश्लेषण करने पर एक बेहद अहम और चौंकाने वाला तथ्य सामने आता है। 15 वीर चक्र विजेताओं में से 12 जांबाजों को 7 मई 2025 को किए गए उनके अदम्य साहस के लिए यह सम्मान मिला है। इनमें भारतीय वायुसेना के 10 अधिकारी (ग्रुप कैप्टन रणजीत सिंह सिद्धू, मनीष अरोड़ा, अनिमेश पटनी, कुणाल कालरा, विंग कमांडर जॉय चंद्रा, सार्थक कुमार, स्क्वाड्रन लीडर सिद्धांत सिंह, रिजवान मलिक, अर्षवीर सिंह ठाकुर) और थलसेना के दो अधिकारी (कर्नल कोषांक लांबा और लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट) शामिल हैं।

चूंकि 'वीर चक्र' दुश्मन के सामने युद्धभूमि में दिखाए गए साहस के लिए दिया जाता है, इसलिए 7 मई 2025 की यह तिथि किसी बड़े सामरिक हवाई अभियान या सीमा पार एक अत्यधिक समन्वित संयुक्त ऑपरेशन की ओर इशारा करती है। फाइटर जेट्स की कॉकपिट में लिए गए स्प्लिट-सेकंड के निर्णय और दुश्मन के एयर डिफेंस को चकमा देकर लक्ष्य को भेदने की वायुवीरों की यह कहानी भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो चुकी है। इसी दिन के ऑपरेशन में गृह मंत्रालय के सब इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज और कांस्टेबल दीपक चिंगखम ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजा गया।

सर्वोच्च बलिदान: जान देकर चुकाया मातृभूमि का कर्ज

कोई भी मेडल उस कमी को पूरा नहीं कर सकता जो एक शहीद का परिवार महसूस करता है। इस समारोह में 6 वीरों को मरणोपरांत सम्मानित किया गया। जब इन शहीदों की पत्नियों और माताओं ने राष्ट्रपति के हाथों सम्मान ग्रहण किया, तो दरबार हॉल में सन्नाटा छा गया और हर आंख नम हो गई।

महार रेजिमेंट की 1 राष्ट्रीय राइफल्स के सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर (6 जुलाई 2024) और आर्मी सर्विस कोर के लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से नवाजा गया। जम्मू-कश्मीर के दुर्गम इलाकों में आतंकवादियों की गोलियों का सामना करते हुए इन वीरों ने अपनी जान की परवाह नहीं की। इसी तरह आर्मर्ड कोर की 4 राष्ट्रीय राइफल्स के एल/डीएफआर बलदेव चंद (19 सितंबर 2025) ने अपनी अंतिम सांस तक दुश्मनों से लोहा लिया और उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र प्रदान किया गया।

आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों के नायक

शौर्य चक्र पाने वाले 29 जांबाजों की सूची भारत की आंतरिक सुरक्षा चुनौति यों की पूरी तस्वीर पेश करती है। इस सूची में राष्ट्रीय राइफल्स और पैरा स्पेशल फोर्सेज के कमांडो सबसे ज्यादा हैं। पैरा स्पेशल फोर्सेज के मेजर आशीष कुमार, मेजर लैशराम दीपक सिंह, मेजर शिवकांत यादव, लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार और कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर जैसे अधिकारियों ने कश्मीर घाटी से लेकर पूर्वोत्तर के घने जंगलों तक सर्जिकल ऑपरेशनों को अंजाम दिया है।

गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और राज्य पुलिस के जवानों का शौर्य भी किसी से कम नहीं रहा। छत्तीसगढ़ जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में खूंखार उग्रवादियों के खिलाफ अप्रैल 2024 में चलाए गए एक बड़े ऑपरेशन के लिए निरीक्षक लक्ष्मण केवट और रामेश्वर प्रसाद देशमुख को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। इसी तरह सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट विपिन विल्सन और कांस्टेबल सद्दाम हुसैन ने अपनी जान पर खेलकर नागरिकों की रक्षा की।

नारी शक्ति का परचम और नौसेना का शौर्य

यह रक्षा अलंकरण समारोह इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि इसमें भारतीय नौसेना की दो महिला अधिकारियों, लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के. और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए. को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। 26 जनवरी 2026 (गणतंत्र दिवस) के दिन दिखाए गए उनके अदम्य साहस ने यह साबित कर दिया है कि समंदर की लहरों से लेकर युद्ध के मैदान तक, भारत की बेटियां अब हर मोर्चे पर सीना ताने खड़ी हैं। नौसेना के ही लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर और राम गोयल को भी नवंबर 2024 में समंदर में दिखाए गए उनके अद्भुत पराक्रम के लिए शौर्य चक्र मिला।

अंततः, ये 51 पदक महज धातु के टुकड़े नहीं हैं; ये देश की संप्रभुता के रक्षक हैं। जब-जब देश पर संकट के बादल छाएंगे, ये पदक और इन्हें पहनने वाले जांबाज आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाते रहेंगे कि भारत की आजादी की कीमत हमारे वीरों के खून से चुकाई गई है।

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